जम्मू, राज्य ब्यूरो। आल पार्टिज माइग्रेंट कोआर्डिनेशन कमेटी (एपीएमसीसी) ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह कश्मीरी पंडितों के भविष्य को तय करने से पहले जमीनी स्तर पर काम कर रहे पंडित नेताओं के साथ चर्चा करें। यह बात उन्होंने केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी के साथ नई दिल्ली में मुलाकात के दौरान कही। एपीएमसीसी की ओर से चेयरमैन विनोद पंडित, किंग सी भारती, अवतार कृष्ण भट्ट, रंजन ज्योतशी मौजूद थे। उन्होंने कश्मीरी, हिन्दू विकास बोर्ड के गठन के लिए भी केंद्र सरकार से अनुरोध किया। इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय मंत्री को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन भी सौंपा।

एपीएमसीसी के प्रधान विनोद पंडित ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के साथ कश्मीरी पंडितों को पेश आ रही समस्याओं के प्रति अवगत कराया। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों के भविष्य को तय करने से पहले उनकी राय नहीं ली जाती है। इसीलिए उन्होंने इस बार केंद्रीय सरकार को पंडितों की राय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने मंत्री को जम्मू-कश्मीर के वर्तमान हालात के बारे में भी जानकारी दी। विनोद ने केंद्र सरकार से कश्मीरी पंडित वेलफेयर डेवलपमेंट बोर्ड के गठन की भी मांग की। इस बोर्ड में चेयरमैन भी कश्मीरी पंडित को बनाने के लिए कहा ताकि इस समुदाय की वर्षों पुरानी मांगों को पूरा किया जा सके।

एपीएमसीसी ने कश्मीर घाटी में गुरूद्वारा प्रबंधक बोर्ड की तर्ज पर मंदिर प्रबंधन बोर्ड की स्थापना करने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि मंदिरों पर लाया गया पहला बिल अब कोई भी मान्यता नहीं रखता है। इस कारण नया बोर्ड बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने गृह राज्यमंत्री के साथ केंद्रीय विद्यालय व्रगपोरा को बेसु में शिफ्ट करने, प्रधानमंत्री पैकेज, इंप्लाइज कालोनी के लिए भूमि ट्रांसफर करने, शारदापीठ मंदिर के लिए पारंपरिक मार्ग खोलने, कश्मीर घाटी में शारदापीठ यूनिवर्सिटी की स्थापना करने, विस्थापित युवाओं के लिए अतिरिक्त रोजगार पैकेज देने, सभी लंबित पड़े रोजगार पैकेजों को एक साल के भीतर लागू करने की भी मांग की।

मंत्री ने आश्वासन दिया कि उनकी सभी जायज मांगों को पूरा करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इंप्लाइज कालोनी के लिए जो जगह चिन्हित की गई है, उसकी प्रक्रिया जल्द ही पूरी कर दी जाएगी। यही नहीं भर्ती प्रक्रिया में भी तेजी लाई जाएगी। इसके लिए जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल को पहले से ही निर्देश जारी किए गए हैं।

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