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जम्मू में दीवाली से पहले ही हवा खराब, अस्थमा से लेकर दिल के मरीजों तक बढ़ सकती है परेशानी; डॉक्टर्स ने दी ये सलाह

Published: Sat, 07 Nov 2026 11:20 AM (IST)

जम्मू में दीवाली से पहले वायु गुणवत्ता सूचकांक बिगड़ने लगा है, जो सामान्य से अधिक है। डॉक्टरों ने प्रदूषण फैलाने ...और पढ़ें

दीवाली से पहले जम्मू की हवा हुई जहरीली।  (AI Generated)

दीवाली से पहले जम्मू की हवा हुई जहरीली।  (AI Generated)

HighLights

  1. जम्मू में दीवाली से पहले वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ा।

  2. डॉक्टरों ने प्रदूषणकारी पटाखों से परहेज की सलाह दी।

  3. अस्थमा और हृदय रोगियों के लिए प्रदूषण खतरनाक।

राज्य ब्यूरो, जम्मू। दीवाली पर होने वाली आतिशबाजी से दो दिन पहले ही जम्मू की हवा भी जहरीली होने लगी है। ऐसे में कई दिनों से चले आ रहे शूष्क मौसम में अगर अधिक आतिशबाजी होती है तो बहुत से लोगों की सेहत बिगड़ सकती है। इसके लिए यह जरूरी है कि प्रदूषण उत्पन्न करने वाले पटाकों को कम चलाएं। डाक्टरों के अनुसार, जरा सी भी लापरवाही आपकी खुशियों में ग्रहण लगा सकती है।

जम्मू का वायु गुणवत्ता सूचकांक शुक्रवार को 138 था, जो सामान्य से अधिक है। वायु गुणवत्ता सूचकांक एक ऐसा पैमाना है जो हवा की शुद्धता या प्रदूषण के स्तर को दर्शाता है। अगर पचास तक सूचकांक हो तो हवा साफ रहती है और इसमें किसी को भी कोई भी जोखिम नहीं होता।

50 से 100 तक के सूचकांक को भी संतोषजनक कहा जाता है, लेकिल इसके बाद की हवा बुजुर्गों और सांस संबंधी रोगों से पीड़ित मरीजों की समस्याओं के लिए परेशानी करती हैं।

पटाखों का धुआं अस्थमा मरीजों के लिए खतरनाक

चेस्ट डिजीज विशेषज्ञ डा. राजेश्वर शर्मा के अनुसार, अधिक प्रदूषण के कारण अस्थमा के मरीजों को सबसे अधिक परेशानी होती है। सांस की नलियों में सूजन के कारण अस्थमा का दौरा भी पड़ सकता है। ब्रोंकाइटिस के मरीजों को भी परेशानी होती है।

सांस की नलियों में जलन और फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित होने से पुरानी सांस की समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि कम आतिशबाजी करें। विशेषकर प्रदूषण करने वाले पटाखों से परहेज करें।

डॉक्टर ने दी ग्रीन दीवाली मनाने की सलाह

जीएमसी जम्मू में हृदय रोग विभाग के एचओडी डा. सुशील शर्मा ने भी लोगों से ग्रीन दीवाली मनाने की अपील की। उन्होंने पारंपरिक पटाखों से परहेज करने और पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने को कहा।

उन्होंने कहा कि पटाखों से निकलने वाली जहरीली गैसें, धुआं और बारीक प्रदूषित कण हवा की गुणवत्ता को अचानक खराब कर देते हैं, जिससे सांस और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

उन्होंने लोगों को पारंपरिक दीपक और दीये जलाकर त्योहार मनाने तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने की सलाह दी। यदि पटाखे जलाए भी जाएं तो निर्धारित उत्सर्जन मानकों का पालन करने वाले प्रमाणित ग्रीन पटाखों को प्राथमिकता देने को कहा।

दीवाली पर मिठाइयों से भी बरतें सावधानी

जीएमसी जम्मू में विशेषज्ञ डा. विशाल टंडन का कहना है कि प्रदूषण के कारण अांखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि सीओपीडी और अस्थमा के मरीजों को परेशानी आती है। अधिक जोर से आवाज करने वाले पटाके भी परेशान करते हैं।

उन्होंने कहा कि दीवाली मिठाइयों का त्यौहार है लेकिन मधुमेह या उच्च रक्तचाप के मरीजों को अधिक मीठा खाने से परहेज करना होगा। उन्होंने कहा कि पटाकों से जानवर और पक्षी भी प्रभावित होते हैं। दीवाली के बाद भी प्रदूषण का असर रहता है। ऐसे में सभी सावधानी से दीवाली मनाएं

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