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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 25, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

फिल्ट्रेशन प्लांट में गाद जमा होने से पुराने शहर में गहराया पेयजल संकट

By JagranEdited By:
Published: Tue, 25 Aug 2020 07:25 AM (IST)

अवधेश चौहान जम्मू फिल्ट्रेशन प्लांट में गाद जमा होने से खासकर जम्मू के पुराने शहर के

फिल्ट्रेशन प्लांट में गाद जमा होने से पुराने शहर में गहराया पेयजल संकट
फिल्ट्रेशन प्लांट में गाद जमा होने से पुराने शहर में गहराया पेयजल संकट

अवधेश चौहान, जम्मू

फिल्ट्रेशन प्लांट में गाद जमा होने से खासकर जम्मू के पुराने शहर के कई इलाकों में पेयजल संकट गहराने लगा है। फिल्ट्रेशन प्लांट में तवी नदी का पानी जाता है। इन इलाकों में बिजली कटौती भी लोगों को परेशान कर रही है।

जानकारी के मुताबिक, जम्मू शहर और आसपास के इलाकों में रोजाना 65 मिलियन गैलन (एमजी) पानी की जरूरत होती है, जबकि 50 एमजी पानी की ही आपूर्ति हो रही है। इसकी मुख्य वजह बारिश के मौसम में तवी नदी के पानी में मौजूद गाद है। यही गाद फिल्ट्रेशन प्लांट्स में जाने से पानी को फिल्टर करने में समस्या आ रही है। जम्मू में नगरोटा शीतली, धौंतली और बागे बाहु तीन फिल्ट्रेशन प्लांट हैं। इसके साथ ही बिजली की अघोषित कटौती और फ्लक्चुएशन भी पेयजल सप्लाई में बाधा डाल रही है। अगर दो घंटे बिजली बंद रहती है, तो ट्यूबवेल से ओवरहेड टैंक नहीं भर पाते हैं। जम्मू के रिहाड़ी के रहने वाले अरविद शर्मा का कहना है कि उनके मोहल्ले में पिछले तीन दिन से पानी नहीं आया। जिन इलाकों में पेयजल किल्लत है, उनमें से ज्यादातर ऐसे इलाके हैं, जो तवी नदी के पानी पर ही निर्भर है। वैसे भी शहर की 80 फीसद पेयजल आपूर्ति तवी नदी से ही होती है। शहर के जिन इलाकों में पेयजल किल्लत बनी हुई है, उनमें रिहाड़ी, सरवाल, न्यू प्लाट, जानीपुर, बनतलाब, पुराने शहर का परेड, पंजतीर्थी, धौंतली बाजार, जैन बाजार, रघुनाथपोरा, खटीका तालाब, कृष्णा नगर, तालाब तिल्लो, बागे बाहु, सैनिक कॉलोनी, भठिडी आदि शामिल हैं। इन इलाकों में सप्ताह में 2-3 दिन ही पानी की सप्लाई संभव हो पा रही है। --------------

----बयान-----

पानी के इस्तेमाल में बरतें सावधानी

बरसात के मौसम में तवी नदी के पानी में गाद बढ़ जाती है। ऐसे में यही पानी जब फिल्ट्रेशन प्लांट में जाता है तो वहां भी गाद जमा हो जाती है। इस पानी को साफ करना जरूरी होता है। गाद वाले में पानी में अगर मोटर चलेगी तो मोटर खराब होने का डर रहता है। बिजली की कटौती और वोल्टेज में उतर-चढ़ाव के चलते भी मोटर ठीक से नहीं चल पाते हैं। इससे ओवरहेड टैंक नहीं भर पा रहे हैं। बरसात का मौसम खत्म होने के बाद जब तवी का पानी साफ हो जाएगा, तब पेयजल की समस्या खत्म हो जाएगी। ऐसे में लोगों से अपील है कि वे पानी का कम इस्तेमाल करें।

-मुनीष भट्ट, चीफ इंजीनियर, जलशक्ति विभाग ----------

जलशक्ति विभाग का अपना फीडर हो तो दूर हो सकती है समस्या

ट्यूबवेलों से पानी की आपूर्ति के लिए जलशक्ति विभाग के पास अलग से फीडर नहीं है। ट्यूबवेल से ओवरहेड टैंकों को भरने के लिए घनी आबादी वाले इलाकों में बिजली के कनेक्शन दिए गए हैं। यहां अत्यधिक लोड पड़ने से ट्रांसफार्मर अक्सर खराब हो जाते हैं, जिससे पेयजल सप्लाई भी प्रभावित होती है। हालांकि इकोनामिक रिकंस्ट्रक्शन एजेंसी (इरा) ने जो नए ट्यूबवेल बनाए हैं, उनके लिए अलग से ट्रांसफार्मर स्थापित किए गए हैं, लेकिन पुराने ट्यूबवेल अभी भी रिहायशी इलाकों के ट्रांसफार्मर से ही जुड़े हुए हैं। अगर इनके लिए भी अलग से ट्रांसफार्मर लगा दिए जाएं, तो पेयजल किल्लत काफी हद तक दूर हो सकती है।

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ट्यूबवेल लगाने में हुई राजनीति का खामियाजा भुगत रहा शहर

शहर में अस्सी के दशक या इससे पहले लगाए गए ट्यूबवेल आज भी भरपूर पानी दे रहे हैं, जबकि इरा द्वारा 90 के दशक में लगाए गए ट्यूबवेल पुराने ट्यूबवेलों से काफी कम पानी दे रहे हैं। 90 के दशक में सेंट्रल ग्राउंड वॉटर विभाग ने ट्यूबवेल लगाने के लिए सर्वे के मुताबिक उनकी जगह चिह्नित की थी, लेकिन इसमें भी राजनीति की गई। नेताओं ने सर्वे के मुताबिक चलने के बजाय इन ट्यूबवेलों को ऐसे स्थानों पर लगवाया, जहां उनका वोट बैंक था, जबकि वहां भूमिगत जलस्तर बहुत नीचे था। यही वजह है कि इरा द्वारा लगाए गए ट्यूबवेल पुराने ट्यूबवेलों से काफी कम पानी दे रहे हैं। ट्यूबवेल लगाने में हुई इस राजनीति का खामियाजा आज तक शहर के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।