किश्तवाड़, बलबीर सिंह जम्वाल। जिले में सक्रिय आतंकियों व उनके मददगारों (ओवर ग्राउंड वर्करों) की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। पिछले एक साल में किश्तवाड़ में इन्हीं ओजीडब्ल्यू की मदद से पांच सनसनीखेज वारदात को अंजाम दे चुके चार आतंकियों को जिंदा या मुर्दा पकडऩे की कार्रवाई तेज हो गई है। इसके लिए पहले शहर में छिपे बैठे आतंकियों के मददगारों को उनके बिल से दबोचने के लिए बड़ी मुहिम शुरू की गई है। सुरक्षाबलों ने छापे मारकर करीब दर्जनभर संदिग्ध लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।

सूत्रों की मानें तो संदिग्ध लोगों से पूछताछ के बाद सुरक्षाबलों को किश्तवाड़ से करीब 12 किलोमीटर दूर धूल इलाके में आतंकियों के छिपे होने के कुछ सुबूत भी मिले हैं, लेकिन इस बारे में कोई भी अधिकारी खुलकर बात नहीं कर रहा है। आतंकियों की धरपकड़ को लेकर राज्य पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह भी गत मंगलवार को किश्तवाड़ का दौरा कर चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, डीजीपी ने पुलिस विभाग को निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द चारों सक्रिय आतंकियों को दबोचा जाए। इस निर्देश के बाद ही बुधवार को शहर के अंदर सभी नाकों को अलर्ट करने के साथ तलाशी अभियान भी चलाया गया। शहर की ओर आने और बाहर जाने वाली हर गाड़ी की बारीकी से जांच की जा रही है। हालांकि इससे आम नागरिकों को थोड़ी बहुत परेशानी जरूर हो रही है, लेकिन लोगों का कहना है कि वह आतंकवाद से लड़ने के लिए इतनी परेशानी झेलने और सुरक्षाबलों की हर तरीके से मदद करने को भी तेयार हैं।

इन आतंकियों की तलाश : ओसामा बिन जावेद, हारून बानी, नावेद मुश्ताक शाह और जाहिद हुसैन उर्फ मिशन करुसा की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। इन्हीं चारों आतंकियों ने ओजीडब्ल्यू की मदद से किश्तवाड़ में परिहार बंधुओं और चंद्रकांत शर्मा व उनके अंगरक्षक की हत्या की थी। इसके अलावा ये आतंकी जिला उपायुक्त के अंगरक्षक की राइफल छीनने व पीडीपी के जिला प्रधान के घर पर परिवार को बंधक बनाकर अंगरक्षक की राइफल लेकर भागने के साथ दो एसपीओ को गोली मारकर घायल करने की घटना में भी शामिल हैं।

सुरक्षा एजेंसियों पर भी उठ रहे थे सवाल : जिले में सक्रिय मात्र चार आतंकियों के पकड़ में न आने से सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ सुरक्षाबलों में तालमेल की कमी पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसलिए अब आतंकियों तक पहुंचने के लिए पहले उनके मददगारों को दबोचने के लिए बड़ी मुहिम शुरू की गई है। आने वाले दिनों में कुछ और संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया जा सकता है।

ओजीडब्ल्यू की वजह से पकड़ में नहीं आ रहे आतंकी : सूत्रों के अनुसार, शहर में सक्रिय ओजीडब्ल्यू ही आतंकियों को सुरक्षाबलों की हर गतिविधियों की जानकारी देते हैं। इतना ही नहीं, ओजीडब्ल्यू ही वारदात से पहले रेकी से लेकर आतंकियों को सुरक्षित ठिकानों मुहैया करवाने और भागने में मदद करते हैं। इन्हीं ओजीडब्ल्यू की वजह से ही आतंकी पकड़ से दूर हैं। 

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