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हिमाचल जलशक्ति विभाग ने डेढ़ साल बाद एक साथ जारी किए पानी के हजारों रुपये के बिल, सोलन में लोगों ने जताया विरोध

By Neha Sharma Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 28 Sep 2026 06:35 AM (IST)

हिमाचल प्रदेश जलशक्ति विभाग ने सोलन में डेढ़ साल बाद पानी के भारी-भरकम बिल जारी किए हैं, जिससे उपभोक्ता परेशान ...और पढ़ें

हिमाचल जलशक्ति विभाग ने सोलन में डेढ़ साल के एक साथ बिल जारी किए हैं। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल जलशक्ति विभाग ने सोलन में डेढ़ साल के एक साथ बिल जारी किए हैं। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. जलशक्ति विभाग ने सोलन में डेढ़ साल बाद बिल जारी किए।

  2. उपभोक्ताओं को 10 से 26 हजार रुपये तक के भारी बिल मिले।

  3. लोग किश्तों में भुगतान की सुविधा की मांग कर रहे हैं।

संवाद सहयोगी, सोलन। हिमाचल प्रदेश जलशक्ति विभाग की ओर से लोगों को लंबे अंतराल के बाद पानी के भारी-भरकम बिल थमाए जाने से उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है। सोलन शहर के लोगों का कहना है कि करीब डेढ़ साल से पानी के बिल नियमित रूप से नहीं आए और अब विभाग ने मई 2024 से मार्च 2026 तक की अवधि के बिल एक साथ जारी किए हैं। इन बिलों की अंतिम भुगतान तिथि 30 सितंबर 2026 रखी गई है।

10 से 15 हजार तक बिल

लोगों के अनुसार कई उपभोक्ताओं को 10 से 15 हजार रुपये तक के पानी के बिल मिले हैं। वहीं, एक उपभोक्ता ने फोन पर बताया कि उसे करीब 26 हजार रुपये का पानी का बिल जारी हुआ है। भारी राशि के बिल हाथ में आने के बाद लोगों के सामने इसे जमा करवाने की चिंता खड़ी हो गई है।

लोगों में आक्रोश

सुशील कुमार, अमन शर्मा, मधु कंवर, सरिता देवी, सुशील कुमार व अन्य उपभोक्ताओं का कहना है कि परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना पहले ही चुनौती हैं। घर का खर्च, बच्चों की स्कूल फीस, दवाएं और अन्य जरूरी खर्चों के बीच अचानक हजारों रुपये का पानी का बिल जमा करवाना आसान नहीं है।

लोगों का सवाल है कि यदि विभाग डेढ़ साल से बिल जारी नहीं कर पाया तो अब इतनी बड़ी राशि एक साथ उपभोक्ताओं से वसूलना उचित कैसे होगा।

देरी का खामियाजा लोग क्यों भुगतें

विकास मोहल्ला कल्याण समिति के प्रधान कंवर मनोहर सिंह ने सरकार और संबंधित विभाग से मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विभाग की देरी का खामियाजा आम लोगों को नहीं भुगतना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि उपभोक्ताओं को भारी-भरकम बिल एकमुश्त जमा करवाने के बजाय किश्तों में भुगतान करने की सुविधा दी जाए, ताकि परिवारों पर अचानक आर्थिक बोझ न पड़े।

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