जम्मू, अवधेश चौहान। एक ओर सरकार खेल को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे करती है, दूसरी ओर दलगत राजनीति और अधिकारियों की उदासीनता किस कदर इसमें अड़ंगा लगाती है, भोर कैंप में अधूरा बना मिनी स्टेडियम इसकी पूरी कहानी बयां कर रहा है। वर्ष 2014 में उस समय कांग्रेस-नेशनल कांफ्रेंस की सरकार के समय 90 लाख रुपये की संभावित लागत से मिनी स्टेडियम का निर्माण शुरू किया गया था। छह महीने में ही काम पूरा करने लक्ष्य रखा गया था। 70 लाख खर्च कर अधिकतर काम भी कर लिया गया लेकिन सरकार बदलते ही यह राजनीति की भेंट चढ़ गया। दूसरी सरकार ने रुचि नहीं दिखाई। फंड नहीं मिला। इससे काम रुक गया।

अब हालत यह है कि स्टेडियम के दाहिनी ओर दर्शकों के लिए बनी दर्शक दीर्घा बरसात में पानी में बह गई। तवी का पानी दर्शक दीर्घा के साथ बाउंड्री वॉल भी बहा ले गया। इससे स्टेडियम ने तालाब का रूप ले लिया। स्टेडियम से पानी तो निकल गया लेकिन अपने साथ लाई गंदगी और पॉलीथिन लिफाफे के स्टेडियम में ढेर लगे हैं। स्टेडियम के चारों तरफ झाड़ियां नशेड़ियों का अड्डा बनी हुई हैं। वीरान मैदान मवेशियों की चरागाह बन कर रह गया है। कांग्रेस के पूर्व मंत्री रमन भल्ला और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने पांच मार्च 2014 में स्टेडियम का नींव पत्थर रखा था। पहले जिस तेजी से काम शुरू हुआ, उससे लगा था कि स्थानय युवकों को यहां अच्छा खेल मैदान मिल जाएगा। खिलाड़ी यहां अपना अभ्यास कर सकेंगे। फ्लड लाइट्स का काम बाकी था ताकि रात में स्थानीय स्तर के मैच भी करवाए जा सकें।

मिनी स्टेडियम नहीं बनने से खिलाड़ियों में निराशा है। 5 साल से काम ठप पड़ा है। हालांकि खिलाड़ियों ने अपने तौर पर स्टेडियम के कुछ हिस्से में पिच बना कर क्रिकेट खेलने के लिए तैयार कर ली है, लेकिन ऊबड़-खाबड़ मैदान में पसरी गंदगी उन्हें रास नहीं आ रही है। यहां खेलते समय चोटिल होने का डर रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मिनी स्टेडियम वीरान रहने से यहां शरारती तत्वों का भी जमावड़ा रहता है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद अब केंद्र शासित प्रदेश के उप राज्यपाल को इसके निर्माण के लिए गंभीरता से पहल करनी चाहिए।

  • भोर कैंप इलाके में स्टेडियम का निर्माण शुरू होने से लोगों में उम्मीद बंधी थी कि युवाओं को अब खेलने के लिए मौलाना आजाद स्टेडियम व अन्य मैदानों में नहीं जाना पड़ेगा। अब स्टेडियम का काम 5 वर्ष से बंद पड़ा हुआ है। यूथ सर्विसेज एंड स्पोट्र्स के अधीन आने वाला स्टेडियम अब राजनीति की भेंट चढ़ गया है। यदि इसका काम पूरा हो जाए तो युवकों को खेल की सुविधा मिलेगी। -संचित रैना, स्थानीय युवक
  • एक तरफ तो केंद्रीय खेल मंत्रलय की ओर से खेलो इंडिया के लिए करोड़ों रुपये का बजट जम्मू-कश्मीर के लिए निर्धारित किया गया है लेकिन यहां खेल मैदानों के न होने से जम्मू के युवाओं की प्रतिभा हाशिए पर आ गई है। जम्मू नगर निगम के अधीन आने वाले इस वार्ड की आबादी 15 हजार से अधिक है, लेकिन युवाओं के लिए कोई खेल मैदान नहीं है। सरकार को चाहिए कि इस मिनी स्टेडियम की ओर ध्यान दे और काम पूरा कराए। -परमजीत सिंह, स्थानीय युवक

 

  • जम्मू के युवाओं में विभिन्न खेल प्रतिस्पर्धाओं में काफी रुचि है लेकिन मैदान न होने से खिलाडिय़ों की प्रतिभा खत्म हो रही है। -रोहित खजूरिया, क्रिकेट खिलाड़ी
  • मौलाना आजाद स्टेडियम गणतंत्र दिवस समारोह के आयोजन से पहले सुरक्षा की दृष्टि से मद्देनजर खिलाडिय़ों के लिए बंद है। ऐसे में युवाओं के लिए कोई मैदान न होने से स्थानीय युवा दरबदर हो रहें हैं। इलाके में नशे का प्रचलन बढ़ रहा है, अगर युवाओं के लिए खेल मैदान होंगे तो निसंदेह उनमें भटकाव नहीं होगा। - बलविंदर कुमार, स्थानीय युवक
  • स्वयं ही इलाके का दौरा कर स्टेडियम का जायजा लेंगे। जो भी संभव होगा, इसके निर्माण में सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। -सलीम उल रहमान, डायरेक्टर जनरल, यूथ सर्विसेज एंड स्पोर्ट्स 

Posted By: Rahul Sharma

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