जम्मू, राज्य ब्यूरो। जम्मू कश्मीर में स्कूली और उच्च शिक्षा दोनों का हाल बेहाल ही है। स्कूल, कालेज खोलने की होड़ लगी रही लेकिन बुनियादी सुविधाएं जुटाने और गुणवत्ता कायम करने की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। यह कहना गलत नहीं होगा कि किसी भी राजनीतिक पार्टी का चुनावी मुद्दा शिक्षा का प्रचार प्रसार या बुनियादी ढांचे को मजबूत करना नहीं रहा। संसद में अहम संस्थानों की बात तो की गई लेकिन बुनियादी शिक्षा के मुद्दे कम ही उठाए गए। केंद्र प्रायोजित योजनाओं को पूरी तरह से अमल में लाने के प्रयास सफल नहीं हुए। राज्य सरकारों ने समय समय पर सर्व शिक्षा अभियान को लागू तो किया लेकिन अपनी तरफ से पर्याप्त मात्र दस प्रतशित की धनराशि का अावंटन समय पर करने में नाकामी दिखाई दी। इसका परिणाम यह हुआ अध्यापकों को समय पर वेतन नहीं मिले।

अभी भी हायर सेकेंडरी स्कूलों में कांट्रेंक्ट पर लेक्चरार लगाए जाते है। शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिला। सरकारें टालमटोल की नीतियों पर काम करती रही। हाल ही में राज्यपाल प्रशासन ने अहम फैसला लेते हुए सर्व शिक्षा अभियान के तहत लगाए गए रहबर-ए-तालीम योजना अध्यापकों को स्थायी किया गया। योजना को आगे से बंद कर दिया गया। अब जम्मू कश्मीर में राज्यपाल प्रशासन में स्कूली शिक्षा का कायाकल्प करने की दिशा में काम तेजी के साथ शुरु हुआ। सभी स्कूलों में बिजली, पानी उपलब्ध करवाने और शोचालय बनाने की दिशा में काम तेजी के साथ शुरु हुआ है। हालत यह थी कि सरकारी स्कूलों में डेस्क व अन्य फर्नीचर उपलब्ध नहीं था जिसके लिए राज्यपाल प्रशासन से एक पहल करते हुए एक सौ करोड़ रूपये मंजूर किए जिसमें साठ करोड़ रूपये जारी हो चुके है। उच्च शिक्षा को घर घर तक पहुंचाने के लिए पचास नए कालेज खोले गए है लेकिन एक बात यह भी कि पहले खोले गए कालेजों में से तीस से अधिक के पास अपनी इमारतें और बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं है। कई कालेजों के पास नैक की मान्यता नहीं है।

जब केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के लिए हुआ था आंदोलन

जब जम्मू कश्मीर के लिए पूर्व यूपीए सरकार ने एक केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा की थी तो उस समय जम्मू में विवाद पैदा हो गया। जम्मू के लोगों ने एकजुट होकर आंदोलन शुरु किया और तब राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने तत्कालीन प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह से मुलाकात की। पूरे मामले से अवगत करवाया गया कि जम्मू कश्मीर को दो केंद्रीय विश्वविद्यालयों की जरूरत है। क्षेत्रीय आकांक्षाओं को मद्देनजर रखकर फैसला किया जाए। तब केंद्र सरकार ने एलान किया कि जम्मू कश्मीर में दो केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित होंगे, एक जम्मू में और दूसरा कश्मीर में। उसके बाद दो केंद्रीय विश्वविद्यालय अस्तित्व में आए। इसमें सांसदों से लेकर विधायकों और पूरी सरकार की भूमिका रही।

यूडीआईएसई (यूनीफाइड डिस्ट्रिक इंफारमेशन सिस्टम फार एजूकेशन) से प्राप्त साल 2017-18 के आंकड़ें

  • -स्कूलों में बिजली नहीं, कुल स्कूल - 16597
  • - प्राइमरी स्कूल - 10817
  • - मिडिल स्कूल - 5410
  • - हाई स्कूल - 350
  • - हायर सेकेंडरी स्कूल - 20

स्कूलों में पीने वाला पानी नहीं

  • - कुल स्कूल- 5433
  • - प्राइमरी - 3751
  • -मिडिल - 1484
  • हाई स्कूल - 161
  • हायर सेकेंडरी स्कूल - 37

स्कूल जिनमें लड़कों व लड़कियों का कोई शौचालय नहीं है

  • - कुल स्कूल 438
  • - प्राइमरी - 393
  • मिडिल - 40
  • हाई स्कूल - 5

स्कूल जिनमें लड़कियों का कोई शौचालय नहीं है

  • कुल स्कूल - 1110
  • प्राइमरी -872
  • मिडिल -165
  • हाई- 38
  • हायर सेकेंडरी -35

स्कूल जिनमें लड़कों के लिए शौचालय नहीं है

  • कुल स्कूल -1933
  • प्राइमरी -1353
  • मिडिल-432
  • हाई - 93
  • हायर सेकेंडरी स्कूल -55
  1. मैने हमेशा ही संसद हो या संसद के बाहर या केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ जम्मू कश्मीर में शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने का मुद्दा उठाया। कोशिश की गई कि शिक्षा की केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं का पूरा लाभ जम्मू कश्मीर को मिले। केंद्र की दो महत्वकांक्षी योजनाओं सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान का लाभ राज्य काे मिला है। - सांसद जुगल किशोर शर्मा, जम्मू पुंछ संसदीय सीट
  2. मोदी सरकार के समय में जम्मू कश्मीर में शिक्षा का कायाकल्प किया गया। जम्मू कश्मीर को दो इंजीनियरिंग कालेज मिलें। राष्ट्रीय उच्चत्तर शिक्षा अभियान के तहत दो इंजीनियरिंग कालेज खोले गए। एक कालेज कठुआ में और दूसरा गांदरबल में खोला गया। इतना ही नहीं आइआइएम, आइआइटी खोला गया गया। यह ऐतिहासिक फैसले थे। केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू में स्पेस सेंटर खोला गया। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कई नए कोर्स शुरु किए गए। समग्र शिक्षा अभियान को लांच किया जा चुका है। संसद हो या संसद के बाहर, हमेशा ही शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए काम किया गया। डोडा मेें दो केंद्रीय विद्यालय खोलने का अहम फैसला हुआ।  - डा. जितेंद्र सिंह, ऊधमपुर-डोडा संसदीय क्षेत्र से सांसद और पीएमओ में राज्यमंत्री
  3. जम्मू कश्मीर में शिक्षा का बुनियादी ढांचा मजबूत करने में केंद्र और पूर्व पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार ने खास ध्यान नहीं दिया। कालेज खोलते गए लेकिन ढांचा नहीं खड़ा किया गया। कई स्कूलों की इमारतों की हालत खस्ता है। प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। पानी, बिजली जैसी सुविधाओं से स्कूल जूझ रहे है। सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही है।  - जीए मीर, प्रदेश कांग्रेस के प्रधान

Posted By: Rahul Sharma