जम्मू, सुरेंद्र सिंह। कहते हैं न कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती। समर्पण, मेहनत और लगन से मंजिल को पाया जा सकता है। इस बात को सही साबित कर रहे हैं जम्मू के युवा रंगकर्मी और अब निर्देशन के क्षेत्र में उभरते सितारे आदित्य भानु। मात्र दो वर्ष में ही तीन शार्ट आैर एक बड़ी फीचर फिल्म बनाकर उन्होंने अपनी पहचान बना ली है। भानु की तीन शार्ट फिल्में जम्मू, लुधियाना और जयपुर फिल्म फेस्टिवलों में प्रदर्शित हो चुकी हैं। उन्हें वहां पर खूब पसंद भी किया गया। भानु अब अगले दो वर्षों में दो और फिल्में लेकर दर्शकों के बीच आने वाले हैं। वह उन फिल्मों की स्टोरी और कास्ट पर काम कर रहे हैं। अपने सफर के बारे में भानु ने दैनिक जागरण के साथ विशेष बातचीत की और अपने उपलब्धियों बारे बताया।

1999 से शुरू हुआ अभिनय का सफर

आदित्य भानु के अभिनय का सफर वर्ष 1999 में हुआ जब उन्होंने जम्मू के युवा रंगकर्मी संजय कपिल के निर्देशन में पहला नाटक राक्षस खेला। भानु का कहना है कि उस समय मुझे रंगमंच या अभिनय बारे ज्यादा जानकारी नहीं थी। आयु भी छाेटी थी लेकिन नाटक में काम करना अच्छा लगा। इसके बाद उन्हें वर्ष 2000 में जम्मू दूरदर्शन के लिए बन रहे धारावाहिक कुंजु-चैंचलों में काम करने का मौका मिला। यह मेरे लिए किसी सपने के सच होने से कम नहीं था। उस धारावाहिक में मुझे मुख्य किरदार कुंजु के बचपने का रोल मिला जो मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी। उस रोल को मैंने खूब अच्छे से निभाया तो मुझे हर तरफ से वाहवाही मिले। इससे मुझे प्रेरणा मिली आैर मैंने इस क्षेत्र में ही अपनी पहचान बनाने का फैसला कर लिया। कुंजु-चैंचलों से मुझे कैमरे बारे कुछ जानकारी मिली जो आगे चलकर मेरे लिए काफी मददगार साबित हुई।

2018 तक किया कई नाटकों में अभिनय और निर्देशन

फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में आने से पहले भानु ने लगभग पंद्रह वर्ष तक कई नाटकों में बतौर कलाकार और निर्देशन काम किया। भानु ने इस दौरान बादल सरकार के नाटक सारी रात के अलावा अपने लिखे नाटक अपना अपना अहसास, थर्टी डेज इन सितंबर, कैकटस मुझे अमृता चाहिए, चुपकर आदि नाटकों का निर्देशन किया और उनमें अभिनय भी किया। अपने रंगमंच के क्षेत्र में भानु अभिनय और निर्देशन के क्षेत्र में कई पुरस्कार भी हासिल कर चुके हैं। भानु का कहना है कि उन्होंने अधिकतर उन नाटकों का चयन किया है जो समाज में कोई संदेश देते हों। थर्टी डेज इन सितंबर में उन्होंने बच्चियों के यौन शोषण का मुद्दा उठाया। इसके अलावा वह नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से भी कई सामाजिक मुद्दों को उठा चुके हैं।

शार्ट फिल्में भी सामाजिक मुद्दों से जुड़ी

भानु के निर्देशन में बनी तीनों शार्ट मूवीज भी सामजिक मुद्दों को लेकर बनी हैं। भानु की एक रुकी जुस्तजु फिल्म उन माता-पिता पर अाधारित है जिनके बच्चे उन्हें छोड़कर चले गए हैं। आखिर कब तक रसानाकांड को लेकर बनाई गई मूवी है जिसे लुधियाना और जयपुर फिल्म फेस्टिवल में काफी पसंद किया गया जबकि उनकी एक और शार्ट मूवी आइना समाज का बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश देती है और आज समाज में बेटियों को सिर उठाकर चलने के लिए प्रेरित करती है। भानु का कहना है कि उन्हें खुशी है कि उनकी बनाई फिल्मों को लोग पसंद कर रहे हैं। उनकी डोगरी फीचर फिल्म आऊं का शिंदा बनकर तैयार है। दो महीने बाद यह फिल्म थियेटर में प्रदर्शित होगी। इस फिल्म के प्रोमोशन का काम चल रहा है और इसके टीजर्स लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं। भानु को उम्मीद है कि उनकी फिल्म अच्छा कारोबार करेगी। उन्होंने यह फिल्म पूरी तरह से कमर्शियल फिल्म हैं।

Posted By: Rahul Sharma

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