जम्मू, राज्य ब्यूरो : जम्मू कश्मीर में स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। आजादी का अमृत महोत्सव में कश्मीर के गुलमर्ग और श्रीनगर के हरी पर्वत में फहराने वाले 100 फीट ऊंचे तिरंगे स्वतंत्रता दिवस की शान शान बढ़ाएंगे।

सेना ने स्वतंत्रता दिवस को यादगार बनाने के लिए कश्मीर के गुलमर्ग में 100 फीट का राष्ट्रीय ध्वज फहराने की तैयारी कर ली है। इसके लिए बुनियादी ढांचा तैयार हो गया है। वहीं जम्मू कश्मीर सरकार की ओर से श्रीनगर के हरी पर्वत फोर्ट में 100 फीट का तिरंगा फहराने की तैयारी है। इस बार भाजपा व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने भी कश्मीर में बड़े पैमाने पर तिरंगे फहराने के लिए तैयारियों कर रखी हैं। वहीं प्रशासन भी पूरी कोशिश कर रहा है कि इस बार कश्मीर में पंचायत स्तर पर तिरंगे फहराए जाएं व इन कार्यक्रमों में लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा लें।

ध्वज को फहराने के निर्देशों का सख्ती से पालन हों : मंडला आयुक्त कश्मीर ने सभी जिला उपायुक्तों व विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि राष्ट्रीय ध्वज को फहराने संबंधी दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए। उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि कहीं भी देश के फ्लैग कोड का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। इस बार डल झील के पास स्थित हरी पर्वत के साथ कश्मीर में जिला स्तर पर भी तिरंगे फहराने के कार्यक्रमों की तैयारी है। 

खून जमाने वाली ठंड में बाना पोस्ट पहुंच शहीदों को दी श्रद्धांजलि: वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के स्वर्णिम विजय वर्ष में सेना की विजय मशाल ने विश्व के सबसे ऊंचे युद्ध स्थल सियाचिन ग्लेशियर में पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। मंगलवार को विजय मशाल 22000 फीट की ऊंचाई पर बाना पोस्ट पर पहुंची तो वहां तैनात जवानों का उत्साह सातवें आसमान पर पहुंच गया। वर्ष 1987 में दुर्गम हालात में इस पोस्ट को जीतने के लिए असाधारण बहादुरी का परिचय देते हुए कैप्टन बाना सिंह ने परमवीर चक्र पद हासिल किया था। सियाचिन में खून जमाने वाली ठंड में तैनात जवानों के लिए उत्साह लेकर पहुंची विजय मशाल को इंदिरा कोल इलाके में ले जाया गया। यह जानकारी देते हुए श्रीनगर के पीआरओ डिफेंस लेफ्टिनेंट कर्नल एमरान मुसावी ने जागरण को बताया कि सियाचिन के इस उत्तरी इलाके में सेना के जवानों ने विजय मशाल को सलामी देकर देशवासियों को विश्वास दिलाया कि वे देश की रक्षा करने के लिए किसी भी प्रकार की कुर्बानी देने के लिए हरदम तैयार रहेंगे। सियाचिन ग्लेशियर में खून जमाने वाली ठंड में सेना के जवान पाकिस्तान की साजिशों को नाकाम बनाने के लिए डटे हुए हैं।सेना की विजय मशाल करीब एक सप्ताह पहले कश्मीर से लद्दाख पहुंची थी।

Edited By: Rahul Sharma