Asian Games: पिता और भाई के साथ खेलकर सीखे कबड्डी के गुर, कैप्टन पुष्पा ने आज भारत को दिलाया गोल्ड मेडल
भारतीय महिला कबड्डी टीम ने 20वें एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर हैट्रिक लगाई है, जिसमें हिमाचल प्रदेश की पुष्पा राणा ने बतौर कप्तान अहम भूमिका निभाई।

भारतीय कबड्डी टीम की कप्तान हिमाचल निवासी पुष्पा राणा।
HighLights
भारतीय महिला कबड्डी टीम ने एशियन गेम्स में गोल्ड जीता।
हिमाचल की पुष्पा राणा ने टीम की कप्तानी की।
पुष्पा ने पिता और भाई से कबड्डी सीखी थी।
जागरण संवाददाता, नाहन। जापान में हो रहीं 20वीं एशियन गेम्स में शनिवार को भारतीय महिला कबड्डी टीम ने गोल्ड मेडल जीता है। भारतीय महिला कबड्डी टीम ने तीसरी बार एशियाई गेम्स में गोल्ड मेडल जीत के साथ हैट्रिक लगाई है। हिमाचल प्रदेश की चार बेटियों पुष्पा राणा, रितु नेगी, ज्योति ठाकुर व भावना ठाकुर ने अहम भूमिका निभाई। भारतीय टीम की कप्तान पुष्पा राणा ने बेहतरीन डिफेंडर के तौर पर अपना प्रदर्शन किया और भारतीय टीम को जीत दिलाने में एम भूमिका निभाई।
पिता और भाई के साथ कबड्डी खेलकर आगे बढ़ीं पुष्पा
पुष्पा राणा का जन्म 11 जनवरी 1998 को सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र के मिल्लाह गांव में हुआ था। उनके पिता जयपाल शिक्षक के साथ कबड्डी खिलाड़ी भी रह चुके हैं। पुष्पा ने शुरुआती वर्षों में अपने पिता जयपाल और भाई संजीव से कबड्डी सीखना शुरू किया। उनके परिवार ने उन्हें इस खेल में भरपूर सहयोग और मार्गदर्शन दिया। उन्होंने स्कूल, कॉलेज, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं सहित विभिन्न स्तरों पर कबड्डी खेली है।

पुष्पा राणा के पिता शिक्षक जयपाल राणा अपने स्कूल में बच्चों को मिठाई बांटकर खुशी मनाते हुए। जागरण
पुष्पा राणा की खेल में खासियत
पुष्पा राइट रेडर के रूप में खेलती हैं और रेडिंग और डिफेंस दोनों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा के लिए जानी जाती हैं। वह बोनस अंक हासिल करने और हैंडटच तकनीक को कुशलता से अंजाम देने में विशेष रूप से निपुण हैं। खेल के प्रति उनका संतुलित दृष्टिकोण उन्हें भारतीय टीम में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाता है। पुष्पा राणा की कैप्टनशिप में नेशनल गेम्स में लगातार तीन बार गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा।
कबड्डी एसोसिएशन ने दी बधाई
हिमाचल प्रदेश कबड्डी एसोसिएशन के महासचिव कुलदीप राणा ने एशियन गेम्स में भारतीय महिला कबड्डी टीम व हिमाचल प्रदेश की चारों बेटियों को बधाई दी है।
यह भी पढ़ें: एशियन गेम्स: सावन बरवाल ने मैराथन में 44 साल बाद देश को दिलाया पदक, हिमाचल में घर पर जश्न; कोच बोले- सपना साकार
