संवाद सहयोगी, रामगढ़ : तीसरे चरण के निकाय चुनाव के लिए नामांकन पत्र भरने का समय शनिवार को खत्म हो गया। रामगढ़ नगरपालिका के 13 वार्डो से आखिरी दिन दो भाजपा तथा तीन निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपने पर्चे दायर किए। भाजपा की तरफ से वार्ड नंबर एक से बबली देवी तथा वार्ड नंबर-13 से दिलावर ¨सह ने नामांकन भरा। वहीं निर्दलीय उम्मीदवार नीलम कुमारी ने वार्ड नंबर-चार, पूरन चंद भगत ने वार्ड नंबर पांच और मदन लाल ने वार्ड नंबर-नौ से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र दायर किया। रामगढ़ के 13 पार्षद पदों के लिए कुल 41 उम्मीदवार चुनाव अखाड़े में उतरे हैं। इनमें 13 उम्मीदवार भाजपा, 12 कांग्रेस और 16 निर्दलीय उम्मीदवार हैं। तीसरे चरण के निकाय चुनाव के लिए नामांकन भरने वाले प्रत्याशी तीन अक्टूबर तक नाम वापस ले सकते हैं। चुनाव अधिकारी प्रत्याशियों के दस्तावेजों की जांच कर औपचारिकताओं को पूरा कर रहे हैं। उक्त 41 उम्मीदवारों को 13 अक्तूबर को नगरपालिका के 4596 मतदाता भाग्य तय करेंगे। नामांकन पत्र भरने के बाद प्रत्याशी अब चुनाव प्रचार में जुट गए हैं। वार्ड नंबर-13 में सगे भाइयों में चुनावी जंग

संवाद सहयोगी, रामगढ़ : नगरपालिका रामगढ़ के वार्ड नंबर-13 से दो सगे भाई चुनाव जंग लड़ने जा रहे हैं। दो उम्मीदवारों के बीच होने वाली चुनावी जंग क्षेत्र में चर्चा की विषय बनी हुई है। वार्ड नंबर-13 से बड़े भाई दिलावर ¨सह ने जहां भाजपा उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं तो वहीं दिलवार सिंह के छोटे भाई मखन ¨सह बतौर आजाद उम्मीदवार उनको टक्कर देने की तैयारी में हैं। दोनों भाइयों के बीच होने वाली इस चुनावी जंग के बाद किसके सिर जीत का ताज सजता है यह तो चुनाव परिणाम के बाद ही पता चलेगा। हालांकि अभी तीन अक्तूबर तक नाम वापस लेने का समय है, लेकिन जिस तरह से दोनों भाइयों ने एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी ताल ठोकी है, वह काफी रोमांचक प्रतीत हो रही है। लोग चर्चा कर रहे हैं कि अक्सर परिवारिक के संपति के लिए भाइयों में संघर्ष होता देखा है, लेकिन राजनीति में भी अब चुनाव संघर्ष शुरू होता दिख रहा है। लोगों का कहना है कि राजनीति में किसी एक उम्मीदवार की ही जीत होगी, लेकिन हार जीत के बाद परिवार के रिश्तों पर कैसा असर पडे़गा, यह तो भविष्य ही तय करेगा। परिवारों में रार न बन जाए चुनाव

क्षेत्र के लोग बताते हैं कि अगर पूर्व के चुनावों पर नजर दौड़ाएं तो चुनावों के कारण कई परिवारों के आपसी संबंध भी बिगड़ गए हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2011 में हुए पंचायत चुनाव में सीमांत क्षेत्र की जिन पंचायतों में पारिवारिक सदस्यों में पंचायत का प्रतिनिधि बनने के लिए जंग हुई थी, उन परिवारों के रिश्तों में दरार आ चुकी है। आज तक उन परिवारों में आपसी भाईचारा और एकता कायम नहीं हो पाया है। ऐसे में नगरपालिका चुनाव में दो भाईयों के एक ही वार्ड से एक दूसरे के खिलाफ उतरने से चर्चा की माहौल बना हुआ है। बरहाल नामांकन पत्र भरने के बाद दोनों भाइयों के समर्थक अपना-अपना पक्ष मजबूत करने में जुट गए हैं।

Posted By: Jagran

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