जम्मू, जेएनएफ। प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कश्मीरी विस्थापितों के लिए घोषित पदों और मुआवजे पर केवल उन्हीं का हक है। कश्मीरी विस्थापित घाटी के ही रहने वाले हैं, उन्हें किन्हीं कारणों से पलायन करना पड़ा था। उच्च न्यायालय के जस्टिस अली मोहम्मद मागरे ने राज्य यातायात विभाग में विस्थापितों के पद जारी करने वाली तीन नोटिफिकेशनों को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान यह फैसला दिया।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि नोटिफिकेशन के तहत पदों के लिए कश्मीरी युवा भी योग्य है। उन्हें प्रधानमंत्री पैकेज के तहत घोषित नौकरियों में आवेदन करने की इजाजत दी जाए। उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को कोर्ट में कोई ऐसा आदेश पेश करने के लिए कहा, जिसमें वे पीएम पैकेज के तहत जारी नौकरियों के योग्य हैं।

न्यायधीश ने कहा कि मेरा विचार है कि याचिकाकर्ताओं का इस मामले में याचिका दायर करने का कोई ओर कारण है। यह बिलकुल आम बात है कि जिन पदों को प्रधानमंत्री विशेष पैकेज के तहत कश्मीरी विस्थापित के पुनर्वास के लिए सर्जित किया गया है। 2009 नियम के तहत कोई भी अन्य व्यक्ति इन पदों को भरने के लिए योग्य नहीं है। यह पद प्रधानमंत्री विशेष पैकेज के तहत कश्मीरी विस्थापितों की वापसी और पुनर्वास के लिए ही सर्जित किए गए थे।

हालांकि याचिकाकर्ताओं ने भारतीय संविधान की धारा 16 का हवाला दिया, जिसमें एक समान अधिकार देने की बात कही गई है। उच्च न्यायालय ने इस दलील को भी खारिज कर निर्देश दिए कि पीम पैकेज के तहत जारी नौकरियों व पैकेज पर विस्थापितों का ही हक है।

Posted By: Rahul Sharma

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