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'इंटेलिजेंस और प्रशासनिक फेलियर था ऑपरेशन ब्लूस्टार', कसौली लिटफेस्ट में लेखक प्रोबल दासगुप्ता ने दी बेबाक राय

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 26 Oct 2026 11:49 AM (IST)

कसौली में 15वें खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में लेखक प्रोबल दासगुप्ता ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल सुंदरजी के जीवन पर चर्चा की। उन्होंने ऑपरेशन ब्लूस्टार को इंटेलिजेंस व प्रशासनिक विफलता बताया।

खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में मंच पर मौजूद लेखक प्रोबल दासगुप्ता। जागरण

खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में मंच पर मौजूद लेखक प्रोबल दासगुप्ता। जागरण

HighLights

  1. प्रोबल दासगुप्ता ने जनरल सुंदरजी के जीवन और विरासत पर बात की।

  2. ऑपरेशन ब्लूस्टार को इंटेलिजेंस और प्रशासनिक विफलता करार दिया गया।

  3. बोफोर्स तोप खरीद में रिश्वत के रहस्य पर भी चर्चा हुई।

मनमोहन वशिष्ठ, कसौली (सोलन)। हिमाचल प्रदेश में सोलन जिले की पर्यटन नगरी कसौली 15वें खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के अंतिम दिन लेखक प्रोबल दासगुप्ता ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल कृष्णस्वामी सुंदरजी (1986 से 1988) के जीवन व उनकी विरासत पर चर्चा की। पत्रकार सुनेत्रा चौधरी द्वारा संचालित इस सत्र में प्रोबल दासगुप्ता ने ऑपरेशन ब्लूस्टार पर कहा कि यह इंटेलिजेंस व प्रशासनिक फेलियर था। दो साल से स्वर्ण मंदिर में हथियार एकत्रित किए जा रहे थे, लेकिन इसमें प्रशासनिक विफलता रही।

जनरल सुंदरजी ने दरकिनार किया प्रोटोकाल

जनरल सुंदरजी: सेलिब्रेटेड और डिबेटेड विषय में जनरल ब्रासस्टैक्स: द सुंदरजी स्टोरी किताब पर चर्चा करते हुए प्रोबल दासगुप्ता ने कहा कि पश्चिमी कमान के प्रमुख के रूप में सुंदरजी ने प्रोटोकाल को दरकिनार कर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से बात की। उस समय के डिवीजन कमांडर मेजर जनरल बराड़ ने स्वर्ण मंदिर की घेराबंदी करने का सुझाव दिया था, लेकिन सुंदरजी की सोच कुछ और ही था।

ना प्रमुख को भी नजरअंदाज कर दिया

उन्होंने तत्कालीन सेना प्रमुख को भी नजरअंदाज कर दिया और अपनी योजना पर आगे बढ़े। अंततः सेना ने स्वर्ण मंदिर परिसर पर हमला कर दिया, जिसके बेहद दुखद परिणाम निकले। सुरक्षा बल, नौकरशाही व राजनीतिक वर्ग के बीच कोई तालमेल नहीं था। उससे उपजे रोष से एक प्रधानमंत्री को अपनी जान गंवानी पड़ी।

बोफोर्स तोप खरीद में रिश्वत किसे मिली

प्रोबल दासगुप्ता ने कहा कि बोफोर्स तोप खरीद में 64 करोड़ रुपये की रिश्वत किसे मिली, यह पता आज तक नहीं लग पाया है। सरकार ने इसकी जांच के लिए स्वीडिश अथारिटी को भी नहीं लिखा, जिस कारण घोटाले की सच्चाई बाहर नहीं आ पाई। हालांकि जनरल सुंदरजी हमेशा कहते थे कि बोफोर्स तोप सही थी, लेकिन सौदा गलत था।

दूसरे की लड़ाई में श्रीलंका सेना भेजी

श्रीलंका मामले में उन्होंने कहा कि भारत ने दूसरे की लड़ाई में अपनी सेना भेजी, जिसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को जान गंवानी पड़ी। जिक्र हुआ कि पीएम रहते राजीव गांधी की मुलाकात प्रभाकरण से हुई थी। लौटते समय प्रभाकरण को राजीव गांधी ने बुलेट प्रूफ जैकेट भी दी थी। यह घटना एलटीटीई द्वारा राजीव गांधी की हत्या किए जाने से चार साल पहले की है।

ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स 

ऑपरेशन ब्रासस्टैक्स पर दासगुप्ता ने बताया कि पाकिस्तान की सीमाओं पर पांच लाख सैनिकों को तैनात किया था। जनरल सुंदरजी पाकिस्तान की रक्षा क्षमताओं को परखना चाहते थे, लेकिन उन्होंने देश को एक खतरनाक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया था। 

सतीश गुजराल के जीवन पर चर्चा

अन्य सत्र में अमन नाथ व फिरोज गुजराल ने सतीश गुजराल के जीवन और उनकी विरासत पर अपनी बात रखी। वह पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के छोटे भाई थे। अन्य सत्र में गार्गी रावत ने श्रेया जानी के साथ उनकी किताब स्लो लिविंग: व्हाट यू कैन डू अबाउट क्लाइमेट चेंज पर चर्चा की। शाइनी एंटनी व सत्यजीत सामंत ने घूल्स एंड गुड रीड्स पर चर्चा की। देवकी पांडे, शोभा श्राफ व डा. जतिंदर परवाज ने ने भी अन्य सत्र में हिस्सा लिया। अखिल गुप्ता के सत्र क्लोजिंग: द हैप्पीनेस लैब में अभिनेत्री पूजा बेदी ने भी चर्चा की।

वक्ताओं ने गंभीर व समसामयिक विषयों पर खुलकर रखी बात

लिटफेस्ट में देशभर से पहुंचे करीब 70 वक्ताओं ने विभिन्न गंभीर व समसामयिक विषयों पर खुलकर बात रखी। लिटफेस्ट का इस वर्ष का थीम 'असहमति की कला : मतभेदों के पार' रहा। वक्ताओं ने लोकतंत्र, वैचारिक स्वतंत्रता, कला, साहित्य और वर्तमान दौर की चुनौतियों पर बेबाक राय रखी। सत्रों के दौरान श्रोताओं व वक्ताओं के बीच सवालों-जवाबों का सिलसिला भी खूब चला, जिसने हर किसी का ध्यान खींचा। कसौली क्लब में लिटफेस्ट के समापन के बाद कसौली स्थित दिवंगत लेखक खुशवंत सिंह के निवास स्थान राज विला में डिनर पार्टी हुई। इसमें देशभर से आए साहित्य प्रेमियों, लेखकों, कलाकारों व आयोजकों ने शिरकत की।

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