जम्मू, ललित कुमार। जम्मू कश्मीर के दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित होने के बाद भी लखनपुर में वस्तुओं पर लगने वाला टोल टैक्स जारी रहेगा। एक नवंबर 2019 से राज्य के कई कानून निरस्त हो जाएंगे और कई केंद्रीय कानून राज्य में सीधे लागू होंगे, लेकिन इन बदलाव के बीच जम्मू कश्मीर के प्रवेश द्वार लखनपुर की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आएगा।

पहली जुलाई 2017 को केंद्र सरकार ने एक दर्जन से अधिक केंद्रीय व राज्य करों को समाप्त कर वन-नेशन, वन-टैक्स के रूप में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किया था, लेकिन लखनपुर पहुंच कर इसने दम तोड़ दिया। पूरे देश में जब एक टैक्स प्रणाली लागू हुई, उस समय जम्मू के व्यापारी जीएसटी लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। तत्कालीन पीडीपी-भाजपा सरकार ने जेएंडके जीएसटी बिल पारित कर दिया और आठ जुलाई 2017 से राज्य में जीएसटी लागू हुआ। जीएसटी लागू होने पर व्यापारियों को लगा कि अब उन्हें लखनपुर टोल टैक्स से मुक्ति मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। राज्य में जीएसटी भी लागू हो गया और लखनपुर में टोल टैक्स भी जारी रहा।

वन नेशन, वन टैक्स जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं: पहली जुलाई 2017 को केंद्र सरकार ने एक दर्जन से अधिक केंद्रीय व राज्य करों को समाप्त कर वन-नेशन, वन-टैक्स के रूप में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किया था, लेकिन लखनपुर पहुंच कर इसने दम तोड़ दिया। पूरे देश में जब एक टैक्स प्रणाली लागू हुई, उस समय जम्मू के व्यापारी जीएसटी लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। तत्कालीन पीडीपी-भाजपा सरकार ने जेएंडके जीएसटी बिल पारित कर दिया और आठ जुलाई 2017 से राज्य में जीएसटी लागू हुआ। जीएसटी लागू होने पर व्यापारियों को लगा कि अब उन्हें लखनपुर टोल टैक्स से मुक्ति मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। राज्य में जीएसटी भी लागू हो गया और लखनपुर में टोल टैक्स भी जारी रहा।

1000 करोड़ आता है राजस्व: लखनपुर में टोल टैक्स से सरकार को सालाना 900 से 1000 करोड़ रुपये राजस्व आता है। लखनपुर में 100 रुपये प्रति ङ्क्षक्वटल टोल टैक्स लागू है। केंद्र ने जीएसटी लागू करते समय कहा था कि इसके लागू होने से जिन राज्यों को जितना नुकसान होगा, उसकी भरपाई केंद्र करेगा, लेकिन लखनपुर उस भरपाई के दायरे में भी नहीं आता क्योंकि यह पूर्ण रूप से राज्य संविधान के तहत लागू है।

उद्योग को माफ है टोल टैक्स : जम्मू-कश्मीर के उद्योग को बढ़ावा देने और इसे पंजाब के उद्योग की प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए 70 के दशक से स्थानीय उद्योग को लखनपुर टोल टैक्स में छूट हासिल है। वर्ष 2005 में जब राज्य में वैट प्रणाली लागू हुई, तब भी इस छूट को जारी रखा गया। जीएसटी लागू होने के बाद भी यह छूट बरकरार रही। इसके तहत उद्योग के लिए जितना भी रॉ-मैटेरियल बाहरी राज्यों से आता है और तैयार उत्पाद बाहर जाता है, उस पर टोल टैक्स नहीं लगता। अगर उद्योग के लिए कोई मशीनरी आती है, तो उस पर भी टोल टैक्स की छूट रहती है।

जारी रहेगा यह एक्ट : जम्मू कश्मीर पुनर्गठन कानून के तहत 31 अक्टूबर के बाद भी राज्य के जो कानून जारी रहेंगे, उनमें जेएंडके जीएसटी एक्ट 2017 भी है। इसके तहत सरकार के पास राज्य के भीतर सामान की खरीद-फरोख्त पर टैक्स दरें तय करने का अधिकार रहेगा। इसका सीधा फायदा उद्योग जगत को होगा क्योंकि राज्य सरकार उद्योग को स्टेट जीएसटी में छूट समेत कई रियायतें दे रही है।

उद्योग व व्यापार आमने-सामने : उद्योग जगत का मानना है कि अगर लखनपुर टैक्स हटा दिया जाता है तो उद्योग को नुकसान होगा। उधर, व्यापारियों का तर्क है कि इसके जारी रहने से उपभोक्ताओं पर दोहरे टैक्स की मार पड़ रही है। यही कारण है कि टैक्स चोरी बढ़ी है और उनका काफी व्यापार पड़ोसी राज्यों में शिफ्ट हो गया है।

  • सरकार जब चाहे लखनपुर टोल टैक्स हटा सकती है, लेकिन अभी कुछ नहीं कह सकते। राज्य पुनर्गठन कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं जिससे यह कहा जाए कि 31 अक्टूबर के बाद टोल टैक्स स्वयं खत्म हो जाएगा। पीके भट्ट, कमिश्नर स्टेट टैक्सेस विभाग
  • केंद्र शासित जम्मू कश्मीर में लखनपुर टोल टैक्स को जारी रखना अच्छी खबर है। केंद्र जम्मू कश्मीर में निवेश के लिए उद्योगपतियों को आमंत्रित कर रहा है। ऐसे में उनका उत्पादन अन्य राज्यों की तुलना में सस्ता रहेगा। ललित महाजन, प्रधान बड़ी ब्राह्मणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
  • मोदी सरकार का कहना है कि अब जम्मू कश्मीर का भारत में सही विलय हुआ है। इसके बाद भी लखनपुर टोल टैक्स जारी रखा जाता है तो ये दुर्भाग्य है। जब पूरे भारत में एक टैक्स लागू है तो जम्मू-कश्मीर में टोल टैक्स क्यों?  दीपक गुप्ता, महासचिव ट्रेडर्स फेडरेशन वेयर हाउस, नेहरू मार्केट, जम्मू

Posted By: Rahul Sharma

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