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आरएसपुरा, दलजीत सिंह। एक तरफ सरकार उपजिला आरएसपुरा की बासमती को बढ़ावा देने के लिए लाखों रुपये खर्च कर रही है, तो दूसरी तरफ बासमती बेल्ट में राजस्व विभाग की मिलीभगत से धड़ल्ले से कृषि भूमि को बेचा जा रहा है। आरएसपुरा के कई इलाकों में जिस जमीन पर कभी बासमती की फसल लहलहाती थी, उसे मानकों को ताक पर रखकर प्लाट काट कर बेचा जा रहा है। कई इलाकों में इन प्लाटों पर अवैध रूप से कॉलोनियां बनाई जा रही हैं। ऐसे में सरकार की बासमती धान के उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

गौरतलब है कि सरकार ने उपजिला आरएसपुरा को बासमती जोन घोषित किया हुआ है। बासमती धान के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार करोड़ों रुपये भी खर्च कर रही है। इसके बावजूद जिस तरह से बासमती जोन में कृषि भूमि को बेचा जा रहा है, उससे कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि सरकार बासमती धान का उत्पादन बढ़ाने को लेकर वाकई गंभीर है, तो यह कैसे संभव है कि बिना उसकी जानकारी के बड़े पैमाने पर कृषि भूमि पर कालोनियां बनाई जा रही हैं।

राजस्व विभाग के अधिकारी हैं जिम्मेदार

स्थानीय लोगों इसके लिए राजस्व विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदार मानते हैं। उनका कहना है कि बिना उनकी मिलीभगत के कॉलोनियां खड़ी करने के लिए प्लाट नहीं काटे जा सकते हैं। बासमती कृषि भूमि की अवैध बिक्री के खिलाफ एक स्थानीय वकील रंजीत सिंह ने जनहित याचिका दायर की है। रंजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने कोर्ट के माध्यम से सरकार को जगाने का प्रयास किया है। कोर्ट ने इस संबंध में राजस्व विभाग सहित प्रशासनिक अधिकारियों को भी नोटिस जारी किए हैं। इसके बावजूद कृषि भूमि की धड़ल्ले से बिक्री जारी है। हालत यह है कि इस धंधे की वजह से कई प्रापर्टी डीलर करोड़पति बन गए। यदि इस मामले की जांच की जाए तो कई अधिकारी चपेट में आएंगे।

क्या कहते हैं अधिकारी

इस मामले में दोनों तहसीलदारों सहित पटवारियों और नायब तहसीलदारों को नोटिस जारी किया गया है। उन्हें कृषि भूमि की अवैध बिक्री को तुरंत रोकने के लिए कदम उठाने को कहा गया है। इसके बावजूद भी यदि इस पर लगाम नहीं लगती है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मामले को हल्के में कदापि नहीं लिया जा रहा है। - जगदीश सिंह, एसडीएम आरएसपुरा

 

Posted By: Rahul Sharma

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