जम्मू, राज्य ब्यूरो। गणतंत्र दिवस के मौके पर जम्मू कश्मीर में कैदियों की रिहाई की परंपरा रही है, इसलिए हिरासत में रखे तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों सहित सभी राजनीतिक बंदियों को 26 जनवरी को रिहा किए। इसके साथ ही जो बंदिशें रही हैं उन्हें हटाया जाए। यह केंद्र की संवेदना का एक बड़ा कदम होगा। यह बात नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) अध्यक्ष गुलाम हसन मीर और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के पूर्व महासचिव दिलावर मीर ने श्रीनगर में वीरवार को संयुक्त पत्रकारवार्ता में कही। वहीं केंद्रीय मंत्रियों के दौरे पर उन्होंने कहा कि यह बहुत अच्छा है। आना चाहिए, तभी तो वह जम्मू कश्मीर के जमीनी हालात को समझ सकेंगे। हां, देखना यह है कि वह इन दौरों से क्या सबक लेते हैं। यहां के मसलों को कैसे हल करते हैं। दौरों का परिणाम चार-छह महीने बाद ही दिखेगा।

जम्मू कश्मीर में तीसरे मोर्चे के गठन की जारी सुगबुगाहट के बीच वीरवार को संयुक्त पत्रकारवार्ता में दोनों ही नेता विवादास्पद सवालों से बचते नजर आए। लेकिन उन्होंने साफ संकेत दिया कि पांच अगस्त 2019 के बदलाव को लोग स्वीकार रहे हैं। उन्होंने कहा कि पांच अगस्त तक किसी को इसका आभास नहीं था, लोगों में नाराजगी भी थी, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं।

शायद ही वापस आए 370, राष्ट्रीय दलों में नहीं बनेगी सहमति

अनुच्छेद 370 को लेकर पूछे गए सवाल पर हसन और दिलावर ने कहा कि यह शायद ही अब वापस आए, क्योंकि राष्ट्रीय दलों में इसकी बहाली के लिए सहमति नहीं बनेगी। सिर्फ सर्वोच्च न्यायालय ही इस पर फैसला लेगा, अगर वह कहे तो ही बहाल होगा। सर्वोच्च न्यायालय का फैसला सर्वमान्य होगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक विचारधारा को अपने प्रसार की कुछ बंदिशों के साथ अनुमति रहती है। ¨हसा नहीं होनी चाहिए। लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि विरोधी विचारधारा को भी पूरा मौका मिलता है। कश्मीर पंडितों के पलायन पर गुलाम हसन मीर ने कहा कि यह बहुत दुखद है।

तीसरे मोर्चे पर बोले-समय आने पर चलेगा पता

तीसरे मोर्चे के गठन की संभावना पर गुलाम हसन व दिलावर मीर ने कहा कि समय आने दीजिए, पता चल जाएगा। विधानसभा चुनावों में भाग लेने पर उन्होंने कहा कि इसमें अभी बहुत देरी है। इस बारे में अभी कुछ कहना अपरिपक्वता होगी।

मैं आज भी पीडीपी में हूं: मीर

पीडीपी के पूर्व महासचिव और पूर्व मंत्री दिलावर मीर ने कहा कि हमें कोई पार्टी से नहीं निकाल सकता। हमें निकालने का अधिकार सिर्फ पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती व उपाध्यक्ष अब्दुल रहमान वीरी के पास है। दोनों ही अभी हिरासत में हैं। ऐसे में हमारे निष्कासन पर किसने हस्ताक्षर किए।

अब्दुल्ला और मुफ्ती परिवार, कश्मीर में हमेशा अस्वीकार

कश्मीर के लोगों ने कभी भी अब्दुल्ला और मुफ्ती परिवारों को स्वीकार नहीं किया। कश्मीर में कई विपक्षी दलों के नेता विकास की राह देने पहुंचे केंद्र सरकार के मंत्रियों के दौरों को महज राजनीति बता रहे हैं। यह वही नेता हैं, जिन्होंने जम्मू कश्मीर के आम लोगों को कभी महत्व नहीं दिया। यह बात प्रदेश भाजपा की कश्मीर इकाई के मीडिया प्रभारी मंजूर भट्ट ने कही। उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोग केंद्रीय मंत्रियों के दौरों का स्वागत कर रहे हैं। मंत्री नेताओं, गणमान्य लोगों से मिलने के बजाए आम लोगों के बीच जाकर उनके मसले हल करने की कोशिश कर रहे हैं।

 

Posted By: Rahul Sharma

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