क्या सरकार की मंत्रिपरिषद पंचायत बोर्ड है? विधानसभा की शक्तियों पर विधायक निजामुद्दीन बट ने उठाए सवाल
कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन बट ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा के विशेषाधिकारों और कामकाज पर लगे प्रतिबंधों पर संवैधानिक सवाल उठाए हैं। उन्होंने ...और पढ़ें
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निजामुद्दीन बट ने विधायकों के विशेषाधिकार पर उठाए सवाल।
HighLights
कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन बट ने विधानसभा की शक्तियों पर सवाल उठाए
उन्होंने विधानसभा को अन्य राज्यों से अलग मानने पर आपत्ति जताई
बट ने निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों को सीमित करने को असंवैधानिक बताया
नवीन नवाज, जम्मू। जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन बट ने केंद्रशासित प्रदेश की विधानसभा के विशेषाधिकारों, प्रोटोकॉल और कामकाज पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों को लेकर तीखे संवैधानिक सवाल खड़े किए हैं।
सदन में बोलते हुए उन्होंने सरकार से विधानसभा की शक्तियों और कार्य-संचालन नियमों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। केंद्र सरकार और नियमों पर सीधा हमला बोलते हुए बट ने सवाल उठाया, "क्या सरकार की मंत्रिपरिषद कोई पंचायत बोर्ड है?
मुझे संविधान में दिखाइए कि कहां लिखा है कि यह विधानसभा अन्य राज्यों की विधानसभाओं से अलग है। जब ऐसा कहीं नहीं है, तो निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकार क्यों सीमित किए जा रहे हैं?
प्रोटोकॉल और स्पीकर के अधिकार पर उठाए सवाल
कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन बट ने मंगलवार को विधानसभा के विशेषाधिकारों और कामकाज पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों के संवैधानिक आधार पर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से सदन की संवैधानिक स्थिति तथा उसके कामकाज से संबंधित प्रावधानों को स्पष्ट करने की मांग की।
विधानसभा में बोलते हुए बट ने विधायिकाओं के गठन और उनके कामकाज से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों का उल्लेख किया और पूछा कि आखिर किस प्रावधान के तहत इस विधानसभा को अन्य राज्यों की विधानसभाओं से अलग माना गया है।
संविधान में कहां लिखा है ऐसा?
उन्होंने कहा, “मुझे दिखाइए कि कहां लिखा है कि यह विधानसभा राज्यों की विधानसभाओं से अलग है। क्या संविधान में कहीं ऐसा है? नहीं, बिल्कुल नहीं।”
बट ने कहा कि मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत विधानसभा के कामकाज और उसके कार्य-संचालन नियमों से जुड़े कई सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इससे निर्वाचित प्रतिनिधियों के विशेषाधिकार और प्रोटोकॉल भी प्रभावित हुए हैं तथा विधायकों से कहा जा रहा है कि उन्हें पहले जैसे विशेषाधिकार और प्रोटोकॉल प्राप्त नहीं हैं।
मंत्री जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं
कांग्रेस विधायक ने पूर्व में लागू तीन-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था से जुड़े कुछ प्रावधानों और संदर्भों के जारी रहने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान संस्थागत व्यवस्था के अनुरूप आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि मंत्री जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं और उनके पास जनता का जनादेश होता है, लेकिन आरोप लगाया कि विधानसभा के कामकाज को सीमित किया जा रहा है और विधानसभा अध्यक्ष के अधिकारों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
विधानसभा निर्वाचित प्रतिनिधियों का मंच है
आपत्तियां दर्ज करते हुए बट ने कहा, “हमारे बारे में क्या? हम क्यों रहें? यह पूरी तरह असंवैधानिक है।” उन्होंने मांग की कि संबंधित पत्राचार और प्रावधानों को विधानसभा की कार्यवाही का हिस्सा बनाया जाए और सदन के समक्ष चर्चा के लिए रखा जाए।
बट ने यह भी कहा कि विधानसभा निर्वाचित प्रतिनिधियों का मंच है और उसकी शक्तियों तथा कामकाज से जुड़े मामलों पर सदन के पटल पर चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से विधानसभा और उसके सदस्यों की शक्तियों, अधिकारों तथा कामकाज को नियंत्रित करने वाली संवैधानिक और कानूनी स्थिति पर स्पष्टता प्रदान करने का आग्रह किया।
