'नेताओं को पेंशन, जवानों को क्यों नहीं?', रिटायर्ड अफसरों ने उठाई 1 करोड़ मुआवजा और पुरानी पेंशन की मांग
जम्मू में अर्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त अधिकारियों ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग की है। उन्होंने नेताओं को ...और पढ़ें

पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की उठी मांग।
HighLights
सेवानिवृत्त अर्धसैनिक बलों ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग की
नेताओं को पेंशन मिलने पर जवानों को वंचित रखने पर सवाल उठाया
शहीदों के परिवारों को ₹1 करोड़ मुआवजे और पदोन्नति सुधार की मांग
जागरण संवाददाता, जम्मू। अर्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त अधिकारियों और जवानों ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग की है। जम्मू में पत्रकारवार्ता के दौरान रिटायर्ड सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सवाल किया कि दो दिन सांसद रहने वाले व्यक्ति को पेंशन मिल सकती है, तो 20 से 40 वर्ष तक देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले जवान इससे वंचित क्यों हैं।
एसोसिएशन ने कहा कि सीआरपीएफ, बीएसएफ, एसएसबी सहित अन्य बलों के जवान कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करते और लंबे समय तक परिवारों से दूर रहते हैं।
इसके बावजूद सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें पेंशन और सामाजिक सुरक्षा के उचित अधिकार नहीं मिलते। एडीजी एचआर सिंह सहित पदाधिकारियों ने कल्याण संबंधी मुद्दों की अनदेखी पर चिंता जताते हुए ठोस नीति बनाने की मांग की।
पूर्व अधिकारियों ने पदोन्नति में देरी का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, कई जवान वर्षों तक एक ही पद पर रहते हैं और 20 वर्ष की सेवा के बाद भी सिपाही को हवलदार बनने का अवसर नहीं मिलता।
एसोसिएशन ने ड्यूटी के दौरान बलिदान देने वालों के परिवारों को कम से कम एक करोड़ रुपये की राहत देने की मांग की।
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