श्रीनगर, ब्यूरो। हुर्रियत कांफ्रेंस समेत कश्मीर के विभिन्न अलगाववादी संगठनों का साझा मंच ज्वाइंट रजिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) केंद्र के साथ बातचीत के मुद्दे पर अंतिम फैसला 18 जून को ले सकती है। सोमवार को कट्टरपंथी सैयद अली शाह गिलानी, उदारवादी हुर्रियत प्रमुख मीरवाइज मौलवी उमर फारूक और जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के चेयरमैन यासीन मलिक के बीच बैठक होगी।

गौरतलब है कि राज्य के दो दिवसीय दौरे पर गत दिनों आए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने हुर्रियत समेत कश्मीर के विभिन्न अलगाववादी संगठनों को बातचीत का न्योता देते हुए कहा था कि केंद्र सभी से बातचीत के लिए तैयार है। बातचीत के लिए सही सोच जरूरी है।

मीरवाइज ने केंद्रीय गृहमंत्री के बयान पर कहा कि था कि हम बातचीत का फैसला जल्दबाजी में नहीं लेंगे। सभी से विचार विमर्श करने के बाद ही अंतिम फैसला होगा।उदारवादी हुर्रियतकांफ्रेंस के प्रमुख घटकों में शामिल पीपुल्स पोलिटीकल पार्टी के चेयरमैन हिलाल अहमद वार ने कहा कि यहां सभी बातचीत के पक्षधर हैं। विभिन्न दलों का बातचीत को लेकर अपना नजरिया है।

सभी के साथ सहमति बनाने, आम कश्मीरी अवाम को विश्वास में लेने के लिए ही गत दिनों छह सदस्यीय समिति बनाई गई थी। समिति ने विभिन्न लोगों से बातचीत की है। समिति की रिपोर्ट भी आने वाली है। उस पर विचार विमर्श के बाद ही जेआरएल नेतृत्व अंतिम फैसला लेगा।

हम यहां आम कश्मीरियों का नेतृत्व करते हैं। खैर, अतीत के अनुभवों के आधार पर हमें अभी भी केंद्र के रवैये पर संदेह है। मुस्लिम कांफ्रेंस से संबंधित मीर इमरान ने कहा कि हमने अपना पक्ष हुर्रियतनेतृत्व को बता दिया है। हम कश्मीर समस्या को आम कश्मीरी की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र की सिफारिशों के अनुरूप हल किए जाने के पक्षधर हैं। 18 जून को जेआरएल की बैठक होने की उम्मीद है। इसमे बातचीत पर अंतिम फैसला होने की उम्मीद है।

मीरवाइज ने कहा कि हम हमेशा से बातचीत के पक्षधर रहे हैं। हमसे ज्यादा कौन कश्मीर के लिए फिक्रमंद होगा। नई दिल्ली बातचीत को लेकर सही मायनों में गंभीर है या फिर वह सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बढ़ रहे दबाव से बचने के लिए ऐसा कर रही है। यह भी देखना है। ईद के बाद हम लोग बैठक करेंगे। उसमें हम नई दिल्ली की बातचीत की पेशकश पर अपना रुख स्पष्ट करेंगे। 

अब बातचीत नहीं, सबक सिखाने का समय

जागरण संवाददाता, पाकिस्तान अपनी आदत से बाज नहीं आने वाला है। पीठ पीछे वार करना उसकी फितरत है। ऐसे में उससे बातचीत करने के बजाय भारत को घुसकर कार्रवाई करनी चाहिए। पाकिस्तान द्वारा रामगढ़ सेक्टर में भारतीय चौकियों पर की गई गोलीबारी से गुस्साए लोगों ने प्रधानमंत्री से कार्रवाई की अपील की है। विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता बुधवार को सड़क पर उतर आए।

उन्होंने पाकिस्तान के झंडे जलाकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब पाकिस्तान का दुस्साहस बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

डोगरा फ्रंट ने पाक झंडा जलाया : डोगरा फ्रंट शिव सेना के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को रानी पार्क क्षेत्र में जमकर प्रदर्शन किया और विरोध में पाकिस्तान का झंडा जलाया। इस दौरान रैली भी निकाली गई। कार्यकर्ताओं ने कहा कि पाकिस्तान आए दिन संघर्ष विराम की अवहेलना करता है, ऐसे में अब सबक सिखाने का समय आ गया है। प्रदेश अध्यक्ष अशोक गुप्ता ने कहा कि भारत-पाक में शिमला समझौता हुआ था मगर पाकिस्तान ने इसकी कभी पालना नहीं की।

अभी हाल ही में दोनों देशों के अधिकारियों में बैठक हुई, जिसमें संघर्ष विराम की पालना करने की बात हुई। मगर पाकिस्तान ने फिर से संघर्ष विराम तोड़ दिया।

गुप्ता ने कहा कि पाकिस्तान के दुस्साहस का करारा जवाब देने का समय आ गया है। वहीं जम्मू कश्मीर के अंदर एकतरफा सीजफायर करना, पत्थरबाजों को रिहा करना, अलगाववादियों से नरम रवैया रखना कई सवाल खड़े कर रहा है। केंद्र सरकार अपनी नीति को लोगों के सामने रखे। वहीं, सीमा पर पाकिस्तान को करारा जवाब दिया जाए जोकि भारत पर गोलीबारी किए जा रहा है।

गोलाबारी व बातचीत एक साथ नहीं :

श्री राम सेना ने कहा कि सीमा पर आए दिन गोलाबारी करने वाले पाकिस्तान को केंद्र सरकार सख्त संकेत दे कि संघर्ष विराम की अवहेलना, आतंकवाद को समर्थन देना और बातचीत का दौर एक साथ नहीं चल सकते। प्रदेश अध्यक्ष राजीव महाजन ने रामगढ़ सेक्टर में भारतीय चौकियों पर किए गए हमलों के लिए पाकिस्तान की कड़ी निंदा की। वहीं, केंद्र सरकार से कहा कि अब पाकिस्तान को सख्त जवाब देने का समय आ गया है।

जम्मू कश्मीर को सेना के हवाले करो :

असेंबली सीमा पर पाकिस्तान द्वारा की गई गोलीबारी के विरोध में जम्मू वेस्ट असेंबली मूवमेंट के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को न्यू प्लाट क्षेत्र में प्रदर्शन किया और जमकर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए। कार्यकर्ताओं ने कहा कि फिर से संघर्ष विराम तोड़कर पाकिस्तान ने बता दिया कि उसकी मंशा क्या है। ऐसे में केंद्र सरकार किसका इंतजार कर रही है। कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री से अपील की कि वह सीमा पर पहुंचकर हालात का जायजा लें। वहीं, जम्मू कश्मीर को पूरी तरह से सेना के हवाले किया जाए।

प्रदेश अध्यक्ष सुनील डिंपल ने कहा कि प्रधानमंत्री को अब जम्मू कश्मीर आना चाहिए और देखना चाहिए कि सीमांत क्षेत्रों में क्या चल रहा है? प्रधानमंत्री स्वयं एक रात अरनिया, रामगढ़ जैसे सीमांत गांवों में बिताएं और देखें कि लोगों का कितना बुरा हाल है। सुनील ¨डपल ने केंद्र सरकार के व्हाट्स एप कॉल को ब्लॉक करने के निर्णय का विरोध किया।

 प्रधानमंत्री लोगों को जवाब दें : पैंथर्स पार्टी पाकिस्तान द्वारा फिर से संघर्ष विराम की अवहेलना करने पर भाजपा की चुप्पी को लेकर पैंथर्स पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को भाजपा का पुतला जलाकर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि देश अपने सैनिकों की शहादत दिए जा रहा है मगर पाकिस्तान को करारा जवाब क्यों नहीं? मौके पर पाकिस्तान के खिलाफ भी नारे लगाए गए। पैंथर्स पार्टी के चेयरमैन हर्ष देव सिंह ने कहा कि सीमा पर पाकिस्तान सारी हदें पार कर रहा है, फिर सरकार कहां है। पाकिस्तान भारतीय चौकियों व रिहायशी इलाकों पर जब मन आए गोलाबारी कर देता है मगर केंद्र सरकार चुप है। प्रधानमंत्री को अब देश की जनता को जवाब देना होगा। कार्यकर्ताओं ने जमकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। 

Posted By: Preeti jha