श्रीनगर, जेएनएन। पुलवामा द्रबशाला में सुरक्षाबलों द्वारा मुठभेड़ में वांछित ड्राइवर ने स्वयं ही बीएसएफ के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। गत नवंबर 25 को सुरक्षाबलों ने द्रबशाला में मुठभेड़ के दौरान हिजबुल मुजाहिदीन के दो आतंकवादियों को मार गिराया था। जांच के दौरान पता चला कि ये आतंकवादी किसी की मदद से यहां तक पहुंचे थे। जिस ड्राइवर ने अपने वाहन में बैठाकर इन आतंकियों को पुलवामा पहुंचाया, सुरक्षाबल के जवान बेसब्री से उसकी तलाश कर रही थी।

बीएसएफ के एक अधिकारी ने ड्राइवर द्वारा अात्मसमर्पण की पुष्टि करते हुए बताया कि इसकी पहचान 34 वर्षीय मुजफ्फर अहमद वानी निवासी अच्छन पुलवामा के तौर पर हुई। 25 नवंबर को सुरक्षाबलों को विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली कि दो आतंकवादी पुलवामा में देखे गए हैं। घेराबंदी करने के बाद जब तलाशी अभियान चलाया गया तो आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों पर गोलियां बरसाना शुरू कर दी। लंबी मुठभेड़ के बाद दोनों आतंकवादियों को मार गिराया गया। जिनकी पहचान इरफान अहमद शेख और इरफान अहमद राथर के तौर पर हुई। जांच की गई तो पता चला कि ये दोनों आतंकवादी किसी वाहन में सवार होकर यहां पहुंचे थे। कुछ लोगों ने वाहन चालक को भी देखा था।

जानकारी के आधार पर ड्राइवर की तलाश की जा रही थी। शनिवार देर शाम को वाहन चालक ने स्वयं ही आईजी बीएसएफ श्रीनगर के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। उन्होंने यह बात भी कबूल की कि उसी ने दोनों आतंकियों को पुलवामा पहुंचाया था। सूत्रों ने यह भी बताया कि वानी काफी देर से हिज्ब के लिए काम कर रहा है। इससे पहले वह आतंकी लश्कर-ए-तोयबा का ओवर ग्राउंड वर्कर था। आतंकी गतिविधियों में संलिप्त होने के चलते उसे वर्ष 2010 में पुलिस ने हिरासत में भी लिया था। यही नहीं उसने आठ महीने कठुआ जेल में सजा भी काटी है।

रिहा होने के दो महीने बाद उसे एक बार फिर पुलिस ने उन्हीं आरोपों के साथ गिरफ्तार किया और उसे मटन जेल में रखा गया। इस बार भी उसे आठ से दस महीनों की सजा हुई। यही नहीं वर्ष 2016 में भी प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया गया था। बीएसएफ ने सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद वानी को पुलवामा पुलिस के हवाले कर दिया।

Posted By: Rahul Sharma

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