शारदीय नवरात्र के लिए सजा मां चिंतपूर्णी का दरबार, श्रद्धालुओं को ऑनलाइन भी मिलेगी सुगम दर्शन पर्ची; 4 बजे खुलेंगे कपाट
चिंतपूर्णी में 11 से 20 अक्टूबर तक शारदीय नवरात्र मेले का आयोजन हो रहा है, जिसमें डेढ़ से दो लाख ...और पढ़ें

फूलों से सजाया गया माता श्री चिंतपूर्णी का दरबार।
HighLights
शारदीय नवरात्र मेला 11 से 20 अक्टूबर तक चिंतपूर्णी में।
डेढ़ से दो लाख श्रद्धालुओं के लिए पुख्ता इंतजाम।
मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों से भव्य रूप से सजाया गया।
जागरण टीम, चिंतपूर्णी (ऊना)। उत्तर भारत के प्रसिद्ध तीर्थस्थल चिंतपूर्णी में शारदीय नवरात्र मेलों का आयोजन रविवार से हो रहा है। यह नवरात्र मेला 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक चलेंगे। 19 अक्टूबर को श्री दुर्गाष्टमी का त्योहार मां के दरबार में मनाया जाएगा। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए बेहतर प्रबंध का दावा किया है। मेले में डेढ़ से दो लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है।
मंदिर में नवरात्र से पहले धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधक पहुंच गए हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए लंगर की व्यवस्था करेंगे। इन लंगरों में व्रत का खाना भी परोसा जाएगा। नवरात्र मेले के दौरान पुजारी वर्ग द्वारा जनकल्याण के लिए हवन की आहुतियां भी प्रतिदिन मंदिर में डाली जाएंगी।
श्रद्धालुओं को मां के दर्शन बिना पर्ची के होंगे, जबकि सुगम दर्शन पर्ची बाबा माईदास सदन के काउंटर पर उपलब्ध रहेगी और ऑनलाइन भी श्रद्धालु इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। श्रद्धालु इस https://www.matashrichintpurni.com/sugam-darshan-pranali.php साइट के माध्यम से भी ऑनलाइन पर्ची पा सकते हैं। 1100 रुपये देकर श्रद्धालु बिना लाइन में लगे दर्शन कर सकते हैं।
सुबह 4 बजे खुलेंगे कपाट
वहीं नवरात्र के दौरान दुर्गाष्टमी के दिन विशेष पूजा व कन्या पूजन किया जाएगा। नवरात्र के पहले दिन मंदिर के कपाट चार बजे खुलेंगे। मंदिर के बंद होने का समय श्रद्धालुओं की संख्या के आधार पर तय किया जाएगा।
दो मेडिकल पोस्ट स्थापित
शारदीय नवरात्र मेले के दौरान मां के भक्तों को आपातकालीन चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने के लिए चिंतपूर्णी अस्पताल 24 घंटे सेवाएं प्रदान करेगा। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग और आयुर्वेद विभाग की ओर से एक-एक मेडिकल पोस्ट स्थापित की जाएंगी, जहां श्रद्धालुओं को आवश्यकता के अनुसार उपचार प्रदान किया जाएगा।
एलेापेथी का बूथ बाबा माइदास सदन चिंतपूर्णी में और आयुर्वेद विभाग का कैंप पुराने बस अड्डे में स्थापित किया जाएगा। दो रोगी वाहन भी मेला क्षेत्र में उपलब्ध रहेंगे।
भिक्षावृत्ति पर पुलिस की नजर
श्रद्धालुओं को स्वच्छ एवं साफ-सुथरा पानी मुहैया करवाने की जिम्मेदारी जल शक्ति विभाग की होगी। मेले के दौरान भिक्षावृत्ति पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसे रोकने के लिए पुलिस, होमगार्ड के जवान कड़ी नजर रखेंगे। आग की घटनाओं की रोकथाम के लिए अग्निशमन विभाग को मेले के दौरान अपनी सेवाएं देगा।
नारियल चढ़ाने पर प्रतिबंध
मेले में मंदिर में नारियल चढ़ाने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध रहेगा। जो भी नारियल मंदिर के मुख्य द्वार पर श्रद्धालुओं से लिए जाएंगे, बाद में उन्हें मां के भक्तों में ही वितरित कर दिया जाएगा।
लंगर लगाने की लगेगी फीस
वहीं, मेला क्षेत्र में लंगर लगाने से पूर्व प्रशासन की अनुमित लेना अनिवार्य होगा और धार्मिक संस्थाओं से दस हजार रुपए की फीस और दस हजार रुपए धरोहर राशि ली जाएगी।
चार सेक्टर में बांटा मेला क्षेत्र
मेले के दौरान कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए मेला क्षेत्र को चार सेक्टर में बांटा गया है। सेक्टर एक मंदिर प्रवेश द्वार दर्शन स्थल, मुंडन स्थल, लिफ्ट, लक्कड़ बाजार से शंभू बैरियर तक तक, सेक्टर दो मुख्य बाजार, पुराना बस अड्डे से मंदिर के वापसी द्वार तक होगा। तीसरा सेक्टर तलवाड़ा बाईपास से मिरगू तक होगा जबकि चौथा सेक्टर बाबा माईदास सदन से लेकर शिव मंदिर, भरवाईं तक होगा। इसमें ढलियारा रोड़ में जिला की सीमा तक का क्षेत्र होगा।
सजा मां चिंतपूर्णी का दरबार
मां चिंतपूर्णी के दरबार को शारदीय नवरात्र के उपलक्ष्य में बेहद सुंदर तरीके से सजाया गया है। मंदिर की सजावट के लिए विशेष रूप से देशी व विदेशी फूल मंगवाए गए थे, जिन्हें मंदिर परिसर क्षेत्र में लगा दिया गया है। फूलों की सजावट के बाद मंदिर परिसर क्षेत्र का अलग ही नजारा देखने को मिल रहा था। इन्हें एक श्रद्धालु द्वारा मंदिर न्यास को भेंट किया है। बड़ी बात यह है कि सजावट के लिए कारीगर भी विशेष रूप से उक्त श्रद्धालु द्वारा ही यहां भेजे गए हैं।
वहीं, मंदिर न्यास के लंगर में श्रद्धालुओं को देसी घी से बना लजीज खाना परोसा जाएगा। हर दिन श्रद्धालुओं को अलग-अलग व्यंजन ब्रेकफास्ट, लंच व डिनर में दिए जाएंगे।
क्या कहते हैं मंदिर अधिकारी
मंदिर अधिकारी संजीव प्रभाकर ने बताया कि मंदिर प्रशासन द्वारा शारदीय नवरात्र को लेकर प्रबंध पूरे कर लिए गए हैं। मां के दर्शनों को आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर न्यास द्वारा बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास किया जाएगा।
