जम्मू, रोहित जंडियाल: कोरोना के लगातार कम हो रहे मरीजों के बीच अच्छी खबर है। लगभग आधे जिलों के अस्पतालों में एक भी मरीज भर्ती नहीं है। इन जिलों में जो मरीज हैं, वे भी घरों में अपना इलाज करवा रहे हैं। अब श्रीनगर ही एकमात्र ऐसा जिला है जहां सबसे अधिक 76 मरीज इलाज करवा रहे हैं। अन्य जिलों में अब न बराबर ही मरीज भर्ती हैं।

जम्मू-कश्मीर में इस समय सक्रिय मरीजों की संख्या 1602 रह गई है। अस्पतालों में अब 142 मरीज इलाज करवा रहे हैं। इनमें 50 फीसद श्रीनगर के अस्पतालों में भर्ती हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जम्मू संभाग के अस्पतालों में मात्र 43 और कश्मीर के अस्पतालों में 99 मरीज इलाज करवा रहे हैं। जम्मू संभाग के किश्तवाड़, ऊधमपुर, सांबा, रामबन जिलों के अस्पतालों में एक भी मरीज भर्ती नहीं है। कठुआ में एक निजी अस्पताल मेें एक मरीज इलाज करवा रहा। जबकि सरकारी अस्पतालों में एक भी मरीज भर्ती नहीं है।

कश्मीर संभाग में भी बांडीपोरा, कुलगाम, शोपियां, गांदरबल और पुलवामा जिलों में किसी भी अस्पताल में एक भी मरीज भर्ती नहीं है। सभी अस्पतालों में अब अन्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों का इलाज हो रहा है। 50 फीसद की क्षमता के अनुसार रूटीन में होने वाली सर्जरी भी चल रही है। फिर से अस्पतालों में पहले जैसी स्थिति हो गई है। इस समय श्रीनगर जिले में सबसे अधिक 76 मरीज इलाज करवा रहे हैं। इसके बाद जम्मू जिले में 20 मरीजों का इलाज हो रहा है। डोडा में आठ, राजौरी में पांच, पुंछ में सात, रियासी में दो मरीजों का इलाज हो रहा। बारामुला में नौ, अनतंनाग में पांच और कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (सीएचसी) कुपवाड़ा में आठ मरीजों का इलाज हो रहा है।

डीआरडीओ अस्पताल में 14 मरीज : एक हजार बिस्तरों की क्षमता वाले डीआरडीओ के जम्मू और श्रीनगर अस्पतालों में मात्र 14 मरीज ही भर्ती हैं। डीआरडीओ जम्मू में तीन और डीआरडीओ श्रीनगर में 11 मरीज अपना इलाज करवा रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि नए मरीज बहुत कम आ रहे हैं। अस्पतालों में वे मरीज हैं जो पहले से भर्ती हैं। जम्मू में अब नौ मरीज ही आइसीयू में हैं। अब कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए प्रबंध हो रहे हैं।

49 मरीजों की हुई मौत : इस महीने अभी तक कोरोना संक्रमित सिर्फ 49 मरीजों की ही जान गई है। यह तीन महीनों में सबसे कम है। मई में जम्मू-कश्मीर में जहां एक हजार से भी अधिक मरीजों की मौत हुई थी। जून में 416 मरीजों की मौत हुई थी। जुलाई में जून की अपेक्षा 20 फीसद मरीजों की ही मौत हुई है। विशेषज्ञ डाक्टरों का कहना है कि अभी भी लापरवाही नहीं बरती जा सकती। तीसरी लहर आने की संभावना बनी हुई है। इसे तभी रोका जा सकता है जब सभी एसओपी का पालन करें। 

Edited By: Rahul Sharma