जम्मू, जागरण संवाददाता। पहली नंवबर से हड़ताल पर गए वकीलों की कामछोड़ हड़ताल से राज्यपाल प्रशासन ओर वकीलों के बीच एक माह से जारी गतिरोध थमने का नाम नही ले रहा है। जेएडंके बार एसोसिएशन जम्मू के वकीलों की जनरल हाउस बैठक भी बेनतीजा रही। वकीलों की हड़ताल अब आगे खिच जाने से जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट और उसके अधीन्स्थ अदालतों में कामकाज पहली नंवबर से ठप पड़ा है। हड़ताल जम्मू डिवीजन तक ही सीमित है।

नाम न छापने की शर्त पर हाईकोर्ट के सीनीयर वकील ने बताया कि जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट में करीब 40 हजार मामले लंबित है, जबकि निचली अदालतों में इनकी संख्या 62,500 के करीब है। जिन निचली अदालतों में कामकाज ठप है, उनमें पैंसजर कोर्ट, इलेक्ट्रिीसिटी कोर्ट, चीफ ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट, एक्साइज कोर्ट, रेलवे कोर्ट, प्रथम मुंसिफ कोर्ट, प्रथम एडीशनल कोर्ट मुंसिफ, द्वितीय मुंसिफ कोर्ट, तृतीय मुंसिफ कोर्ट, सब रजिस्ट्रार,मैट्रिमोनियल कोर्ट, डिस्ट्रक्ट सेशन जज, फर्स्ट एडीशनल सेशन कोर्ट, एंटीकरप्शन कोर्ट, फर्स्ट प्रिंसिपल एंटी करप्शन जज, सेकेंड एडीशनल सेशन जज, एनआइए कोर्ट, सीबीआई कोर्ट, एमएसीटी अदालत, कंज्यूमर कोर्ट और उसके अपीलेंट कोर्ट शामिल हैं। इसके अलावा सिटी जज, ट्रैफिक मोबाइल और ट्रैफिक एडीशनल मोबाइल मजिस्ट्रेट और उसके अपीलेंट कोर्ट शामिल हैं।

जम्मू डिवीजन में एक लाख के करीब लोग है, जो न्याय के लिए मोहताज है। सीजेएम अदालत में फौजदारी के एक मामले में जमानत लेने पहुंचे रमन शर्मा का कहना है कि अदालते तो खुली हुई है, लेकिन वकील न मिलने से दिक्कते पेश आ रही है। ट्रैफिक मोबाइल मजिस्ट्रेट अदालत के बाहर वाहन का चालान के लिए पहुंचे अरविंद कुमार का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस ने उनका भारी भकरम चालान काटा था, इसे मैं चुनौती देना चाहता हूं, लेकिन वकील न मिलने से मामला लटक चुका है। अब तो मेरे पास दो विकल्प हैं या तो 10 हजार रुपये जुर्माना दूं या फिर हड़ताल खत्म होने का इंतजार।

जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के प्रधान अभिनव शर्मा का कहना है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नही होती तब तक हड़ताल जारी रहेगी। शनिवार को जम्मू में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय में मंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने साफ कह दिया कि कोई गलतफहमी में न रहे केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में सभी केंद्रीय कानून लागू होंगे। सिंह के इस बयान से सरकार का रूख साफ है कि वह इस जमींन की खरीद-फरोख्त व अन्य दस्तावेज की रजिस्ट्री करने का अधिकार राजस्व विभाग के पास ही रहेंगे।

वकीलों की एक मांग यह भी है कि जानीपुर हाईकोर्ट परिसर काे फारेस्ट लैंड बाहू रैका में शिफ्ट न किया जाए। हड़ताली वकीलों की बात में भी तर्क है कि अगर हाईकोर्ट परिसर का निर्माण होगा तो इससे फारेस्ट लैंड पर हजारों की संख्या में पेड़ों की बलि लग जाएगी। सिर्फ हाईकोर्ट शिफ्ट हुआ तो वकीलों को काफी दिक्कत होगी क्योंकि एक ही दिन में कुछ केसों के लिए वकील जिला कोर्ट में पेश होते है तो कुछ के लिए हाईकोर्ट में। ऐसे में वकीलों के लिए जानीपुर से बाहु क्षेत्र तक पहुंचना संभव नहीं हो पाएगा। बेशक राज्यपाल प्रशासन हाईकोर्ट परिसर को शिफ्ट न करने पर सहमति जता सकती है, लेकिन जमींनों की रजिस्ट्री अधिकार राजस्व विभाग से न्यायपालिका को फिर दिए जाने पर सरकार का रूख साफ है कि वह इससे पीछे हटने वाले नहीं।

मुख्य सचिव के साथ हुई बैठक की दी जानकारी

बार के वरिष्ठ सदस्यों ने भी रजिस्टरी के अधिकार कोर्ट से लेकर राजस्व विभाग को सौंपने और कोर्ट को जानीपुर से रैका में शिफ्ट करने के विरोध में हड़ताल पर जाने का समर्थन किया। बैठक में अभिनव शर्मा ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश ने बार को अवगत करवाया था कि जानीपुर से कोर्ट को रैका में स्थानांतरित करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। शर्मा ने मुख्य सचिव के साथ हुई बैठक के बारे में भी सदस्यों को जानकारी दी।

जमीन के रजिस्ट्री करने के अधिकार वापस लेने पर अड़े

एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट अभिनव शर्मा ने कहा कि जब तक रजिस्ट्री के अधिकार ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को वापस नहीं दिए जाते तब तक वे हड़ताल जारी रखेंगे। बार एसोसिएशन ने जिला कोर्ट कांप्लेक्स जानीपुर में जेएंडके हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की कांफ्रेंस हॉल में जनरल हाउस मीटिंग का आयोजन किया। बैठक की अध्यक्षता बार के प्रधान एडवोकेट अभिनव शर्मा ने की।

Posted By: Rahul Sharma

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