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मिल्की मशरूम की नई किस्म करेगी मालामाल, मैदानी क्षेत्र में भी खेती संभव; औसतन 36 दिन में तैयार होगी फसल

By Manmohan VashishatEdited By: Rajesh Sharma
Published: Tue, 08 Sep 2026 12:57 PM (IST)

आईसीएआर-डीएमआर सोलन ने मिल्की मशरूम की उन्नत प्रजाति डीएमआरओ-382 विकसित की है, जो उच्च उपज और औषधीय गुणों से भरपूर है।

डीएमआर सोलन द्वारा विकसित मैक्रोसाइबे जिगांईटिया मशरूम की नई प्रजाति डीएमआरओ-382। जागरण

डीएमआर सोलन द्वारा विकसित मैक्रोसाइबे जिगांईटिया मशरूम की नई प्रजाति डीएमआरओ-382। जागरण

HighLights

  1. आईसीएआर-डीएमआर सोलन ने मिल्की मशरूम डीएमआरओ-382 प्रजाति विकसित की।

  2. यह किस्म गर्म क्षेत्रों में 28-32 डिग्री सेल्सियस पर भी उगाई जा सकेगी।

  3. औसतन 36 दिन में तैयार होती है फसल, उच्च जैविक दक्षता।

मनमोहन वशिष्ठ, सोलन। हिमाचल प्रदेश में सोलन स्थित आइसीएआर-मशरूम अनुसंधान निदेशालय (डीएमआर) ने मैक्रोसाइबे जिगांइटिया (मिल्की मशरूम) की उन्नत प्रजाति डीएमआरओ-382 विकसित की है। खास बात यह है कि इस प्रजाति ने विभिन्न क्षेत्रों व मौसमों में उत्कृष्ट व समान प्रदर्शन किया है। डीएमआरओ-382 मशरूम स्वास्थ्य और पोषण की दृष्टि से बेहद लाभदायक है। इसमें मिल्की मशरूम की तरह कई औषधीय गुण हैं। 

स्वादिष्ट होने के साथ-साथ कई तरह के पोषक तत्व होने के कारण मधुमेह व उच्च रक्तचाप को नियंत्रित में रखने में सहायक है। हाल ही में गुवाहाटी में हुए एक सेमिनार में इस किस्म को मान्यता देकर रिलीज किया गया है।

विभिन्न जगह प्ररीक्षण सफल

इस प्रजाति का विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग वर्षों में किया परीक्षण सफल रहा है। इससे इसकी उच्च पैदावार क्षमता, अनुकूलनशीलता व स्थिरता का पता चलता है। यह किस्म व्यावसायिक मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बनेगी। 

28 से 32 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी उगाया जा सकेगा

नई किस्म विकसित करने के लिए डीएमआर के देशभर में 32 केंद्रों में से बेंगलुरु, कोयंबटूर, वैलायनी, रायपुर व सोलन में परीक्षण किया। तीन वर्ष तक चले परीक्षण में नई किस्म को विकसित करने में सफलता मिली। यह किस्म अधिक उपज व बेहतर गुणवत्ता वाली है। गर्म क्षेत्रों में 28 से 32 डिग्री सेल्सियस तापमान में इसे उगाया जा सकेगा।

36 दिन में तैयार होती है फसल

परीक्षण के दौरान डीएमआरओ-382 किस्म ने कई बेहतरीन आंकड़े दर्ज किए हैं। औसतन 47.1 प्रतिशत की शानदार जैविक दक्षता रही। पहली फसल औसतन 36.4 दिन में तैयार हो जाती है। इसके एक फल (मशरूम) का औसत भार 49.9 ग्राम दर्ज किया है। 

गेहूं और धान दोनों के भूसे में खेती संभव

इस किस्म का परीक्षण गेहूं और धान के भूसे दोनों ही सबस्ट्रेट्स पर सफलतापूर्वक किया है, जिससे यह साबित होता है कि किसान स्थानीय रूप से उपलब्ध इन कृषि अवशेषों पर आसानी से इसकी खेती कर सकते हैं। इससे देशभर के मशरूम उत्पादकों को कम लागत में अधिक लाभ कमाने का नया अवसर व व्यावसायिक मशरूम खेती को नई दिशा मिलेगी।

क्या कहते हैं विज्ञानी

डीएमआरओ-382 मशरूम गर्म व मैदानी क्षेत्रों में उगाने के लिए बेहतरीन विकल्प है। यह व्यावसायिक उत्पादन के लिए बेहतर विकल्प होगी।
-डा. मनोज नाथ, वरिष्ठ विज्ञानी, डीएमआर सोलन। 

15 दिन में मिलेगा बीज 

मैक्रोसाइबे जिगांइटिया की नई प्रजाति डीएमआरओ-382 को देशभर के पांच केंद्रों में तीन वर्ष के परीक्षण के बाद विकसित किया है। इसका बीज उत्पादकों को मांग के अनुसार 15 दिन में उपलब्ध करवाया जाएगा।
-डा. बीएल अत्री, कार्यकारी निदेशक, डीएमआर सोलन।

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