राज्य ब्यूरो, जम्मू : जम्मू संभाग में 1404 लेक्चरार ऐसे हैं जो पिछले तीन साल से अधिक समय से एक ही स्कूल में जमे हैं। कुछ तो ऐसे हैं जिन्हें सात से आठ साल हो गए हैं। यहां तक कि राज्यपाल के सलाहकार की सिफारिश पर भी 80 तबादले हुए हैं। इसका खुलासा जम्मू कश्मीर सूचना अधिकार कानून 2009 के तहत प्राप्त जानकारी से हुआ है।

नेशनल सेक्युलर फोरम के प्रधान डॉ. विकास शर्मा द्वारा मांगी गई सूचना में स्कूल शिक्षा विभाग ने यह भी कहा है कि मेडिकल कॉलेज बोर्ड ने किसी भी मामले को प्रमाणित नहीं किया है। राज्यपाल के सलाहकार की सिफारिश पर 80 अध्यापकों के तबादले किए गए हैं। विभाग के अनुसार अक्टूबर 2018 से अब तक 150 लेक्चरारों के तबादले किए गए हैं। इन सभी में कारण प्रशासन का हित दिखाया गया है। कितने लेक्चरारों, मास्टरों, अध्यापकों के तबादले मेडिकल आधार पर किए गए और क्या इसके लिए मेडिकल कॉलेज बोर्ड ने मंजूरी दी, इसके जवाब में विभाग ने कहा कि किसी भी मामले को मेडिकल कॉलेज बोर्ड ने तबादलों के लिए प्रमाणित नहीं किया।

बीमारियां से संबंधित सूचना देने पर स्कूल शिक्षा विभाग ने इसे संबंधित मुख्य शिक्षा अधिकारी से संबंधित बता दिया। विभाग ने जवाब में यह भी कहा कि अंतिम बार फरवरी 2019 में लेक्चरारों, मास्टरों, अध्यापकों के तबादले किए गए थे। मेडिकल आधार पर तबादलों के लिए 44 लेक्चरारों ने आवेदन किया है।

बताते चलें कि स्कूल शिक्षा विभाग पर तबादलों, अटैचमेंट के मामलों में नियमों की अनदेखी के आरोप लगते रहे हैं। अभी हाल ही में जम्मू के मुख्य शिक्षा अधिकारी ने बड़े पैमाने पर किए तबादलों के आदेश को स्कूल शिक्षा विभाग ने रोक दिया था। जब जम्मू कश्मीर में निवार्चित सरकारें थीं तो उस समय स्कूल शिक्षा विभाग में तबादलों को लेकर राजनीतिज्ञों का काफी हस्तक्षेप रहता था।

प्रभावशाली अध्यापक कभी शहर से बाहर ही नहीं गए

पूर्व नेकां-कांग्रेस गठबंधन सरकार के समय में छह महीने में स्कूल शिक्षा विभाग के चार डायरेक्टरों का तबादला किया गया था। प्रभावशाली अध्यापक ऐसे भी हैं जो कभी शहर से बाहर गए ही नहीं, एक ही स्कूल में दस साल से अधिक का समय बिता दिया। कई को अगर दूरदराज या ग्रामीण इलाकों में लगाया गया तो वहां पर ही कई वर्ष तक रहे। जब जम्मू कश्मीर में पूर्व पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार के गिरने के बाद जब राज्यपाल शासन लगा था तो उस समय दो हजार से अधिक अटैचमेंट को समाप्त कर दिया गया। कई अध्यापक सीईओ, जेडईओ, स्कूल शिक्षा विभाग समेत अन्य सेक्शनों में अटैच रहे। समय समय पर अटैचमेंट समाप्त की जाती रही है लेकिन फिर से यह सिलसिला जारी हो जाता है।

 

Posted By: Rahul Sharma

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