श्रीनगर, एएनआई। जम्मू-कश्मीर में फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार जम्मू-कश्मीर के कटरा के 84 किलोमीटर पूर्व में आज 8:56 बजे रिक्टर स्केल पर 4.0 तीव्रता का भूकंप आया। जम्मू-कश्मीर में 4.0  तीव्रता का भूकंप आने से लोग सहम गए।   

जम्मू-कश्मीर के कटरा जिले में मंगलवार की सुबह भूंकप के झटके महसूस किए गए। कटरा से 84 किमी पूर्व में आज 0856 घंटे की रफ्तार से झटके महसूस किए गए है। जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.0 मापी गई है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, मंगलवार की सुबह आठ बजकर 49 मिनट पर महसूस किए गए थे। इस दौरान लोग सहम उठे और घरों से बाहर निकल आए। हालांकि अभी तक किसी भी प्रकार के नुकसान की कोई खबर नहीं है।

बताया गया कि जम्मू-कश्मीर के कटरा जिले 4.0 तीव्रता का भूंकप महसूस किया है। इस भूकंप का केंद्र कटरा से लगभग 84 किलोमीटर पूर्व में था। नैशनल सेंटर फॉर सिस्मलॉजी के मुताबिक भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग दस किलोमीटर नीचे था। इससे पहले 27 जून को भी जम्मू-कश्मीर में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। यहां हेनले से 332 किमी पूर्वोत्तर में भूकंप का केंद्र था। जिसकी तीव्रता रिक्टर स्टेल पर 4.4 मापी गई है। बताया जा रहा है कि भूकंप शनिवार दोपहर 12.32 बजे आया था। इस बात की जानकारी नेशनल सेंटर ऑफ सिस्मोलॉजी ने दी ।

जानकारी हो कि 14 से 16 जून के बीच बार-बार जम्मू-कश्मीर की धरती भूकंप के कारण हिली थी। हालांकि अब तक किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। 16 जून के आए भूकंप का केंद्र भी कटरा से 85 किलोमीटर पूर्व में था और तीव्रता 3.9 मापी गई थी। अधिकारियों ने कहा था कि सुबह भूकंप का केंद्र तजाकिस्तान क्षेत्र में था और इसकी गहराई पृथ्वी की सतह के भीतर 100 किलोमीटर थी। भूकंप की दृष्टि से कश्मीर ऐसे क्षेत्र में स्थित है जहां भूकंप आने की अत्यधिक आशंका रहती है। पहले भी कश्मीर में भूकंप ने खासा कहर बरपाया है। 

इससे पहले, दिल्ली ने पिछले दिनों में कुछ हल्के झटके महसूस किए हैं। राष्ट्रीय राजधानी और इसके आस-पास के क्षेत्रों जैसे कि नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम ने हाल के दिनों में कुल 18 झटके महसूस किए हैं। इनमें से 8 रोहतक में आए हैं। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में हाल ही में दर्ज किए गए सभी भूकंप निम्न से मध्यम तीव्रता के थे।

क्यों आता है भूकंप?

धरती मुख्य तौर पर चार परतों से बनी हुई है, इनर कोर, आउटर कोर, मैनटल और क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल को लिथोस्फेयर कहते हैं। ये 50 किलोमीटर की मोटी परत, वर्गों में बंटी हुई है, जिन्हें टैकटोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये टैकटोनिक प्लेट्स अपनी जगह से हिलती रहती हैं लेकिन जब ये बहुत ज्यादा हिल जाती हैं, तो भूकंप आ जाता है। ये प्लेट्स क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर, दोनों ही तरह से अपनी जगह से हिल सकती हैं। इसके बाद वे अपनी जगह तलाशती हैं और ऐसे में एक प्लेट दूसरी के नीचे आ जाती है।

क्यों टकराती हैं प्लेटें?

दरअसल ये प्लेंटे बेहद धीरे-धीरे घूमती रहती हैं। इस प्रकार ये हर साल 4-5 मिमी अपने स्थान से खिसक जाती हैं। कोई प्लेट दूसरी प्लेट के निकट जाती है तो कोई दूर हो जाती है। ऐसे में कभी-कभी ये टकरा भी जाती हैं।

भूकंप के केंद्र और तीव्रता का क्या मतलब है?

भूकंप का केंद्र वह स्थान होता है जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।

भूकंप की गहराई से क्या मतलब है?

मतलब साफ है कि हलचल कितनी गहराई पर हुई है। भूकंप की गहराई जितनी ज्यादा होगी सतह पर उसकी तीव्रता उतनी ही कम महसूस होगी।

कौन से भूकंप खतरनाक होते हैं?

रिक्टर स्केल पर आमतौर पर 5 तक की तीव्रता वाले भूकंप खतरनाक नहीं होते हैं, लेकिन यह क्षेत्र की संरचना पर निर्भर करता है। यदि भूकंप का केंद्र नदी का तट पर हो और वहां भूकंपरोधी तकनीक के बगैर ऊंची इमारतें बनी हों तो 5 की तीव्रता वाला भूकंप भी खतरनाक हो सकता है।

Posted By: Preeti jha

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