जागरण संवाददाता, जम्मू : नियमों का ताक पर रखकर जम्मू कश्मीर कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी में नौकरी हासिल करने के आरोप में दबोचे गए उप सचिव शकील उल रहमान की नियुक्ति मामले में नया मोड़ आ गया है। क्राइम ब्रांच ने इस मामले में पीडीपी के पूर्व एमएलसी जफर इकबाल मन्हास को पूछताछ के लिए बुलाया है। उप सचिव की जब पीआरओ पद पर नियुक्ति हुई थी तक जफर इकबाल मन्हास अकादमी में सचिव पद पर तैनात थे। इस भर्ती प्रक्रिया में उनकी अहम भूमिका है। क्राइम ब्रांच ने खलील उल रहमान से पूछताछ करने के लिए उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर दो दिनों के लिए रिमांड पर ले लिया।

सूत्रों के अनुसार वर्ष 2009 में जब शकील उल रहमान की भर्ती हुई थी। इस गजेटेड पद की भर्ती प्रक्रिया को मात्र 35 दिनों में ही पूरा कर लिया गया था। पद के लिए 40 लोगों ने आवेदन किया था। जिस दिन नतीजे घोषित होने से थे, उससे एक दिन पूर्व ही शकील उल रहमान कश्मीर से फिशरीज विभाग से क्लर्क पद की नौकरी से इस्तीफा जम्मू आ गए थे कि मानो उन्हें इस बात की पूरी जानकारी दी कि यह नौकरी उन्हें ही मिलनी है। हुआ भी ऐसा ही। पीआरओ पद के लिए खलील उल रहमान की नियुक्ति हुई थी। आदेश जारी होने के चौबीस घंटे के भीतर ही उन्होंने नौकरी ज्वाइंन कर ली थी, ताकि कोर्ट में उनकी नियुक्ति को चुनौती न दी जा सके। इतना ही नहीं, खलील उल रहमान को पदोन्नत कर उपसचिव बनाने पर भी प्रश्न चिन्ह लगता है, जिसकी जांच क्राइम ब्रांच जम्मू के अधिकारी एसएसपी शैलेंद्र सिंह की देखरेख में कर रहे हैं।

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खलील उल रहमान का सस्पेंड होना तय

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के सर्विस रूल के मुताबिक यदि कोई सरकारी कर्मचारी किसी भी आरोप में 48 घंटे तक पुलिस हिरासत में रहता है तो उसे पुलिस रिपोर्ट के आधार पर सस्पेंड कर दिया जाता है। खलील उल रहमान भी 48 घंटे से अधिक समय से पुलिस हिरासत में है, जिससे उनका सस्पेंड होना तय मानना जा रहा है।

Posted By: Jagran

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