जम्मूू, राज्य ब्यूरो : वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान के युद्ध के स्वर्णिम विजय वर्ष के उपलक्ष्य में शहीदों का सम्मान करने के लिए सेना की स्वर्णिम विजय मशाल रविवार को कारगिल के द्रास वॉर मेमोरियल में पहुंच गई। विजय मशाल लेकर पहुंचे सैनिकों ने द्रास में उन शहीदों को सलामी दी, जिन्होंने 22 साल पहले कारगिल युद्ध में शहादत पाई थी।

यह सोमवार को द्रास में आयोजित होने वाले कारगिल विजय दिवस समारोह में हिस्सा लेगी। विजय मशाल साथ सेना की 12 इंजीनियर्स रेजीमेंट की टीम भी द्रास पहुंची है। इस रेजीमेंट ने वर्ष 1971 के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लद्दाख में पाकिस्तान से तुरतुक में चालुंखा इलाके को वापस लेने में इस रेजीमेंट की अहम भूमिका थी। स्वर्णिम विजय मशाल अगले कुछ दिन लद्दाख में रहेगी। इस दौरान लेह व कारगिल जिले में 1971 के शहीदों और युद्ध में हिस्सा ले चुके सैनिकों, पूर्व सैनिकों के साथ वीर नारियों व उनके स्वजन को सम्मानित किया जाएगा।

लद्दाख में प्रवेश करने से पहले विजय मशाल को जम्मू कश्मीर के कई हिस्सों में ले लाया गया था। सेना की 15 कोर मुख्यालय बादामी बाग श्रीनगर में हुए कार्यक्रमों में शहीदों को सलामी दी गई। साथ ही पूर्व सैनिकों सम्मानित किया गया। श्रीनगर में रहने के दौरान विजय मशाल के साथ तिरंगे फहराये गए थे। इन कार्यक्रमों में स्थानीय निवासियों ने भी भारी उत्साह दिखाया था।

चार अप्रैल को जम्मू कश्मीर में किया था प्रवेश : स्वर्णिम विजय मशाल ने कठुआ जिले के लखनपुर के रास्ते गत चार अप्रैल को जम्मू कश्मीर में प्रवेश किया था। इसे 16 दिसंबर, 2020 में दिल्ली से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रवाना किया था। वर्ष 2021 को 1971 युद्ध के स्वर्णिम विजय वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसके तहत विभिन्न कार्यक्रमों का सिलसिला 16 दिसंबर, 2021 तक चलेगा।

जम्मू कश्मीर में चार माह रही स्वर्णिम मशाल : विजय मशाल जम्मू कश्मीर में चार अप्रैल से 23 जुलाई तक रही। इस दौरान विजय मशाल के सम्मान में प्रदेश के लगभग सभी जिलों में कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। अब यह लद्दाख पहुंच गई है। अभी यह कारगिल जिले के द्रास में हैं। कारगिल विजय दिवस के बाद यह कारगिल और लेह दोनों जिलों में विभिन्न कार्याक्रमों में जाएगा।