जागरण संवाददाता, जम्मू : राज्य में संस्कृत के साथ हो रहे भेदभाव पर रोष जताते हुए सोमवार को बाबा कैलख देव स्थान पर एक दिवसीय संस्कृत सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान संस्कृत स्कॉलरों ने अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों को रखते हुए कहा कि यदि संस्कृत के साथ यही भेदभाव किया गया तो वे इस भाषा में पढ़ाई जारी नहीं रख पाएंगे। कई शोधकर्ताओं ने यहां तक कहा कि उन्हें इस भाषा के माध्यम से सरकारी नौकरी में उनका हक नहीं दिया जा रहा है।

बाबा कैलख देव स्थान के महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि राज्य सरकार राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान मानित विश्वविद्यालय कोट भलवाल की डिग्रियों को मान्यता नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय से मान्यता प्राप्त यह विश्वविद्यालय पिछले कई वर्षो से राज्य में चल रहा है। यूजीसी के दिशानिर्देशों का पालन करने वाले इस विश्वविद्यालय की चांसलर स्वयं मानव संसाधन विकास केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी हैं। संस्कृत स्कॉलरों ने राज्य सरकार के इस रवैये पर रोष जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री पुरस्कार से सम्मानित प्रो. विश्वमूर्ति शास्त्री को इस संबंध में ज्ञापन सौंपते हुए उच्च स्तर पर इस संबंध में बातचीत करने के लिए निवेदन किया, ताकि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो। उन्होंने कहा कि संस्कृत के साथ राज्य सरकार का यह भेदभाव संस्कृत छात्रों में विरोध की भावना उजागर कर रही है। सम्मेलन के दौरान विश्व हिंदू परिषद के राज्य महासचिव शक्ति दत्त शर्मा सहित डॉ. चंद्रमोली रैणा, भूपेंद्र शास्त्री, राम पाल सेठ, डॉ. प्रकाश, डॉ. अमन, तिलक राज, अजय भारती सहित अन्यों ने भी विचार रखे।