जम्मू, विवेक सिंह।  जम्मू कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद इस ओर खून बहाने के लिए पहले से भी अधिक छटपटाए पाकिस्तान ने सीमा पर संघर्ष विराम के 16वें साल में गोलाबारी के सारी हदें पार कर दी। सोमवार को जम्मू कश्मीर में संघर्ष विराम की औपचारिकता के 16 साल पूरे हो गए। भारत कई बार पाकिस्तान को आगाह कर चुका है कि वह संघर्ष विराम का पालन करे। अशांति में विश्वास रखने वाले पाकिस्तान को हालात बेहतरी के लिए यह पेशकश मंजूर नहीं है।

आतंकवाद व अलगाववाद को शह देने वालों पर जम्मू कश्मीर में कड़ी कार्रवाई होते देखे तड़प उठे पाकिस्तान ने सीमा पर लोगों व सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाने के लिए और भी तेजी से प्रहार किए। यह और बात है कि हर बार उसे मुंह की खानी पड़ी। इस साल पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर में अब तक ढ़ाई हजार से भी अधिक बार गोलाबारी कर लोगों को निशाना बनाने व आतंकियों की घुसपैठ करवाने की कोशिशें की। गत वर्ष पाकिस्तान की ओर से पूरे साल में गोलाबारी के 1629 मामले हुए थे।

इस वर्ष के 11वें महीने में ही यह आंकड़ा 2500 से उपर पार कर चुका है। एक दिन में दुश्मन की ओर से रिकॉर्ड 39 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया गया। पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन के बाद इस महीने पाकिस्तान ने 307 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया। इस दौरान कड़ी जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के तीस से अधिक सैनिक मारे गए। सीमा पार कई लोगों की भी जान गई। ऐसे हालात में सीमा पर संघर्ष विराम के 16 वर्षो में सीमांत वासियों, सरहद के रखवालों को पाकिस्तान की ओर से खूब जख्म मिले।

पाकिस्तान की गोलाबारी व उसकी शह पर आतंकी हमले में जम्मू कश्मीर में 122 लोगों की मौत हुई। इनमें से 82 सुरक्षाकर्मी शामिल थे। कश्मीर में हालात बिगाड़ने को आतंकियों की घुसपैठ करवाने के लिए पाकिस्तान ने नित नए तरीके तलाश कर सीमा पर संघर्ष विराम को औपचारिकता बना दिया। पाकिस्तान की तोपें, बंदूकें अकारण आग उगलती रही और इसका संताप आज भी राज्य के विभिन्न जिलों में सीमांत क्षेत्रों में बसे हजारों परिवार भुगत रहे हैं।

सोमवार को इस संघर्ष विराम के 16 साल पूरे हो गए। दोनों देशों में 25 नंवबर 2003 की मध्यरात्रि को सीजफायर हुआ था, लेकिन इसकी आड़ में पाकिस्तान ने लगातार घुसपैठ करवाने की कोशिशें कीं। कई बार आतंकवादी सीमांत क्षेत्रों में घुस आए और दहशत फैलाने के लिए खून की होली खेलकर जनजीवन को अस्त व्यस्त किया। आतंकवाद को शह देने के लिए पाकिस्तान ने कभी भी संघर्ष विराम के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई। ऐसे में केंद्र सरकार के पास लोगों को गोलाबारी से बचाने की दिशा में कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इस समय जम्मू कश्मीर में सीमांत वासियों को गोलाबारी से बचाने के लिए 15 हजार बंकर बनाने का काम चल रहा है। लोगों का जानी दुश्मन बना पाकिस्तान संघर्ष विराम के 16 सालों में पाकिस्तान ने साबित कर दिया कि वह जम्मू कश्मीर के लोगों का जानी दुश्मन है।

पाकिस्तान ने सबसे अधिक गोलाबारी उन्हीं इलाकों में की जहां अधिक लोग बसते हैं। जम्मू संभाग के अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ पाकिस्तान ने राजौरी, पुंछ जिलों के साथ कश्मीर कुपवाड़ा व बारामुला में नियंत्रण रेखा पर बसे लोगों का खून बहाने के लिए भी कोई मौका नहीं गंवाया। सीमा पर रहने वाले देशभक्त लोगों को पाकिस्तान अपना दुश्मन मानता है। दूसरी ओर लद्दाख के सियाचिन ग्लेशियर में कोई आबादी न होने के कारण वहां पर पाकिस्तान ने नवंबर 2003 के बाद अब तक एक बार भी संघर्ष विराम का उल्लंघन नहीं किया। वहां पर पिछले 16 सालों में एक भी गोली नहीं चली। सियाचिन में पाकिस्तान, भारतीय सेना से तीन हजार फीट नीचे है। ऐसे में वहां पर गोलाबारी करने की स्थिति में पाकिस्तान का भारी नुकसान तय है। सियाचिन में पाकिस्तान की खामोशी उसके दोगलेपन का सुबूत भी है। 

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