यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 28, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों में अंधविश्वाशों के खिलाफ जागरूकता फैला रहे डा. दिव्यज्योति सैकिया
अशिक्षा अधविश्वास का बड़ा कारण है। ये बातें सामाजिक कार्यकर्ता डा. दिव्यज्योति सैकिया ने कही। इन्होंने हाल ही में सांबा ...और पढ़ें

जम्मू, जेएनएन : देश आज भी अंधविश्वास से पूरी तरह मुक्त नहीं हुआ है। समाज के एक वर्ग के पिछड़ेपन का यह भी एक कारण है। इसलिए लोगों को इस अंधविश्वास रूपी अंधकार से बाहर निकालना बहुत जरूरी है। अशिक्षा अधविश्वास का बड़ा कारण है। ये बातें सामाजिक कार्यकर्ता डा. दिव्यज्योति सैकिया ने कही। इन्होंने हाल ही में सांबा जिले के बाड़ी ब्राह्मणा और जम्मू के कालूचक मेें जागरूकता कार्यक्रम किया, जिसमें लोगों को अंधविश्वास से बचने के लिए प्रेरित किया। डा. दिव्यज्योति देश के विभिन्न राज्यों में जाकर समाज को भय, आतंक, अंधविश्वास व नशा से मुक्त कराने का बीड़ा उठाया है। इस मुहीम के तहत जम्मू कश्मीर के अन्य हिस्सों में भी कार्यक्रम किए जाएंगे।
असम राज्य के रहने वाले डा. सैकिया की सामाजिक सेवा ने एक बड़े जनमानस को प्रभावित किया है। वह सिर्फ समाजसेवी ही नहीं, बल्कि एक अच्छे वक्ता और मानवाधिकार संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध नागरिक हैं। समय-समय पर पूर्वोत्तर सहित भारत के अन्य राज्यों मे भी लोगों को जागरूक करते रहते हैं। 2008 से 2012 के बीच असम के बोडोलैंड क्षेत्र में हुए समाजिक व धार्मिक उन्मादों में भी वे लोगों के बीच जाकर उनको समझाकर शांति बनाए रखने की अपील करते रहे थे। कई जगहों पर वे बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ भी मुहिम चलाया कई लड़कियों को बचाया।
डा. दिव्यज्योति सैकिया ने कहा कि पूर्वोत्तर और जम्मू कश्मीर के अलावा अरुणांचल प्रदेश, मणिपुर, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व महाराष्ट्र व अन्य राज्यों में जनजातियों के बीच जाकर उनको अंधविश्वास व कुरीतियों से जागरूक करना उनकी प्राथमिकता है। जनजातीय और पिछड़ा समाज ही अंधविश्वास में फंसते हैं। वे अपने स्तर पर लोगों को फंसाने वालों को समझाते हैं, जब जरूरत पड़ती है तो पुलिस से शिकायत भी करते हैं। 2009 से ही डा. दिव्यज्योति सैकिया असम में व्याप्त डायन कुप्रथा समाप्त करने के लिए विधानसभा में विधेयक पारित करने के लिए संघर्ष किया। आखिरकार 2015 में असम विधानसभा ने इसे विधेयक को पारित भी कर दिया। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी ने डॉ. दिव्यज्योति सैकिया को उनके मानवाधिकार को लेकर लड़े आंदोलनों व सराहनीय कार्यों के लिए डाक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया।
डा. सैकिया को मिल चुका है कई सम्मान : समय-समय पर डा. सैकिया को उनके उत्कृष्ट सामाजिक कार्य के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मानित किया जा चुका है। उनको भूपेन हजारिका राष्ट्रीय शांति सम्मान, मौलाना आजाद राष्ट्रीय सम्मान, नेल्सन मंडेला राष्ट्रीय सम्मान सहित अब तक करीब सौ से अधिक सम्मान मिल चुके हैं। डा. सैकिया के कार्यों पर लिखे गए लेख कई अंतरराष्ट्रीय समाचार पत्र-पत्रिका में भी छप चुके हैं। वर्तमान समय में वह सामाजिक कार्यों के साथ असम पुलिस प्रशिक्षण केंद्र (कॉलेज आफ देरगाव, असम) में डीएसपी रैंक के अधिकारी को लेक्चर भी देते हैं। वर्ल्ड कॉन्स्टिट्यूशन एंड पार्लियामेंट एसोसिएशन के इंटरनेशनल मेंबर, विश्व मानवाधिकार संरक्षण आयोग (यूएसए) के सदस्य व असम सत्र महासभा में एसवाइटी के युवा विंग एसवाइटी के मुख्य सलाहकार भी हैं।
