जम्मू, जागरण संवाददाता । फास्टैग, मकसद है सभी टोल प्लाजा पर वाहन चंद सेकेंडों में ही गुजर सकें ताकि समय और पैसे की बचत हो, लेकिन जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय पर बन टोल प्लाजा में मामला ही कुछ और है। यहां वाहन चालकों के लिए जाम आफत बन गया है। कारण फास्टैग और कैश के लिए बनी अलग अलग ट्यूब हैं। इसे लेकर चालक असमंजस में रहते है।

वाहन चालकों को यह नहीं मालूम पड़ता कि किस ट्यूब में फास्टैग वाले वाहन गुजरें और किस ट्यूब को कैश के लिए खोला गया है। इतना ही नहीं अधिकतर वाहन चालकों के पास फास्टैग की सुविधा नहीं है। जिस कारण कैश वाली ट्यूब से गुजरने वालों की लंबी कतारें लग जाती हैं। दिन में कई बार घंटों जाम लगा रहता है। सबसे ज्यादा जाम सरकारी दफ्तरों के खुलने और छुट्टी के समय लग रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि फास्ट टैग से कैश कलेक्शन वाली ट्यूब से गुजरने में कोई स्पष्टता नहीं होना भी जाम का बड़ा कारण है। हाईवे अथॉरिटी आफ इंडिया के क्षेत्रीय प्रबंधन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। ऊधमपुर में बैैंक में कार्यरत प्रदीप कुमार के अनुसार फास्टटैग लगाने से पहले बड़े-बड़े दावे किए गए कि इससे टोल पर चंद सेकेंड में गाड़ी रुकेगी। यहां तो कई दिन से जाम ने हलकान कर रखा है। ऊधमपुर से जम्मू आने वाले शिक्षक जो एक गु्रप में कार में आते हैं, के अनुसार टोल पर फास्टैग के बाद भी जाम प्रबंधन पर सवाल उठाता है। जल्दबाजी में फास्टैग लागू करने का हश्र साफ दिख रहा है। टोल प्लाजा में अव्यवस्था का आलम रहता है।

क्या है फास्टैग

फास्टैग एक स्टिकरनुमा डिवाइस है, जो रेडियो फ्रीकेंसी आइडेंटिफिकेशनतकनीक से काम करता है। फास्टैग लगी गाड़ी के टोल प्लाज से गुजरते ही रकम कस्टमर के खाते से एनएचआइ कंसेशनेयर के खाते में चली जाती है और ड्राइवर, ऑपरेटर या अन्य स्टेकहोल्डर को मैसेज भी मिल जाता है। 

Posted By: Rahul Sharma

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