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दिवाली पर मिठाई खरीदने से पहले सावधान, जम्मू में मिलावटी मावे की सप्लाई बढ़ी; डिटर्जेंट-यूरिया मिलाने का दावा

Published: Wed, 04 Nov 2026 02:57 PM (IST)

जम्मू में त्योहारी सीजन में दूध की भारी मांग और कम उत्पादन के कारण मिलावटी खोए का कारोबार बढ़ गया ...और पढ़ें

जम्मू के बाजारों में खप रहा मिलावटी मावा, सेहत पर मंडरा रहा खतरा।

जम्मू के बाजारों में खप रहा मिलावटी मावा, सेहत पर मंडरा रहा खतरा। 

HighLights

  1. त्योहारी मांग से दूध उत्पादन में भारी अंतर।

  2. रासायनिक घोल, डिटर्जेंट से बन रहा नकली खोआ।

  3. मिलावटी खोआ गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण।

अंचल सिंह, जम्मू। दीपावली के त्योहार पर मिठाई की मिठास कहीं आपकी सेहत न बिगाड़ दे। जम्मू संभाग में त्योहारी सीजन के दौरान दूध और खोए की मांग में अप्रत्याशित उछाल आया है, जबकि स्थानीय उत्पादन सीमित बना हुआ है। मांग और आपूर्ति के इसी अंतर का फायदा उठाकर मुनाफाखोर बाजार में धड़ल्ले से सिंथेटिक व मिलावटी खोआ खपा रहे हैं। जम्मू के प्रमुख बाजारों में पड़ोसी राज्यों से भारी मात्रा में संदिग्ध मावा पहुंच रहा है जो सीधे तौर पर आम जनमानस के स्वास्थ्य पर प्रहार कर रहा है।

सामान्य दिनों में जम्मू संभाग में दूध की दैनिक खपत करीब 4.5 से 5 लाख लीटर के आसपास रहती है, जबकि स्थानीय उत्पादन लगभग 3.5 से 3.8 लाख लीटर तक ही सीमित है। बाकी कमी सामान्य दिनों में पैकेज्ड दूध से पूरी होती है। त्योहारी सप्ताह में यह समीकरण पूरी तरह बिगड़ जाता है।

वर्ष 2024 में दीपावली के दौरान मांग बढ़कर 7.5 से 8 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गई थी, जबकि स्थानीय उत्पादन 4 लाख लीटर के आसपास ही रहा। वर्ष 2025 में यह अंतर और बढ़ गया, जब मांग 8.5 लाख लीटर प्रतिदिन से ऊपर निकल गई और स्थानीय आपूर्ति मात्र 4.2 लाख लीटर रही।

वर्ष 2026 में मांग 9 लाख लीटर प्रतिदिन के पार जाने का अनुमान है। एक किलो शुद्ध खोआ तैयार करने के लिए कम से कम चार से पांच लीटर फुल-क्रीम दूध की जरूरत पड़ती है। दूध की कमी और भारी मांग के चलते असली खोए की जगह मिलावटी विकल्प बाजार में धकेले जा रहे हैं।

रासायनिक घोल और घटिया सामग्री से निर्माण

मुनाफाखोर असली दूध की जगह रासायनिक और सिंथेटिक चीजों का इस्तेमाल कर नकली खोआ तैयार करते हैं। दूध का गाढ़ापन और झाग बढ़ाने के लिए घटिया स्तर का डिटर्जेंट और कास्टिक सोडा मिलाया जाता है। फैट की मात्रा कृत्रिम रूप से दिखाने के लिए सस्ता पाम आयल, घटिया रिफाइंड तेल और यूरिया का घोल तैयार किया जाता है।

इसके अलावा मावे का वजन बढ़ाने और उसे असली जैसा रूप देने के लिए स्टार्च, उबले आलू, ब्लाटिंग पेपर और चाक पाउडर तक की मिलावट की जाती है।

मानव अंगों और पाचन तंत्र पर गंभीर प्रहार

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह मिलावट पेट खराब होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धीरे-धीरे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाती है। दूषित खोए के सेवन से फूड पाइजनिंग, उल्टी, दस्त, पेट में गंभीर संक्रमण और आंतों में अल्सर की समस्या पैदा होती है। डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा और यूरिया जैसे रसायन लिवर के ऊतकों को नष्ट करते हैं और गुर्दे फेल होने का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं। 

घटिया हाइड्रोजनीकृत तेल और रासायनिक तत्वों का नियमित उपभोग शरीर में खराब कोलेस्ट्राल बढ़ाकर दिल के दौरे का कारण बनता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें इस्तेमाल किए गए कुछ अखाद्य रंग और केमिकल कैंसर कारक भी साबित हो सकते हैं।

उपभोक्ताओं में संशय और स्थानीय व्यापारियों की चिंता

गांधी नगर निवासी विजय चौधरी ने कहा कि त्योहारों पर बिना मिठाई के काम नहीं चलता, लेकिन अब बाजार से मावे की बर्फी या गुलाब जामुन खरीदने में डर लगता है। पिछले साल त्योहार के ठीक बाद घर के दो सदस्य फूड पाइजनिंग का शिकार हो गए थे, इसलिए प्रशासन को अंतरराज्यीय नाकों पर ही कड़ी चेकिंग करनी चाहिए।

वहीं वरिष्ठ दुकानदार दर्शन शर्मा ने बताया कि वे पीढ़ियों से शुद्ध खोए से मिठाइयां बनाते हैं, लेकिन बाहरी राज्यों से आने वाले सस्ते और मिलावटी मावे की वजह से ईमानदार व्यापारियों की साख पर भी असर पड़ता है। प्रशासन को बाहर से आने वाली गाड़ियों की सख्त सैंपलिंग करनी चाहिए।

प्रवेश द्वारों पर निगरानी और विभाग की कार्रवाई

डिप्टी कमिश्नर फूड रफी अहमद डार ने बताया कि त्योहारी सीजन को देखते हुए विभाग पूरी तरह सतर्क है। लखनपुर बार्डर और जम्मू रेलवे स्टेशन सहित शहर के प्रमुख प्रवेश द्वारों पर निगरानी रखी जा रही है। शहर की मिठाई्र की दुकानों, गोदामों से लगातार रैंडम सैंपल लिए जा रहे हैं। मौके पर भी प्राथमिक जांच की जा रही है और मिलावटी खाद्य सामग्री बेचने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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