जम्मू, राज्य ब्यूरो। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि भ्रष्ट नेताओं, ताकतवर लोगों ने जम्मू-कश्मीर के नौजवानों के सपनों को बर्बाद कर दिया। राज्यपाल ने एक तरफ मुख्यधारा वाली पार्टियों के नेताओं, हुर्रियत को लताड़ा तो दूसरी तरफ उन्होंने जम्मू कश्मीर बैंक में भ्रष्टाचार की परतों को खोला। वह श्रीमाता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय कटड़ा के सातवें दीक्षांत समारोह में संबोधित कर रहे थे।

राज्यपाल ने कहा कि अगर नेताओं, नौकरशाहों ने दिल्ली से आए पैसे का सही इस्तेमाल किया होता तो लोगों के घरों की छत भी सोने की होती। हालत यह है कि जब मैं बाबा अमरनाथ यात्रा गया तो देखा कि पिठ्ठू वालों के पास स्वेटर भी नहीं था। यहां के नेताओं का एक घर कश्मीर में, एक दिल्ली में, एक दुबई में और एक लंदन में है। स्वयं लाखों-करोड़ों कमाते हैं पर बच्चों को ईमानदारी से नौकरी भी नहीं दे सकते।

उन्होंने कहा कि राजभवन में युवा आए और मुझे बताया कि हमने जम्मू कश्मीर बैंक लिखित परीक्षा पास की, इंटरव्यू पास किया, मेरिट में आए लेकिन नियुक्तियां दूसरे लोगों को दे दी गई। मुख्यमंत्री, एमएलए के नजदीकी लोगों को लगा दिया गया। उन्होंने कहा कि मैंने चेयरमैन से पूछा तो उन्होंने साफ कहा कि दवाब में यह काम किया था। मुझे बताया गया कि यह 25 नहीं है बल्कि 582 लोगों को हक से वंचित कर दिया गया।

राज्यपाल ने कहा कि जब मैं सही फैसला करके निकला तो बाहर दो सौ बच्चे खड़े थे। एक बच्ची के हाथ में फूलों का गुलदस्ता था। उसने कहा कि आपको अल्लाह ने हमारे लिए भेजा था। उन्होंने कहा कि यहां के नेताओं, बड़े ताकतवर लोगों ने नौजवानों के सपनों को तोड़ा है। यहां के नेता, मौलवी, हुर्रियत के नेता मुख्यधारा नेता दूसरों के बच्चों को आतंक की राह पर धकेलते हैं पर इनमें से किसी का बच्चा आतंकवादी नहीं बना।

जम्मू कश्मीर में किशोरों व युवाओं के सपनों को तोड़ा गया, उन्हें नाराज किया गया। फिर उन्हीं युवाओं को गुमराह करते हैं कि उन्हें जन्नत मिलेगी। राज्यपाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि मैं आपको दो जन्नत देने को तैयार हूं। पहली जन्नत तो आपको कश्मीर में ही मिली है। इसे संभालो, यह सिरमौर है। जब आप एक अच्छे मुसलमान की तरह रहोगे तो दूसरी जन्नत मिलेगी।

उद्योगपतियों पर एक बार फिर से बरसे राज्यपाल

राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि अमेरिका, इंग्लैंड में 150 नोबल पुरस्कार विजेता हैं। हमारे देश में बारह, जिसमें छह विदेशी हैं। देश में जैसे विश्वविद्यालय और संस्थान होने चाहिए, नहीं है। विश्वविद्यालयों में ढांचागत सुविधाएं नहीं है। देश में ऐसे सेठ है जो सगाई पर तीन सौ करोड़ रुपये खर्च कर देते हैं लेकिन दान की आदत नहीं है। मैं तो इन्हें सड़ा हुआ आलू कहता हूं। इनमें इंसानियत नहीं है। देश के प्रति जिम्मेदारी और भावना नहीं है।

कश्मीर के 22 हजार बच्चे बाहर पढ़ाई कर रहे है। इसका कारण यह है कि जम्मू कश्मीर में जैसे यूनिवर्सिटी, कालेज होने चाहिए थे, नहीं है। हमने 52 डिग्री कालेज खोले हैं और पचास नए कालेज खोल रहे हैं। इनमें प्रोफेशनल कालेज भी शामिल हैं। हमने 242 स्कूलों को दर्जा बढ़ाया। इसी साल आठ मेडिकल कालेज बने हैं। वायदा करता हूं कि अगले साल एक मेडिकल यूनिवर्सिटी बनेगी। क्योंकि यहां के बच्चे दुनिया में किसी से प्रतिभा के मामले में कम नहीं है। 

Posted By: Preeti jha

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