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हर साल 1500 MBBS, 600 PG डॉक्टर पास... फिर भी GMC जम्मू में विशेषज्ञों का टोटा; किडनी और फोरेंसिक विभाग खाली

Published: Wed, 04 Nov 2026 07:00 AM (IST)

जम्मू-कश्मीर के मेडिकल कॉलेजों से हर साल हजारों डॉक्टर पास होने के बावजूद, जीएमसी जम्मू में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी ...और पढ़ें

GMC जम्मू में विशेषज्ञों का टोटा, निजी अस्पतालों की ओर जा रहे डॉक्टर। (फाइल फोटो)

GMC जम्मू में विशेषज्ञों का टोटा, निजी अस्पतालों की ओर जा रहे डॉक्टर। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. जीएमसी जम्मू में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी।

  2. फॉरेंसिक मेडिसिन और नेफ्रोलॉजी विभाग खाली पड़े।

  3. डॉक्टर निजी अस्पतालों को देते हैं प्राथमिकता, नीति का अभाव।

रोहित जंडियाल, जम्मू। हर वर्ष डेढ़ हजार से अधिक एमबीबीएस और छह सौ से अधिक पीजी डॉक्टर जम्मू-कश्मीर के विभिन्न मेडिकल कालेजों से पास होने के बावजूद यहां डॉक्टरों की भारी कमी है। आलम यह है कि जीएमसी जम्मू में न तो कोई स्थायी किडनी रोग विशेषज्ञ है और न ही फोरेंसिक मेडिसिन विभाग में कोई डॉक्टर है।

जीएमसी जम्मू में कुछ दिन पहले डॉ. संगीता की सेवानिवृत्ति के बाद फोरेंसिक मेडिसिन विभाग में कोई भी फैकल्टी सदस्य नहीं है। इस कारण इस विभाग के विभागाध्यक्ष का प्रभार पैथालाेजी विभाग की HOD डा. ज्योत्सना सूरी को दिया गया है।

इस विभाग में फोरेंसिक मेडिसिन के अंतिम डॉक्टर भूपेश खजूरिया थे। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद डॉ. संगीता को विभागाध्यक्ष बनाया गया था लेकिन वह भी मूलत पैथालोजी दकी डाक्टर थी।

इतना अहम विभाग होने के बावजूद सरकार ने कभी भी इसे प्राथमिकता नहीं दी। इस कारण विभाग अब खाली हो गया है। कुछ डॉक्टर विभाग में डिमॉन्स्ट्रेटर के रूप में जरूर कार्य कर रहे हैं लेकिन फैकल्टी में कोई नहीं है।

पांच साल से खाली पड़ा नेफ्रोलॉजी विभाग

उधर, नेफ्रोलॉजी विभाग में पिछले पांच वर्षों से कोई फैकल्टी सदस्य नहीं है। डॉ. एसके बाली की सेवानिवृत्ति के बाद से यह पद खाली है। डॉ. राजू भंडारी सहित दो डॉक्टर जरूर यहां काम कर रहे हैं, लेकिन वे स्वास्थ्य विभाग से संबद्ध हैं।

विभाग में कोई स्थायी फैकल्टी सदस्य नहीं है। अन्य विभागों की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में मात्र एक स्थायी फैकल्टी सदस्य है, जबकि न्यूरोलॉजी विभाग में भी सिर्फ एक फैकल्टी सदस्य है।

जीएमसी के बड़े विभागों में भी फैकल्टी की कमी बरकरार

जीएमसी जम्मू में बहुत कम विभाग ऐसे हैं, जहां पर्याप्त संख्या में फैकल्टी सदस्य हैं। मेडिसिन, सर्जरी, एनेस्थीसिया, बाल रोग और स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में फैकल्टी सदस्य जरूर हैं, लेकिन यहां भी कमी बनी हुई है। सरकार ने इन पदों को भरने के लिए कभी गंभीरता से प्रयास नहीं किया।

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी फैकल्टी की कमी की बात तो स्वीकार करते हैं, लेकिन इसे दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।

बाहर दे रहे अपनी सेवाएं

बीते पांच से छह वर्ष के दौरान जीएमसी जम्मू से एमबीबीएस कर गए कई डॉक्टर नेफ्रोलॉजी में पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें डा. दीपक पठानिया, डा. वरूण गुप्ता, डा. शामिल हैं। मगर यह सभी निजी अस्पतालों में काम कर रहे हैं।

हालांकि फोरेंसिंक मेडिसिन में कम ही डॉक्टर प्रशिक्षित हैं लेकिन सरकार ने कभी उन्हें तैयार करने का प्रयास भी नहीं किया। राजौरी, डोडा और कठुआ मेडिकल कालेजों में भी फोरेंसिक मेडिसिन में एक-एक ही डॉक्टर नियुक्त है।

जीएमसी जम्मू में नेफरालोजी विभाग के पूर्व एचओडी डॉ. एसके बाली का कहना है कि विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार तो हो रहे हैं लेकिन सरकार की कोई स्पष्ट नीति न होने के कारण उनका रूझान निजी अस्पतालों की ओर है। इन अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं व अच्छे पैकेज मिलते हैं। इस कारण वे वहां प्राथमिकता देते हैं।

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