शिमला-मटौर फोरलेन अलाइनमेंट मामले में हिमाचल हाई कोर्ट ने जनहित याचिका बंद की, कहा- हस्तक्षेप नहीं कर सकते
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने शिमला-मटौर फोरलेन अलाइनमेंट मामले में दायर स्वतः संज्ञान जनहित याचिका को बंद कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

शिमला से मटौर फोरलेन। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
हाई कोर्ट ने शिमला-मटौर फोरलेन अलाइनमेंट PIL को बंद किया।
नीतिगत फैसलों में न्यायिक हस्तक्षेप संभव नहीं, कोर्ट ने स्पष्ट किया।
नई अलाइनमेंट से परियोजना लागत घटेगी, ट्रैफिक जाम कम होगा।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने शिमला-मटौर फोरलेन अलाइनमेंट मामले में स्व संज्ञान वाली जनहित याचिका को बंद कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विशेषज्ञों और हितधारकों द्वारा सोच-समझकर लिए नीतिगत फैसलों में न्यायिक समीक्षा के तहत हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने दिया।
हाई कोर्ट ने एक अक्टूबर 2024 को शिमला-मटौर मार्ग के शिमला से नौणी खंड के अलाइनमेंट में हुए बदलाव को लेकर स्वतः संज्ञान लिया था। इसमें आरोप था कि कुछ लोगों को अवैध लाभ पहुंचाने के लिए इसका रूट बदला है।
उच्चस्तरीय बैठक के बाद दी थी मंजूरी
एनएचएआइ ने अदालत में जवाब दाखिल कर बताया कि शिमला से नौणी चौक खंड को दो पैकेज (शिमला-शालाघाट और शालाघाट-नौणी चौक) में बांटा है। 2022 में उच्चस्तरीय बैठकों के बाद नई अलाइनमेंट को मंजूरी दी थी।
संपत्ति का नुकसान कम होगा
एनएचएआइ के अनुसार, नई अलाइनमेंट से सड़क की ज्यामिति बेहतर होगी, कम पेड़ काटने पड़ेंगे और लोगों के विस्थापन तथा संपत्तियों का नुकसान भी कम होगा। शिमला शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या से राहत मिलेगी। नए रूट से सड़क की लंबाई करीब 2.5 किलोमीटर कम हो जाएगी, जिससे परियोजना की लागत भी घटेगी।
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