Jagran Sanskarshala 2022 : संस्कारशाला में प्रस्तुत कहानी में बच्चों की पढ़ाई के लिए आवश्यक बताते हुए अमर के अपने दादा जी के प्रति अनुचित व्यवहार काे एक प्रकार से सही ठहराया गया है, परंतु मेरा यह मानना है कि किसी भी परिस्थिति में बच्चों के असभ्य व्यवहार को न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता है। हमें यह बात गहराई से समझ लेनी चाहिए कि आज के दौर में बच्चे, युवाओं का रुख और अशिष्ट व्यवहार अधिकतर आधुनिक तकनीक के बेलगमा इस्तेमाल के कारण ही महसूस किया जा रहा है।

दरअसल रफ्तार आज हमारे युग का सच बन गई है। इसने समाज को बदलते हुए टेकसेवी पीढ़ी हमारे सामने खड़ी की है जिसकी दुनिया ही अलग है। रफ्तार और तकनीक की इस दुनिया में हमारे बच्चे वास्तविक से कटते जा रहे हैं। घर परिवार से सामान्य व्यवहार की एक नई परिभाषा गढ़ ली है इन्होंने जो जाने अनजाने अभद्रता और असभ्यता के रंग में रंग गई है। इस पीढ़ी का अनुभव संसार मोबाइल या टैब की स्क्रीन से बड़ा हो नहीं पा रहा है।

तकनीक के इस मोह जाल ने हमारे बच्चों को संबंधों की मिठास, महत्व और सम्मान की भावना से परे किया है और एक सुनहरी आभासी सम्मान की भावना से परे किया है और आभासी काल्पनिक दुनिया का आधा अधूरा आनंद दिया है। स्क्रीन के बाहर आदर एवं स्नेह भरा संसार, संवेदनाओं का संसार तकनीक ने आज की पीढ़ी से छीन लिया है।

अपनी तकनीक सुविधाओं के साथ ही हर्षमग्न रहने वाले आज के बच्चे गैजेटस के अधीन होकर, नितांत अकेले भी होते जा रहे हैं। यहां यह समझने की की आवश्यकता है कि पढ़ाई की आड़ में कहीं हमारे बच्चे असीमित गैजेटस तो उपयोग नहीं कर रहे हैं। अधिक समय तक मोबाइल, लैपटाप जैसे गैजेटस का इस्तेमाल करने की रोक टोक से अभद्र तो नहीं होते जा रहे? यहां यह कहना भी अनुचित नहीं होगा कि अभिभावक भी आज बच्चों की इस लत को बढ़ावा दे रहे हैं। कभी पढ़ाई के नाम पर तो कभी स्टेटस की खातिर। बच्चे की असभ्य और अनुशासनहीन जीवन शैली को अनदेखा करते हुए मनमाने ढंग से व्यवहार करने की खुली छूट भी दे रहे हैं।

बेशक, तकनीक आज बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का एक अभिन्न हिस्सा बना डाली है हमने और इसका संतुलित और सकरात्मक उपयोग बड़ों एवं बच्चों के लिए कुछ हद तक सही भी है परंतु आधुनिक गैजेटस की अंधी दौड़ में शामिल रहने के लिए बच्चे यदि बड़ों की सलाह का अनादर करें, उनकी सीख और मार्गदर्शन को सिरे से नकारते हुए मान सम्मान का ध्यान न रखें तो स्थिति निश्चय ही अधिक गंभीर हो सकती है। बड़ों को ही सिखाना पड़ेगा कि तकनीक का रचनात्मक उपयोग भी हो और इसके कारण संबंधों में कटुता भी न आए।

- सुनीता भगत, वरिष्ठ उद्घोषिका

आल इंडिया रेडियो, जम्मू

Edited By: Rahul Sharma

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