जम्मू, राज्य ब्यूरो। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के नेतृत्व में जमीनों की रजिस्ट्री राजस्व विभाग के सुपुर्द किए जाने की मांग को लेकर वकीलों की अनिश्चितकालीन काम छोड़ हड़ताल चौथे दिन भी जारी रही। वकीलों की हड़ताल का असर अदालत के कामकाज पर भी साफ दिखने लगा है। परंतु वकील इस बात पर अड़े हैं कि जब तक सरकार अपना फैसला वापिस लेते हुए जमीनों की खरीद-फरोख्त पहले की तरह अदालत के सुपुर्द नहीं कर देती, उनका यह आंदोलन जारी रहेगा।

वहीं वकीलों की इस मांग को नजरंदाज कर प्रशासन ने अलग रजिस्ट्रेशन विभाग बनाने के अपने फैसले को सही करार दिया है। प्रशासन ने तर्क दिया है कि इस विभाग को विभिन्न प्रमाणपत्र रजिस्टर करने के अधिकार अब न्यायिक अदालतों के स्थान पर दिए गए हैं। पहले राजस्व विभाग जमीन के सिर्फ फर्द ही काटता था। राजस्व विभाग ने विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को रजिस्ट्रेशन विभाग बनने के फायदे गिनाना भी शुरू कर दिया है।

विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को यह बताया जा रहा है कि देश के अन्य राज्यों की तर्ज पर ही यह विभाग बनाया गया है। इससे लोगों को अब अपनी जमीनों के प्रमाणपत्र रजिस्टर करवाने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। परंतु वकील इस फैसले की खिलाफत कर रहे हैं।

इसी तरह जैसे पहले लोगों को जमीन की रजिस्ट्रेशन के लिए स्टांप ड्यूटी के अलावा कोर्ट में फीस देनी पड़ती थी, अब ऐसा नहीं होगा। सब रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार बनने से लोग सीधे उनके पास जा सकेंगे। इससे जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों ही बढ़ेगी। राजस्व विभाग की ओर से कहा जा रहा है कि जो भी अधिकारी फर्द देने के लिए जिम्मेदार होते हैं, वे सब रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार के सीधे नियंत्रण में रहेंगे।

यही नहीं नए रजिस्ट्रेशन विभाग से जमीनों का रजिस्ट्रेशन भी जल्दी होगा। जमाबंदी जैसे राजस्व रिकार्ड भी अपडेट होंगे। सभी रजिस्ट्रेशन अब एक ही छत के तले होंगी। इससे भूमि रिकार्ड भी कंप्यूटराइज्ड होगा। राजस्व विभाग लोगों को यह विभाग बनने के फायदे लगातार गिना रहा है।

Posted By: Rahul Sharma

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