जम्मू, दिनेश महाजन। केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के मार्ग पर रायामोड़ और विजयपुर रेलवे स्टेशन के नजदीक दो ऐसे रेलवे क्रॉसिंग हैं, जिनपर ट्रैफिक का सबसे ज्यादा लोड है। इन मावन संचालित रेलवे क्रॉसिंग से हर मिनट में चालीस छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। यह खुलासा रेलवे प्रशासन की ओर से हाल ही में किए सर्वेक्षण से हुआ है। रेलवे प्रबंधन ने रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रैफिक का दबाव जानने और संभावित हादसों को रोकने के लिए रणनीति बनाने के लिए यह सर्वेक्षण किया था।

सर्वेक्षण के आधार पर ही रोड ओवर ब्रिज अथवा अंडर पाथ यानी सब-वे के निर्माण संबंधी रणनीति बनाई जाती है। मगर रेलवे प्रबंधन का दावा है कि लेवल क्रॉसिंग के निर्माण के लिए राज्य प्रशासन का जरूरी सहयोग नहीं मिल रहा है। इस कारण रेलवे फाटक पर लेवल क्रासिंग का काम शुरू नहीं हो पा रहा है। जम्मू रेवले स्टेशन के सुपरिंटेंडेंट राजीव सभ्रवाल के अनुसार रेलवे नीति के तहत रोड ओवर ब्रिज के निर्माण पर 50 फीसद खर्च राज्य सरकार और 50 फीसदी रेलवे प्रबंधन करता है। राज्य प्रशासन का सहयोग न मिलने से ही विजयपुर रेलवे स्टेशन के पास और केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के जाने वाले रोड पर रायामोड़ में लेवल क्रासिंग बनाने में देरी हो रही है।

फाटक बंद होते ही लग जाता है जाम : विजयपुर रेलवे स्टेशन के पास और रायामोड़ से जब भी ट्रेन गुजरनी हो तो उससे 10 मिनट पहले पूर्व इन मानव संचालित इन क्रॉसिंग पर फाटक लगा दिया जाता है। ऐसे में दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। अगर 15 मिनट के लिए फाटक लगाया जाता है तो रेलवे के सर्वेक्षण के आधार पर कहा जा सकता है कि वहां 600 गाडिय़ों की रफ्तार थम जाती है। हजारों लोगों का फाटक पर समय बर्बाद होता है। कई चालक ऐसे भी होते हैं जो फाटक बंद होते-होते भी रेलवे लाइन को क्रॉस करने की फिराक में रहते हैं। ऐसे में यहां किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है।

63 में से 20 रहे मानव संचालित रेलवे क्रॉसिंग : जम्मू-कठुआ रेल सेक्शन पर पहले 63 रेलवे क्रॉसिंग हुआ करते थे। इनमें आठ ऐसे रेलवे क्रॉसिंग थे, जो मानव रहित थे। करीब दो वर्ष पूर्व तक सभी मानव रहित रेलवे क्रासिंग को मानव संचालित या रोड ओवर ब्रिज तैयार कर बना दिया गया था। मौजूदा समय में मात्र बीस हीं मानव संचालित रेलवे क्रासिंग रह गए हैं। जम्मू पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोई भी रेलवे क्रासिंग नहीं है। सभी क्रासिंग गांव के संपर्क मार्गो पर हैं। लोगों का कहना कि लोगों की समस्याओं को दूर किया जाए।

सुरक्षित क्रासिंग के लिए कठुआ में बनाए जाएं दो सब-वे

कठुआ जिले में दो सब वे का निर्माण होने से हजारों ग्रामीणों को सुरक्षित क्रासिंग के साथ फाटक बंद होने पर रुकने के झंझट से निजात मिल गई है। अभी भी जिला में 12 रेल फाटक हैं, जहां से ग्रामीणों को बार-बार रेल फाटक बंद होने से कई घंटों इंतजार करना पड़ता है। सबसे ज्यादा व्यस्त कठुआ रेलवे स्टेशन पर हटली गांव को जाने वाले मार्ग पर बना फाटक है। जहां पर अंडर पाथ का निर्माण हुए एक साल हो गया है,लेकिन उसे अभी चालू नहीं किया गया है। ये व्यस्त मार्ग है। जहां पर औद्योगिक क्षेत्र होने से हटली सहित 30 के करीब गांवों को मार्ग जाता है। जिससे जहां पर लोग कई सालों से अंडर पाथ की मांग कर रहे हैं,लेकिन बनने के बाद भी एक साल से शुरू नहीं हो पाया है। इसके अलावा लखनपर कस्बे में करड़ोह मार्ग को जाने वाले मार्ग के बीच फाटक है। जहां भी कई घंटे लोग फाटक बार-बार बंद होने से रुकते हैं। उधर कठुआ- बुद्धि सेक्शन में इसी क्षेत्र में दो अन्य लगेट व जंगलोट चार फाटक हैं। हीरानगर-बुदि सेक्शन में भी तीन फाटक हैं, जहां पर अंडर पाथ नहीं है। जिसके चलते लोगों को बार-बार ट्रेन आने पर फाटक बंद होने के बाद खुलने का इंतजार करना पड़ता है।

ये हैं रेलवे क्रासिंग

  • 63 : जम्मू रेलवे स्टेशन के आउटर में
  • 62 : बड़ी ब्राह्मणा
  • 54 : बड़ी ब्राह्मणा और विजयपुर

रेलवे स्टेशन के बीच

  • 51 : विजयपुर रेलवे स्टेशन
  • 48 : सांबा रेलवे स्टेशन
  • 47 : सांबा घग्वाल रेलवे स्टेशन
  • 46 : सांबा घग्वाल रेलवे स्टेशन
  • 45 : घग्वाल रेलवे स्टेशन
  • 39 : घग्वाल हीरानगर सेक्शन
  • 32 : हीरानगर छन्न रोडियां सेक्शन
  • 30 : हीरानगर छन्न रोडियां सेक्शन
  • 29 : छन्न रोडियां रेलवे स्टेशन
  • 28 : छन्नी बुद्धि रेलवे स्टेशन
  • 26 : छन्नी बुद्धि रेलवे स्टेशन
  • 25 : छन्नी बुद्धि रेलवे स्टेशन
  • 24 : बुद्धि रेलवे स्टेशन
  • 23 : कठुआ बुद्धि सेक्शन
  • 20 : कठुआ बुद्धि सेक्शन
  • 19 : कठुआ रेलवे स्टेशन
  • 18 : कठुआ रेलवे स्टेशन

Posted By: Rahul Sharma

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