जम्मू, नवीन नवाज। श्रीनगर के एसएमएचएस अस्पताल में बने नशा उन्मूलन केंद्र में पुरुषों के वार्ड में एक पखवाड़े से एक भी बिस्तर खाली नहीं है। 15 बिस्तरों वाले इस वार्ड में बीते एक दशक के दौरान पहली बार एक ही परिवार के तीन सदस्य (तीन सगे भाई) नशे की लत से छुटकारा पाने के लिए आए हैं। तीनों के बिस्तर एक दूसरे के साथ ही सटे हैं, जहां उनके परिवार के चार सदस्य उनकी तीमारदारी में जुटे हैं। राजौरी से आया यह परिवार नशे की त्रासदी की भयावह तस्वीर पेश करता है।

एलओसी के साथ सटा राजौरी जिला बेशक जम्मू संभाग में है, लेकिन यह कश्मीर घाटी के बारामुला, कुपवाड़ा और बांडीपोरा की तरह नशीले पदार्थो के तस्करों का मजबूत गढ़ भी है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आने वाली हेरोइन और चरस का अधिकांश हिस्सा इन्हीं जिलों में बैठे कूरियर और तस्कर लाते हैं। हालांकि, पहले इन जिलों में हेरोइन की खपत कम थी, लेकिन आमद बढ़ने के साथ इसकी खपत भी पूरे राज्य में बढ़ने लगी है।

तीनों भाई हेरोइन के आदी

इरशाद, नौशाद और फहद (तीनों नाम बदले गए हैं) हेरोइन यानी चिट्टा के आदी हो चुके हैं। उनकी हालत ऐसी हो गई है कि उनमें से कोई भी अपने बिस्तर से बिना सहारे उठ नहीं सकता। अपनी मां के सहारे शौचालय से लौटने के बाद बिस्तर पर लेटने का प्रयास कर रहे नौशाद ने कहा कि नशे ने हमें माली तौर पर बर्बाद करने के साथ ही हमारा सामाजिक रुतबा और सेहत भी छीन ली है। मेरी सब्जी की दुकान थी, अच्छी खासी चलती थी। रोजाना मैं एक-डेढ़ हजार रुपये आराम से कमा रहा था। करीब एक साल से हेरोइन का नशा कर रहे नौशाद ने कहा कि मैं पहले चरस कभी कभार पी लेता था। अपने बड़े भाई इरशाद की तरफ संकेत करते हुए उसने कहा कि वह पहले से ही चिट्टा का नशा कर रहा था। चिट्टा हमारे इलाके में खूब बिक रहा था। एक दिन मेरे दोस्त ने कहा, चलो इसका मजा लेते हैं। उस दिन के बाद से मैं चरस, हेरोइन समेत जो भी नशा मिलता उसे करता। रोजाना शाम को हम सभी दोस्त कस्बे में एक खास जगह पर जमा होते थे। वहीं पर हम पाउडर, कुछ दवाएं और पानी लेकर अपना डोज तैयार करते और फिर इंजेक्शन ले उसे अपनी बाजू की नाडिय़ों में लगाते। इसके बाद वहीं पड़े रहते और जब होश आता तो घर चल पड़ते।

नशा पूरा करने के लिए बेचनी पड़ी गाड़ियां

साथ सटे बिस्तर पर लेटे उसके बड़े भाई इरशाद ने कहा कि मैं दो साल से हेरोइन का नशा कर रहा था। मेरी दोनों गाड़ियां बिक गईं। कारोबार खत्म हो गया। घर में रोजाना झगड़ा होता था। मैंने कई बार इसे छोडऩे की कोशिश की, लेकिन नहीं छोड़ पाया। जब हेरोइन नहीं मिलती है तो शरीर अकड़ जाता है, दौरा से पडऩे लगता। आज यहां देखो हम तीनों भाई यहां पर हैं। मुझे लगता है कि अगर मैं नशा नहीं करता तो मेरे दोनों छोटे भाई भी इस लत से दूर रहते। मेरी बीबी यहां है, मेरी मां भी यहां है। दोनों बहनें भी हमारे साथ ही हैं। सबसे छोटे भाई ने फहद ने नशे के लिए कारण पढ़ाई छोड़ दी। फहद ने कहा कि उसे यह लत करीब छह माह पहले लगी और उसके बाद कब उसकी मोटर साइकिल बिकी और कब उसने मां के गहने चुराए, उसे पता ही नहीं चला।

मां ने भी बहुत समझाया पर नहीं माने

अपने बेटों की हालत से पूरी तरह टूट चुकी उनकी मां ताजा बेगम ने कहा कि पहले तो मैंने अपने बेटों को बहुत समझाया, घर में झगड़े भी खूब हुए। तीनों बेटे नशा करते हैं, इससे गांव में बदनामी भी होने लगी। बहुत से रिश्तेदारों ने हमसे कन्नी काट ली, क्योंकि बेटों ने नशे के लिए कई रिश्तेदारों से भी उधार लिया। नौशाद ने कहा कि बीते दिनों मेरे एक दोस्त की मौत हो गई। हम दोपहर को एक साथ खाना खा रहे थे। शाम को पता चला कि वह मर गया। उसकी मौत से मैं बहुत डर गया था। उसी दिन मैंने तय किया किसी तरह इससे बाहर आना है। हमारे पड़ोस में रहने वाले एक लड़के ने यहां श्रीनगर में इलाज कराया था। मेरी मां उसके पास गई और उसके बाद हम यहां आ गए।

नशे की होम डिलवरी भी उपलब्ध

नशे के कारोबारियों का नेटवर्क कितना मजबूत है, इसका अदांजा इसी बात से हो जाता है कि अगर कोई नशेड़ी चाहे तो वह एक फोन काल पर अपने लिए नशे की खुराक मंगवा सकता है। नशे की खुराक उसे उसके घर तक पहुंचा दी जाती है। इस तथ्य की पुष्टि न सिर्फ नशा उन्मूलन केंद्र में भर्ती नशेड़ी करते हैं, बल्कि नशे के कारोबारियों के खिलाफ अभियान में जुटे पुलिस अधिकारी भी यह बात कबूल करते हैं। एसपी वेस्ट श्रीनगर मुशीम अहमद के मुताबिक, कई बार हमने नशा तस्करों को हेरोइन या चरस की दो से तीन ग्राम की मात्र के साथ पकड़ा। पूछताछ में पता चला कि वह इसे किसी नशेड़ी के घर ड्रॉप करने जा रहे थे।

रियासत में हर साल बढ़ रहे हेरोइन का नशा करने वाले

हेरोइन के नशेड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। एसएमएचएस अस्पताल में बने नशा उन्मूलन केंद्र में इस साल पहली जनवरी 20 जून तक भर्ती हुए 342 नशेडिय़ों में से 309 हेरोइन का सेवन करने वाले हैं। जनवरी में भर्ती हुए हेरोइन के 70 नशेडिय़ों में से 20 इंजेक्शन के जरिए इसका सेवन कर रहे थे। वर्ष 2016 में इस केंद्र में भर्ती होने वाले कुल नशेडिय़ों में 15 प्रतिशत ही हेरोइन का सेवन करने वाले थे, जबकि वर्ष 2017 में उपचार के लिए आए नशेड़ियों में 24.3 प्रतिशत हेरोइन ले रहे थे। बीते साल भर्ती हुए नशेड़ियों में से 46 प्रतिशत हेरोइन के आदी थे।

  • हमारी कोशिश होती है कि नशा उनमूलन केंद्र में भर्ती प्रत्येक रोगी के साथ उसके परिजन रहें, क्योंकि नशा मुक्ति केंद्र से ठीक होने के बाद जब रोगी बाहर निकलता है तो उसके दोबारा नशे के जाल में फंसने की आशंका होती है। ऐसे में उसके परिजन उसे इस जाल से बचाने के लिए एक मजबूत कड़ी साबित होते हैं। - डॉ. यासिर राथर, न्यूरो साइक्राटिस्ट एवं नशा उन्मूलन विशेषज्ञ
  • हेरोइन के नशे की लत को टर्मिनल डिजीज कहा जाता है। नशा उन्मूलन केंद्र से ठीक होकर निकलने वाले हेरोइन के नशेडिय़ों में से करीब 50 से 60 प्रतिशत दोबारा इसका सेवन करते पाए गए हैं। यह नशा अत्यंत खतरनाक है। - प्रोफेसर डॉ. अरशद हुसैन, मनोचिकित्सा विभाग

 

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Posted By: Rahul Sharma

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