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जम्मू-कश्मीर में पंजाबी को राजभाषा का दर्जा देने की मांग पकड़ने लगी रफ्तार, पंजाब से भी मिलने लगा समर्थन

Published: Tue, 06 Oct 2026 09:05 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर में पंजाबी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना छठे दिन भी जारी रहा।

पंजाब से मिलने लगा समर्थन, पंजाबी को राजभाषा का दर्जा देने की मांग पकड़ने लगी रफ्तार।

पंजाब से मिलने लगा समर्थन, पंजाबी को राजभाषा का दर्जा देने की मांग पकड़ने लगी रफ्तार।

HighLights

  1. पंजाबी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की मांग जारी

  2. अनिश्चितकालीन धरना जम्मू में छठे दिन भी चला

  3. पंजाब के किसान संगठनों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया

जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में पंजाबी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की मांग को लेकर शुरू किया गया अनिश्चितकालीन धरना मंगलवार को छठे दिन भी जारी रहा।

तवी पुल पर महाराजा हरि स्मारक के पास चल रहे मोर्चे को अब पंजाब के किसान संगठनों, विभिन्न गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों, सामाजिक व धार्मिक संगठनों तथा जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जिलों से भी समर्थन मिलना शुरू हो गया है।

मोर्चे के अध्यक्ष एवं गुरुद्वारा रानी तालाब के चेयरमैन तरनजीत सिंह टोनी ने कहा कि पंजाबी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की मांग अब किसी एक संगठन या क्षेत्र तक सीमित नहीं रही है।

उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, मंत्रिमंडल और जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सभी 90 विधायकों से आगामी विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पंजाबी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने संबंधी प्रस्ताव लाने और उसका समर्थन करने की अपील की। मोर्चे को पंजाब की अन्नदाता किसान यूनियन के अध्यक्ष अंगरेज सिंह संधू के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने समर्थन दिया।

इसके अलावा डीजीपीसी के महासचिव सुरजीत सिंह, उपाध्यक्ष बलविंदर सिंह सहित कई सिख प्रतिनिधियों ने भी समर्थन जताया। रियासी और सांबा की विभिन्न जिला समितियों ने भी मांग के समर्थन में पत्र सौंपे। गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, बोर कैंप और गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, बरजाला, रायपुर सतवारी की ओर से भी लिखित समर्थन दिया गया।

ऑल जेएंडके दलित चेतना मंच, श्री गुरु रविदास सभा कृष्णा नगर तथा श्री माता वैष्णो देवी ई-रिक्शा, ई-ऑटो यूनियन ने भी पंजाबी को आधिकारिक दर्जा देने की मांग का समर्थन किया। टोनी ने कहा कि अगले चरण में पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बाहर से जत्थे व प्रतिनिधिमंडल जम्मू पहुंचेंगे।

प्रधानमंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और विधायकों तक भी मांग पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा।