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कुश्ती छोड़ थामी थी हॉकी स्टिक: दीपिका सहरावत ने रचा इतिहास, भारत ने थाईलैंड को 20-1 से रौंदा

Published: Wed, 23 Sep 2026 02:33 PM (IST)

थाईलैंड को 20-1 से हराने के बाद भारत ने एशियाई खेल 2026 में महिला हॉकी में अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा।

भारतीय महिला हॉकी टीम।

भारतीय महिला हॉकी टीम।

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स्‍पोर्ट्स डेस्‍क, नई दिल्‍ली। गिफू प्रीफेक्चरल ग्रीन स्टेडियम में पूल-बी के मैच में बुधवार को थाईलैंड को 20-1 से हराने के बाद भारत ने एशियाई खेल 2026 में महिला हॉकी में अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा। इससे पहले भारतीय महिला हॉकी टीम ने उज्‍बेकिस्तान और इंडोनेशिया को क्रमशः 19-0 और 17-1 से मात दी थी।

ड्रैग-फ्लिक स्पेशलिस्ट और फॉरवर्ड दीपिका सहरावत ने थाईलैंड के खिलाफ नौ गोल किए। ये सभी गोल पेनल्टी कॉर्नर से हुए। नवनीत कौर ने चार गोल किए, रुतुजा पिसल ने हैट्रिक लगाई, जबकि नेहा, लालरेम्सियामी, साक्षी राणा और कप्तान सलीमा टेटे ने भी गोल किए।

दीपिका सहरावत ने एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए 3 मैचों में पहले ही 20 गोल कर लिए हैं। थाईलैंड के खिलाफ 9 गोल के साथ ही वह एशियन गेम्स के एक ही मैच में इतने सारे गोल करने वाली पहली भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी बन गईं।

थाईलैंड ने आखिरकार चौथे क्वार्टर के अंत में एक गोल किया, जब पेनल्टी कॉर्नर पर सुपांसा समंसो की ड्रैग-फ्लिक थोड़ी सी दिशा बदलकर गोल में चली गई। सजोर्ड मारिज्ने की कोचिंग वाली टीम पूल स्टैंडिंग में सबसे ऊपर है और शुक्रवार को जापान के खिलाफ होने वाले मुकाबले की तैयारी कर रही है।

भारत ने हांगझोऊ 2023 में ब्रॉन्ज मेडल जीता था और अब 1982 के बाद से अपने पहले एशियन गेम्स गोल्ड मेडल की तलाश में है। 1982 में भारत ने घरेलू जमीन पर हुए गेम्स में इस खेल के पहले ही एडिशन में सोना जीता था।

 

 

दीपिका के बारे में

6 दिसंबर 2003 को हरियाणा के हिसार में जन्मीं दीपिका का परिवार कुश्ती से गहराई से जुड़ा हुआ था। उनके पिता चाहते थे कि वह भी परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाएं, इसलिए वह अक्सर उन्हें अपने बड़े भाई के साथ हिसार में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के कुश्ती सेंटर में ट्रेनिंग के लिए ले जाते थे।

ऐसे इलाके में जहां कुश्ती को ही खेल में सफलता का मुख्य रास्ता माना जाता था, वहां हॉकी को उनके लिए कोई आम विकल्प नहीं समझा जाता था। आठ साल की उम्र में कुश्ती के अखाड़े की ओर जाते हुए उनकी नजर पास के हॉकी मैदान पर पड़ी। लड़कियों के एक ग्रुप को तेजर से बॉल पास करते और एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाते हुए देखकर वह पूरी तरह से प्रभावित हो गईं।

कोई खेल नहीं खेलूंगी

घर लौटकर उन्होंने अपने पिता से साफ कह दिया, "अगर मुझे कोई खेल खेलना है, तो वह हॉकी ही होगा; वरना, मैं कोई खेल नहीं खेलूंगी।" शुरू में उनके परिवार ने इसे बचपन की जिद समझकर नजरअंदाज कर दिया और सोचा कि वह जल्द ही कुश्ती में लौट आएंगी। उनकी जिद के आगे झुकते हुए, उनके पिता ने आखिरकार मशहूर हॉकी कोच आजाद सिंह मलिक को राजी कर लिया कि वह 11 साल की उम्र में उन्हें ट्रेनिंग दें।

रेसलिंग में उनकी शुरुआती ट्रेनिंग अचानक उनके खेल के लिए सबसे बड़ा फायदा बन गई। उस कड़ी शुरुआती ट्रेनिंग ने उन्हें बहुत मजबूत अपर बॉडी और कोर दिया। कोच मलिक और टीम के रणनीतिकारों ने जल्द ही समझ लिया कि यह खास कुदरती ताकत एक फॉरवर्ड-स्ट्राइकर और पेनल्टी-कॉर्नर स्पेशलिस्ट के लिए एकदम सही शारीरिक आधार थी।

अपनी जबरदस्त ड्रैग-फ्लिकिंग स्किल्स को और बेहतर बनाने के लिए, उन्होंने भारतीय दिग्गज रूपिंदर पाल सिंह और डच स्पेशलिस्ट ताके ताकेमा के साथ खास मास्टरक्लास कैंप में हिस्सा लिया। वहां उन्होंने सीखा कि कैसे 'फर्स्ट रशर' को छकाया जाए और दबाव में सही तरीके से शॉट लगाया जाए। 2025 में, वह दुनिया की नंबर 1 नीदरलैंड्स टीम के खिलाफ एक शानदार सोलो गोल करने के लिए प्रतिष्ठित 'पोलिग्रास मैजिक स्किल अवॉर्ड' जीतने वाली पहली भारतीय बनीं।

इसके तुरंत बाद, ग्रेड III हैमस्ट्रिंग टियर की गंभीर चोट के कारण उनके करियर पर बड़ा खतरा मंडराने लगा। महीनों तक दर्दनाक अकेलेपन, मन में शक और अकेले ही रिहैब करने के बाद उन्होंने जबरदस्त वापसी की और जून 2026 में FIH नेशंस कप में संयुक्त रूप से सबसे ज्‍यादा गोल करने वाली खिलाड़ी बनीं।

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