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हिमाचल चेस्टर हिल विवाद: फ्लैट खरीदारों की बढ़ी चिंता, लाखों रुपये खर्च करने के बाद अब बेदखली का डर

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 16 Apr 2026 11:22 AM (IST)

सोलन की चेस्टर हिल कॉलोनी के फ्लैट खरीदार बेदखली की आशंका से चिंतित हैं। धारा-118 के उल्लंघन और अवैध निर्माण ...और पढ़ें

सोलन के चेस्टर हिल में बन रहे फ्लैट। जागरण आर्काइव

सोलन के चेस्टर हिल में बन रहे फ्लैट। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. सोलन चेस्टर हिल के फ्लैट खरीदार बेदखली से चिंतित।

  2. धारा-118 उल्लंघन और अवैध निर्माण के आरोप।

  3. 23 अप्रैल को मामले की अगली सुनवाई।

जागरण टीम, शिमलासोलन। हिमाचल प्रदेश में सोलन की चर्चित चेस्टर हिल आवासीय कालोनी में फ्लैट खरीद चुके लोग चिंतित हैं। कालोनी पर सरकारी कब्जे या प्रशासनिक कार्रवाई की आशंका ने सैकड़ों परिवारों को असमंजस में डाल दिया है। वर्तमान में कोई भी परिवार खुलकर बात रखने को तैयार नहीं है, जबकि कुछ महीने पहले तक कई परिवार इस मुद्दे पर सक्रिय थे।

लाखों रुपये खर्च कर सपनों का घर खरीदने वाले लोग बेदखली के डर से परेशान हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन और सरकार की कार्रवाई इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेगी।

कब्जे में भी ले सकते हैं बिल्डिंग

चेस्टर हिल कालोनी के संबंध में लंबे समय से भूमि स्वामित्व, निर्माण अनुमति और नियमों के उल्लंघन जैसे मुद्दे उठते रहे हैं। यदि संबंधित एजेंसियां कालोनी को अवैध या विवादित मानते हुए कब्जे में लेती हैं तो इसका सीधा असर वहां निवास कर रहे लोगों पर पड़ेगा। यदि कालोनी में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी बिल्डर और संबंधित विभागों की होगी।

फ्लैट बेचते समय सभी दस्तावेजों को सही बताया गया था, ऐसे में अब आम लोगों को सजा क्यों दी जा रही है, यह एक बड़ा प्रश्न है।

फ्लैट खरीदारों की सबसे बड़ी चिंता

फ्लैट खरीदारों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि उन्होंने जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर यहां फ्लैट खरीदे हैं। कई लोगों ने बैंक से लोन लेकर भुगतान किया है। यदि बेदखली की स्थिति उत्पन्न होती है, तो वे न केवल अपने घर से हाथ धो बैठेंगे, बल्कि आर्थिक रूप से भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। घर छीने जाने के बावजूद ईएमआइ चुकानी पड़ेगी। अपने अधिकारों के लिए कोर्ट का सहारा लेना पड़ सकता है, जिसमें समय और पैसा दोनों खर्च होंगे।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी संपत्ति को खरीदने से पहले भूमि स्वामित्व, नक्शा पास और सभी वैधानिक मंजूरियों की जांच करना आवश्यक है। लेकिन आम लोग अक्सर बिल्डर के भरोसे निवेश कर देते हैं, जिससे बाद में विवाद उत्पन्न होते हैं।

धारा-118 के उल्लंघन के प्रमाण 

चेस्टर हिल परियोजना पर पहले ही तहसीलदार और एसडीएम स्तर से जांच रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है, जिसमें धारा-118 के उल्लंघन के प्रमाण मिले हैं। इसके बावजूद न तो निर्माण कार्य पर कोई रोक लगाई है और न ही फ्लैट्स की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया है। बड़ा विवाद ज्वाइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट (जेडीए) को लेकर सामने आया है। 

चार लोगों के नाम पर जमीन खरीदकर टाउनशिप विकसित की

आरोप है कि अन्य राज्यों के निवेशकों ने हिमाचल के एक ही परिवार से जुड़े चार सदस्यों के नाम पर जमीन खरीदी और फिर उस पर करोड़ों रुपये का निवेश कर टाउनशिप विकसित की। जेडीए के माध्यम से धारा-118 की शर्तों का उल्लंघन किया गया, जिसमें गैर-हिमाचली लोगों ने स्थानीय कृषकों का कथित तौर पर दुरुपयोग किया।

सीधे तौर पर नहीं खरीद सकते जमीन

प्रदेश में लागू धारा-118 के तहत अन्य राज्यों के लोग सीधे तौर पर जमीन नहीं खरीद सकते। केवल वही व्यक्ति भूमि खरीद सकता है जो राज्य का कृषक हो। इस कानून का उद्देश्य प्रदेश की भूमि को बाहरी प्रभाव से सुरक्षित रखना है। कई मामलों में देखा है कि बाहरी निवेशक स्थानीय लोगों को मोहरा बनाकर इस कानून को दरकिनार करते हैं और बड़े प्रोजेक्ट्स खड़े कर लेते हैं। 

600 फ्लैट बने, 200 में रहते हैं लोग

चेस्टर हिल में चार टावर फेज-वन से लेकर फेज-फोर हैं। इन टावर में करीब 600 फ्लैट बन चुके हैं और 200 में लोग रहते हैं। शेष खाली पड़े हैं। इस आवासीय कालोनी में निर्माण कार्य अभी चला है।

फिलहाल इस प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य पर कोई रोक नहीं लगाई है। शिकायत पर जांच जारी है और मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को निर्धारित की है। यह मामला अब जिला दंडाधिकारी की अदालत में है, जहां सभी पक्षों को सुना जाएगा। इसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
-मनमोहन शर्मा, उपायुक्त सोलन।