जम्मू, राज्य ब्यूरो। पूर्व सैनिकों और कई व्यक्तियों से उनके शस्त्र लाइसेंस के नवीनीकरण में आने वाली कठिनाइयों पर लगातार मिल रही शिकायतों का संज्ञान लेते हुए, जम्मू के मंडलायुक्त डा. राघव लंगर ने वीरवार को जिलाधिकारियों की एक बैठक की अध्यक्षता की।

उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। जिनका शस्त्र लाइसेंस नवीनीकरण एनडीएएल पोर्टल पर ऑनलाइन नहीं होने के कारण रोक दिया गया है, शस्त्र लाइसेंस जिनका नवीनीकरण रिकॉर्ड जब्त होने या जांच एजेंसियों के पास है, जिनके लाइसेंस समाप्त हो गए हैं और कानूनी उत्तराधिकारी ने स्थानांतरण या नए जारी करने और अन्य संबंधित मुद्दों के लिए आवेदन किया है, इन सभी मुद्दों पर चर्चा की।मंडलायुक्त ने जिलाधिकारियों को उन सभी मामलों की अनुशंसा करने का निर्देश दिया, जिनका नवीनीकरण एनडीएएल पोर्टल पर ऑनलाइन नहीं होने के कारण रोक दिया गया है ताकि गृह विभाग से आवश्यक निर्देश मांगे जा सकें।

जिन मामलों में अनुमति समाप्त हो चुकी है तथा उनके कानूनी वारिस ने लाइसेंस स्थानांतरित के लिए आवेदन किया है, मंडलायुक्त ने जिला उपायुक्तों को अपने कार्यालय में विस्तार से जानकारी देने का निर्देश दिया, ताकि गृह विभाग से आवश्यक दिशा-निर्देश मांगा जा सके।

मंडलायुक्त ने पाया कि जिस अवधि के लिए जांच एजेंसियों द्वारा रिकॉर्ड जब्त किया गया है, उसी के दौरान डेटा और जानकारी के आधार पर वास्तविक रूप से जारी लाइसेंस का कुछ जिले नवीनीकरण कर रहे हैं। हालांकि कुछ जिलों ने ऐसे मामलों के लिए नवीनीकरण प्रक्रिया को रोक कर रखा है। मंडलायुक्त ने आर्म्स रूल्स, 2016 के तहत अतिरिक्त सचिव, गृह विभाग को इस मामले में सरकार से आवश्यक निर्देश जारी करने, भविष्य में किसी भी कठिनाई से बचने और जिलों द्वारा इस तरह के नवीनीकरण आवेदनों को उचित सत्यापन के बाद निपटाने में कोई कमी नहीं होने का निर्देश दिया। कठुआ, उधमपुर के जिलाधिकारियों ने संबंधित तहसीलदारों और एसडीएम द्वारा दशकों पहले जारी किए गए ऐसे लाइसेंसों की वर्तमन स्थिति के संबंध में स्पष्टीकरण देने का मुद्दा भी उठाया।

मंडलायुक्त ने जिला मजिस्ट्रेट को ऐसे पुराने मामलों का डाटा आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए साझा करने की सलाह दी।गौरतलब है कि गृह विभाग ने 2018 की अधिसूचना के तहत चल रही जांच को देखते हुए जिलाधिकारियों द्वारा नए शस्त्र लाइसेंस जारी करने पर पहले ही रोक लगा दी थी। 

Edited By: Vikas Abrol