जम्मू, जागरण संवाददाता। जम्मू के उद्योगपतियों ने लैंड रेवन्यू एक्ट 1962 में संशोधन की मांग करते हुए कहा है कि जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास के लिए इस कानून में संशोधन की जरूरत है और संशोधन किए बिना उद्योग को गति नहीं मिल सकती।

उद्योगपतियों का कहना है कि केंद्रीय उद्योग नीति के बाद जम्मू-कश्मीर में कई बड़े उद्योग लगने की संभावनाएं पैदा हुई है लेकिन सिडको-सीकॉप के पास आज के समय इन औद्योगिक इकाईयों के लिए जमीन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में जरूरी है कि गैर-कृषि निजी जमीन उद्योग लगाने के लिए दी जाए लेकिन मौजूदा लैंड रेवन्यू एक्ट 1962 के तहत गैर-कृषि निजी जमीन बाहरी राज्यों के लोगाें को नहीं दी जा सकती। उद्योगपतियों के अनुसार अनुच्छेद 370 व 35 ए समाप्त होने के बावजूद बाहरी राज्यों के निवेशक जम्मू-कश्मीर में गैर-कृषि जमीन खरीद नहीं सकते और कानून का यह प्रावधान प्रदेश के औद्योगिक विकास की सबसे बड़ी बाधा है।फेडरेशन आफ इंडस्ट्रीज ने उक्त बात गत दिवस केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से उनके जम्मू दौरे के दौरान रखी।

फेडरेशन के चेयरमैन रतन डोगरा व सह-चेयरमैन ललित महाजन की अगुआई में तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह व प्रदेश के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की मौजूदगी में अमित शाह से मिले इस प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि आज सरकार के पास उद्योगपतियों को देने के लिए पर्याप्त जमीन नहीं। सरकार ने निजी औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की अनुमति दी है लेकिन यह तब तक संभव नहीं होगा, जब तक बाहरी राज्यों के लोगों को उद्योग लगाने के लिए जम्मू-कश्मीर में गैर-कृषि जमीन खरीदने का अधिकार नहीं मिलेगा। फेडरेशन ने इस मौके पर अमित शाह को एक ज्ञापन भी सौंपा जिसमें सभी केंद्रीय व प्रदेश सरकारी विभागों के लिए स्थानीय औद्योगिक इकाईयों से खरीद को अनिवार्य करने, प्रदेश में किसी बड़े उद्योग की स्थापना करने, सड़क मार्ग से होने वाली ढुलाई के खर्च का भुगतान करने, एक्सपोर्ट प्रमोशन इंडस्ट्रियल पार्क बनाने, जीएसटी भुगतान का लाभ मौजूदा लघु उद्योग व विस्तारीकरण करने वाले उद्योगों को दिए जाने, मौजूदा उद्योगपतियों को सिडको-सीकॉप की जमीन का मालिकाना अधिकार दिए जाने, सबका विश्वास योजना को स्पष्ट करने तथा अखरोट गुठली पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाने की मांग की।

Edited By: Vikas Abrol