जम्मू, राज्य ब्यूरो। लद्दाख में वर्ष 1962 में चीन के बढ़ते कदमों को रोकने में अहम भूमिका निभाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल बिक्रम सिंह को सोमवार को उनकी 59वें शहीदी दिवस पर जम्मू में श्रद्धांजलि दी गई।

ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह यादगार समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उस बहादुरी जनरल को श्रद्घांजलि दी गई जिनकी कमान में रेजांगला में मेजर शैतान सिंह व उनके साथियों ने जान देकर चीन को आगे बढ़ने से रोक दिया था। जब चीन ने 1962 में लद्दाख में हमला किया था , उस समय लद्दाख की सुरक्षा की कमान संभालने वाली सेना की पंद्रह कोर के कोर कमांडर जनरल बिक्रम सिंह ही थे। रेजांगला में भारतीय सैनिकों की असाधारण वीरता से लद्दाख में चीन को मुंहतोड़ जवाब देने के चार दिन बाद हुए हेलीकाप्टर हादसे में जनरल ने शहादत पाई थी।

सोमवार को शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि देने के कार्यक्रम में शहीद जनरल बिक्रम सिंह की प्रतिमा को उंचा करने की मांग की गई। जोर दिया गया कि तवी के किनारे पर बनी उनकी प्रतिमा फ्लाइओवर बनने के बाद दूर से दिखाई नही देती है। इस मौके पर लद्दाख, जम्मू कश्मीर में सरहद की रक्षा करने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डालने के साथ उनके स्मारक को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। जनरल बिक्रम सिंह ने 22 नवंबर 1962 को जम्मू संभाग के पुंछ में भारतीय पाकिस्तान सीमा का हवाई निरीक्षण करते हुए वीरगति पाई थी। वह सेना के एक कुशल कमांडर थे।

सोमवार को उनके शहीदी दिवस पर मौजूदा यादगार समिति के पदाधिकारियों मेें ललिता शर्मा, स चरणजीत सिंह, हरिन्द्र, विक्की महाजन, स वलविन्द्र सिंह व स कीर्तन सिंह शामिल थे। उनके साथ समाज के विभिन्न वर्गाें के कई प्रमुख लोग भी श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे। जम्मू के बिक्रम चौक के साथ पुंछ में भी लगाई गई जनरल की प्रतिमा उनकी बहादुरी की याद दिलाती है। लेफ्टिनेंट जनरल बिक्रम सिंह पंजाब के होशियारपुर जिले के बलाचौर के निवासी थे। 

Edited By: Vikas Abrol