संवाद सहयोगी,आरएसपुरा : आरएसपुरा में पशु चिकित्सा विज्ञान और पशुपालन संकाय की ओर से बुधवार को विश्व पशुजन्य रोग दिवस मनाया गया। स्कास्ट के कुलपति प्रो जेपी शर्मा ने उद्घाटन किया। कार्यक्रम राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना (एनएएचईपी) द्वारा प्रायोजित था, जो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) की विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित परियोजना है।

कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि जानवरों से मनुष्य में फैलने वाले सामान्य रोगों के बारे में जागरूक होना महत्वपूर्ण है। उन्होंने खाद्य जनित पशुजन्य रोगों को कम करने के लिए पशुओं की उचित देखभाल को जरूरी बताया। उन्होंने संक्षेप में तीन सामान्य पशुजन्य रोगों रेबीज, ब्रुसेलोसिस और तपेदिक पर चर्चा की। इन बीमारियों से संबंधित अपने अनुभवों और मिथकों को साझा किया। डीन प्रो एमएस भडवाल ने पशुजन्य रोगों और विश्व पशुजन्य रोग दिवस के महत्व के बारे में बात की।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में कुल संक्रामक रोगों में से 60 प्रतिशत और उभरती हुई बीमारियों में से 70 प्रतिशत प्रकृति में पशुजन्य रोग हैं। उन्होंने कहा कि विश्व पशुजन्य रोग दिवस फ्रांसीसी जीवविज्ञानी लुई पाश्चर की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने 6 जुलाई, 1885 को रेबीज के खिलाफ पहले टीके की पहली खुराक दी थी।

इससे पूर्व प्रोफेसर एमए मलिक, प्रमुख, पशु चिकित्सा सार्वजनिक स्वास्थ्य और महामारी विज्ञान ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया और सामान्य पशुजन्य रोगों, उनकी रोकथाम और उचित प्रबंधन पर एक व्याख्यान दिया। प्रो अनीश यादव, नेशनल फेलो, वेटरनरी पैरासिटोलाजी और डा. सबहत गजल, असिस्टेंट प्रोफेसर, वेटरनरी माइक्रोबायोलाजी ने परजीवी और वायु/ जल जनित पशुजन्य रोगों के बारे में बात की और अपशिष्ट प्रबंधन, उचित पशु देखभाल, उचित स्वच्छता बनाए रखने और जानवरों की सुरक्षा के लिए उचित उपायों पर जोर दिया। संचालन डा. अंकुर शर्मा ने किया। धन्यवाद डा. हर्ष शर्मा ने किया।