योगेश चौहान, अर्की

अर्की में तीन वर्ष पहले खुली फायर चौकी में आज भी आग बुझाने के पुख्ता इंतजाम नहीं है। आलम यह है की अर्की में फायर चौकी तो खोली गई, लेकिन आग बुझाने वाले वाहन के टैंकरों में पानी भरने के लिए हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ रहा है।

तीन वर्ष बाद भी प्रशासन व आइपीएच विभाग अग्निशमन चौकी को एक हाइड्रेंट उपलब्ध नहीं करवा पाया है। जंगलों में सरकारी व निजी वन संपदा के नुकसान को देखते हुए पूर्व सरकार ने अर्की तहसील के लोगो की लगातार मांग पर एक फायर चौकी दी, जबकि क्षेत्र फल व आबादी को देखते हुए अर्की में फायर स्टेशन होना चाहिए था। चौकी खुलते ही सरकार ने आनन फानन में आग बुझाने के सभी उपकरण व वाहन तो उपलब्ध करवा दिए, लेकिन आग बुझाने में पानी की जरूरत पर ध्यान नहीं दिया। इससे बेबस अग्निशमन कर्मचारियों को पानी टैंकर वाहन खाली होने पर एसडीएम अर्की के माध्यम से निजी ट्यूबवेल मालिकों या कंपनी प्रबंधन से पानी का टैंकर भरवाने की गुहार लगानी पड़ती है या फिर खड्ड में जाकर पंप से पानी भरना पड़ता है। जिस कारण कई बार घटना स्थल तक पहुंचने में देरी भी हो जाती है।

ऐसी स्थिती में दुर्घटनास्थल पर कई बार फायर कर्मियों को स्थानीय लोगों व पीड़ितों के गुस्से का शिकार भी होना पड़ता है। फायर कर्मियों का कहना है पानी की पर्याप्त सुविधा नहीं होने से उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहा है, लेकिन सुविधा मिलने के बाद क्षेत्र ही क्षेत्र के ऐसी कोई समस्या नहीं रहेगी। इस बारे में लोगों की राय है कि हर पंचायत में आइपीएच विभाग को मेन वाटर टैंक से एक हाईड्रेंट सड़क के समीप रखना चाहिए, ताकि अग्निशमन वाहन को बार-बार पानी के लिए अर्की आने की बजाय दुर्घटनास्थल के नजदीक पानी मिल जाए। विभागीय कर्मचारियों की मानें तो इसके बारे में कई बार आइपीएच से पत्राचार किया जा चुका है। मामला एसडीएम अर्की के ध्यानार्थ में भी है।

भूपेंद्र ठाकुर लीडिग प्रभारी व फायर मेन अर्की फायर चौकी का कहना है कि आइपीएच विभाग व एसडीएम अर्की को इस समस्या से अवगत करवाया गया है। आइपीएच विभाग के अधिशाषी अभियंता कंचन माला का कहना है कि उन्होंने अभी पदभार संभाला है। मेरे समय मे इस बारे में कोई पत्र नहीं आया फिर भी समस्या के बारे विभाग से बातचीत की जाएगी। एसडीएम अर्की विकास शुक्ला ने कहा कि विभाग से मिलकर शीघ्र समस्या का समाधान किया जाएगा।

Posted By: Jagran

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