श्रीनगर, राज्य ब्यूरो : लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों का करीबी और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ का लाडला व पत्थरबाजों का पोस्टर ब्वाय मसर्रत आलम हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी गुट का चेयरमैन चुन लिया गया। हुर्रियत कांफ्रेंस में शामिल विभिन्न अलगाववादी दलों ने उसे अपना नया चेयरमैन चुना है। इसके साथ ही दिवंगत हुर्रियत के कट्टरपंथी नेता सैयद अली शाह गिलानी के सियासी उत्तराधिकारी को लेकर जारी अटकलें भी समाप्त हो गईं।

श्रीनगर के जैनदार मोहल्ले का रहने वाला मसर्रत आलम फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है। वह भले ही गिलानी के खास लोगों में एक रहा है, लेकिन दिवंगत कट्टरपंथी ने कभी भी उसे अपने सियासी उत्तराधिकारी के रूप में आगे नहीं बढ़ाया था। गिलानी की ख्वाहिश थी कि गुलाम कश्मीर में बैठे उनके करीबी सैयद अब्दुल्ला गिलानी को ही हुर्रियत की अगली कमान दी जाए। गिलानी का परिवार भी सैयद अब्दुल्ला गिलानी के पक्ष में ही था, लेकिन हुर्रियत के घटक दल मसर्रत आलम के साथ खड़े थे।

लालचौक स्थित कश्मीर के प्रतिष्ठित मिशनरी स्कूल का छात्र मसर्रत मुस्लिम लीग का चेयरमैन है। वह 1990 में पहली बार राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में पकड़ा गया था। वह कुल मिलाकर 25 साल से अधिक समय जेल में बिता चुका है और अभी तिहाड़ जेल में बंद है। उसे अप्रैल, 2015 में कट्टरपंथी नेता गिलानी के दिल्ली से कश्मीर पहुंचने पर देश विरोधी रैली निकालने पर गिरफ्तार किया गया था।

आतंकी संगठनों से गठजोड़: अलगाववादियों, आइएसआइ और आतंकी संगठनों से मसर्रत के गहरे नापाक गठजोड़ हैं। वर्ष 2007 में जब कश्मीर में अलगाववाद थमने लगा था, तब उसने दूसरे गुट की हुर्रियत के मीरवाइज मौलवी उमर फारुक को चुनौती देते हुए रैली निकाली थी। इसके बाद मसर्रत पकड़ा गया। मार्च 2008 में रिहा हुआ तो उसने फिर देश के खिलाफ साजिश रची। वह समय श्री अमरनाथ भूमि आंदोलन का था। उसके गिरफ्तार होने के बाद ही वर्ष 2010 में हिंसक प्रदर्शन थमे थे।

सल्लाहुदीन को दी चुनौती, पाक भागना चाहता था : एक समय मसर्रत हिजबुल मुजाहिदीन के चीफ कमांडर मोहम्मद यूसुफ उर्फ सल्लाहुदीन को खुलेआम चुनौती देता था। 2008 के हिंसक प्रदर्शनों के दौरान उसने सल्लाहुदीन के पोस्टर जलाए थे। इसी दौरान यह भी खबर उड़ी थी कि उसे पाकिस्तान बुलाया जा रहा है ताकि आइएसआइ उसे कोई बड़ी साजिश का काम दे सके। इससे पहले कि वह पाकिस्तान भागता, पुलिस ने उसे पकड़ लिया था।

15 माह से खाली थी हुर्रियत की कुर्सी : कट्टरपंथी हुर्रियत कांफ्रेंस के चेयरमैन का पद जून, 2020 में सैयद अली शाह गिलानी द्वारा खुद को हुर्रियत से अलग करने और चेयरमैन पद से इस्तीफा देने के बाद से खाली पड़ा था। हुर्रियत के विभिन्न घटक चेयरमैन की नियुक्ति उसी समय करना चाहते थे, लेकिन आइएसआइ की हरी झंडी नहीं मिलने के कारण ऐसा नहीं हो पाया था। गिलानी का निधन पहली सितंबर, 2021 को हुआ है।

कश्मीरी पत्थरबाजों का नक्सल कनेक्शन में भी मसर्रत का नाम : कश्मीरी पत्थरबाजों और अलगाववादियों का नक्सली कनेेक्शन भी मसर्रत आलम के कारण ही सामने आया था। 2010 में हुए हिंसक प्रदर्शनों के दौरान मसर्रत ने जो पोस्टर बांटे थे, उनमें इस्तेमाल फांट वही था जो नक्सल नेता किशन जी द्वारा बांट गए पोस्टरों में इस्तेमाल किया गया था। दोनों के लिए इस्तेमाल प्रिंटर भी एक ही था। 

Edited By: Rahul Sharma