श्रीनगर, नवीन नवाज: संघर्ष विराम समझौते पर अमल की हामी भरने के बाद नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर साढ़े तीन माह से भले ही पूरी तरह शांति बनी हुई हो, लेकिन पाकिस्तान के इरादे नेक नजर नहीं आते। गुलाम कश्मीर में करीब तीन दर्जन आतंकी घुसपैठ के लिए तैयार बैठे ही हैं, तो कश्मीर के भीतरी इलाकों में आतंकियों की भर्ती से पता चलता है कि पाकिस्तानी सेना व उसकी खुफिया एजेंसी (आइएसआइ) शांत नहीं बैठी हैं। यही नहीं, कश्मीर के भीतरी इलाकों में भी स्थानीय आतंकियों की भर्ती बढ़ी है। इसलिए अगले तीन माह के दौरान आतंकी हिंसा में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।

पुंछ, उड़ी, टंगडार व करनाह के सामने गुलाम कश्मीर में लगभग तीन दर्जन आतंकी बीते कुछ दिनों में अग्रिम इलाकों में लांचिंग पैड पर पहुंचे हैं। पाकिस्तानी सेना इनका इस्तेमाल एलओसी पर अग्रिम सैन्य चौकियों पर सनसनीखेज हमलों के लिए भी कर सकती है। पाकिस्तानी सेना के बैट दस्ते में अमूमन तीन से चार आतंकी भी शामिल रहते हैं।

सुरक्षाधिकारियों के मुताबिक, एलओसी पर शांति बनाए रखने के वादे के बाद भी पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर में आतंकी हिंसा फैलाने व आतकी संगठनों के संरक्षण की अपनी साजिश को नहीं छोड़ा है। वह लगातार आतंकी संगठनों को हर तरीके से मदद का प्रयास कर रहा है। वादी में करीब आठ बार सुरक्षाबलों ने करनाह, उड़ी, टंगडार के अलावा जम्मू संभाग के विभिन्न हिस्सों में पाकिस्तान से भेजे गए हथियार बरामद किए हैं। इनमें प्लास्टिक विस्फोटक, यूबीजीएल और एके-56 राइफल व पिस्तौल भी शामिल हैं।

भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम समझौते पर अमल की सहमति के बाद 25 फरवरी से अब तक जम्मू कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा और एलओसी पर स्थिति पूरी तरह शांत है। पाकिस्तानी सेना ने जंगबंदी का उल्लंघन पूरी तरह बंद ही कर दिया है। हालांकि, सांबा सेक्टर में पाकिस्तानी रेंजरों ने सीमा सुरक्षाबल के जवानों पर दो बार फायरिंग जरूर की है, लेकिन वह फायरिंग सीमावर्ती इलाके में किसी निर्माण कार्य को बाधित करने को लेकर थी।

लीपा घाटी में आतंकियों की पाकिस्तानी फौज: 

सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तानी सेना ने लांचिंग पैड पर एक बार फिर आतंकियों को जमा करना शुरू कर दिया है। उत्तरी कश्मीर में केरन, नौगाम और टंगडार सेक्टर के पार लीपा घाटी में करीब 24 आतंकियों को अलग-अलग गुटों में देखा गया है। इनमें जैश-ए-मोहम्मद के चार और लश्कर व अल-बदर के 10-10 आतंकी हैं। पुंछ व उड़ी के सामने गुलाम कश्मीर में हिजबुल व अल-बदर के करीब छह आतंकियों को एक जगह विशेष पर पाकिस्तानी सेना ने बीते एक सप्ताह से रखा है। इसक अलावा चार आतंकियों का एक गुट टंगडार व नौगाम सेक्टर में लगातार जगह बदल रहा है।

पाकिस्तानी सेना के साथ घूमते हैं आतंकी: 

लीपा घाटी में जमे सभी आतंकी पाकिस्तानी सेना के स्पेशल स्ट्राइक ग्रुप कमांडो दस्ते के साथ एलओसी के अग्रिम हिस्सों में घूमते हुए देखे गए हैं। विभिन्न स्रोतों से जुटाई सूचनाओं के आधार पर सुरक्षा एजेंसियों ने पता लगाया है कि इन आतंकियों को अलग अलग गुटों में अगले दो से तीन माह के दौरान कश्मीर में घुसपैठ कराने की साजिश है। पाकिस्तानी सेना इनका इस्तेमाल भारतीय सेना के अग्रिम सैन्य ठिकानों पर हमले के लिए भी करने की फिराक में है।

इस वर्ष 40 आतंकियों की भर्ती, 50 युवा लापता: 

कश्मीर में इस वर्ष पांच माह में करीब 40 युवा आतंकी बने हैं। इनमें से अधिकांश मार्च से मई तक ही आतंकी बने हैं। इनमें से कुछ मुठभेड़ों में मारे गए हैं। इनके अलावा तथाकथित तौर पर 50 युवा लापता भी हैं। इनमें से अधिकांश के आतंकी बनने की आशंका है। उन्होंने बताया कि इस साल लश्कर, टीआरएफ व अल-बदर में ही ज्यादातर आतंकियों की भर्ती हुई है।

खुद को पाक साफ दिखाने की चाल: 

सुरक्षा अधिकारियों बताया कि आइएसआइ ने पुराने आतंकी संगठनों को सुरक्षाबलों के दबाव से बचाने और खुद को जम्मू कश्मीर में आतंकी हिंसा से अलग दिखाने के लिए ही टीआरएफ, पीएएफएफ और लश्कर ए मुस्तफा व गजनवी फोर्स जैसे संगठनों को तैयार कराया है। यह संगठन सिर्फ दिखावे के लिए नए हैं, लेकिन यह पूरी तरह से लश्कर और जैश से जुड़े हुए हैं। 

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